Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 20, 2017

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1फ़ौजी किसान-डॉ. जेन्नी शबनम

 1.

कर्म पे डटा

कभी नही थकता

फ़ौजी किसान। 

2.

किसान हारे

ख़ुदकुशी करते,

बेबस सारे। 

3.

सत्ता बेशर्म

राजनीति करती,

मरे किसान। 

4.

बिकता मोल

पसीना अनमोल,

भूखा किसान। 

5.

कोई न सुने

किससे कहे हाल

डरे किसान। 

6.

भूखा लाचार

उपजाता अनाज

न्यारा किसान। 

7.

 माटी का  पू

माटी को सोना बना

माटी में मिला

8.

क़र्ज़ में डूबा

पेट भरे सबका,

भूखा अकड़ा 

9.

कर्म ही धर्म

किसान कर्मयोगी,

जीए या मरे। 

10.

अन्न उगाता

सर्वहारा किसान

बेपरवाह। 

 11.

निगल गई

राजनीति राक्षसी,

किसान मृत

12.

अन्न का दाता

किसान विष खाता

हो के लाचार। 

13.

देव अन्न का 

मोहताज अन्न का

कैसा है न्याय?

14.

बग़ैर स्वार्थ

करते परमार्थ

किसान योगी। 

15.

उम्मीद टूटी

किसानों की ज़िन्दगी

जग से रूठी। 

16.

हठी किसान

हार न माने, भले

साँसें निढाल। 

17.

रंगे धरती

किसान रंगरेज,

ख़ुद बेरंग। 

18.

माटी में सना

माटी का रखवाला

माटी में मिला। 

19.

हाल बेहाल

प्रकृति बलवान

रोता किसान। 

-0-

2-डॉ. सरस्वती माथुर

1

शाखें हिला के

परिंदे ना उड़ाओ

तरू रोयेंगे।

2

नमकीन थीं

झील पार डोलतीं

मन हवाएँ ।

3

इमली बूटा

आँधी में शाखें हिली

पेड़ से टूटा ।

4

कच्ची सी धूप

आँगन बुहार के

रु पे चढ़ी ।

5

कुम्हार सूर्य

धूप की चाक पर

किरणें गढ़े

6

झीना घूँघट

चटक चाँदनी का

चाँद  उठा

7

मौसम संग

स्वप्न  बदलते ज्यूँ

धूप के रंग ।

8

भाड़ झोंकता

सूरज भभूजा

धूप सेंकता।

9

मन है लौ

समय लालटेन

यादें उजाले ।

-0-

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Responses

  1. Bahut sundar …..

  2. डॉ जैनी जी,उम्दाभिव्यक्ति!किसान का जीवन ,उसका दर्द,यथार्थ शब्दों के साँचे में ढाला ….
    डॉ.माथुर जी…बेहतरीन हाइकु

  3. जैन्नी जी किसान की आज की अवस्था पर मार्मिक हाइकु।
    कर्म पे डटा
    कभी नही थकता
    फ़ौजी किसान। डाॅ माथुर के प्रकृति के सुन्दर हाइकु । बधाई आप दोनों को ।

  4. दुखद सत्य ..सुन्दर

  5. सुंदर और सत्य -अलग भी एक भी |
    पुष्पा मेहरा

  6. जेन्नी जी, आपने किसानों की पीड़ा को बखूबी से उकेरा है | बधाई आपको
    सरस्वती जी, धूप के विभिन्न रूप हैं आपके हाइकु में | बधाई |

    सस्नेह,
    शशि पाधा

  7. माटी में सना
    माटी का रखवाला
    माटी में मिला।
    sunder aur sachche vhav
    मौसम संग
    स्वप्न बदलते ज्यूँ
    धूप के रंग ।
    sunder likha hai
    badhai aapdono ko
    rachana

  8. कच्ची सी धूप
    आँगन बुहारके
    तरु पे चढ़ी ।

    क्या खूब जेन्नी जी ।

  9. बहुत उम्दा हाइकु… जेनी जी, सरस्वती जी बहुत बधाई।

  10. डॉ . सरस्वती माथुर जी , डॉ . जेन्नी जी आपके हाइकु अच्छे लगे , सुंदर हाइकु विन्यास के लिये बधाई ।

    रमेश कुमार सोनी , बसना , छत्तीसगढ़

  11. ह्रदयस्पर्शी हाइकु आप दोनों को हार्दिक बधाई

  12. बहुत खूबसूरत हाइकु…आप दोनों को हार्दिक बधाई…|

  13. उम्दा हाइकु के लिए सरस्वती जी को बहुत बधाई. मेरे हाइकुओं को पसंद करने के लिए हृदय से आप सभी का आभार.

  14. डॉ.जेन्नी शबनम जी और डॉ . सरस्वती माथुर जी ,को सुन्दर – सामयिक हाइकु सृजन के लिए बधाई देता हूँ। हार्दिक शुभकामनाएँ ! – सुभाष चंद्र लखेड़ा


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