Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 15, 2017

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1-प्रियंका गुप्ता

1

सूखी धरती

दहकता गगन

तेरे ही कर्म ।

 2

मन जो तपे

प्रेम के छींटे मार

भीग जाएगा ।

 3

नारी का मन

तूने जाना ही नहीं

रहा अज्ञानी ।

 4

मिला न प्रेम

खोजते उम्र झरी

कस्तूरी बनी ।

 5

उँगली थाम

चलना था सिखाया

भूला वो अब ।

 -0-

2-पुष्पा मेहरा

 

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Responses

  1. मन जो तपे
    प्रेम के छींटे मार
    भीग जाएगा ।
    प्रियंका जी के सरस हाइकु । बधाई ।
    पुष्षा दी का लाजवाब हाइगा । चित्र व हाइकु दोनों के लिये बहुत बधाई स्वीकारें ।

  2. गहन भावाभिव्यक्ति के लिए प्रियंका जी व पुष्पा जी को बधाई

  3. Bahut sundar…..laajwaab lekhni….

  4. बहुत सुन्दर ,सरस हाइकु ,
    प्रभावी हाइगा !
    दोनों रचनाकारों को बहुत बधाई !!

  5. प्रियंका जी सभी हाइकु अतिउत्तम ।
    पुष्पा की लाजवाब हाइगा ।
    आप दोनों को हार्दिक बधाई ।

  6. सबका हार्दिक आभार…|
    पुष्पा जी का हाइगा बहुत खूबसूरत है, बहुत बधाई…|

  7. priyanka ji ke sabhi haiku alag-alag bhavon ke achhe likhe hain

    pushpa mehra

  8. mere haiga ko sthan dene ke liye smpadk dvay ka abhar.

    pushpa mehra

  9. आप दोनों को उम्दा हाइकु रचना के लिये बधाई , सुंदर अभिव्यक्ति ।

    रमेश कुमार सोनी ,बसना , छत्तीसगढ़


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