Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 13, 2017

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भावना सक्सैना

1

उगले आग

रोष में है प्रकृति

मानव जाग।

2

मेघ -सा छाया

धरती पे कुहासा

सँभल ज़रा सा।

3

यह क्या किया?

सूखे नदी- जंगल

दहकी धरा।

4

रोपे न वृक्ष

बिगड़ा संतुलन

घुटा है दम।

5

जल क्यों व्यर्थ

हर बूंद लिए है

अपना अर्थ। 

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Responses

  1. पर्यावरण की ओर जागरूक करते
    गरमी के अच्छे हाइकु !
    बधाई !!

  2. बहुत विचारणीय हाइकु, हार्दिक बधाई

  3. जल क्यों व्यर्थ
    हर बूंद लिए है
    अपना अर्थ। 

    बहुत सुंदर हाइकु भावना जी बधाई।

  4. aaj nahi socha to kal sochne se bhi kuchh nahi hoga bahut sunder haiku
    badhai
    rachana

  5. सन्देश से परिपूर्ण सार्थक हाइकु भावना जी हार्दिक बधाई ।

  6. गर्मी का चित्रण करते सुन्दर हाइकु । बधाई भावना जी ।
    नेह लें ।
    विभा रश्मि

  7. पर्यावरण के प्रति सचेत करते सुन्दर , सार्थक हाइकु !
    हार्दिक बधाई !!


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