Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 15, 2017

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माँ

1-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

ईश्वर कहे-

मुझसे ज़्यादा दर्द

सिर्फ़ माँ सहे।

2

माँ को सताना

इसी जन्म में तय

नरक पाना।

3

बेटी का मान

सबसे बड़ी पूजा

जीवन-स्वर्ग।

4

वासना- कोढ़

छल की ओट में तू

इसे न ओढ़।

-0-

2- पुष्पा मेहरा

1

घर-आँगन

माँ देती है रोशनी

मोमबत्ती -सी  ।

2

काँपे थे पग

माँ ने उँगली थामी

जागा विश्वास ।

3

संस्कार-बीज

माँ ने मुझमें पोसे

गहरे जमे ।

4.

आशीष-छड़ी

माँ के हाथों ने फेरी

जादू हो गया !!

5

माँ जो मुस्काई

अँधेरे को मिली है

तारों की छाँव।|

-0-

Pushpa.mehra@gmail.com

-0-

3-डॉ.सरस्वती माथुर

1

मन में बसी

हम रोए,माँ रोई

हँसें ,तो हँसी ।

2

वात्सल्य- भरी

उँगलियाँ फिराती

माँ लोरी गाती।

3

जगाती है माँ

बचपन की भोर

 प्रीत -अगोर ।

4

माँ का क्या मोल

बनी नहीं तराज़ू

वो अनमोल

5

बड़ी गहरी

सागर की लहरों में

माँ है प्रहरी ।

6

माँ है विश्वास

कितनी रहे दूर

लगती पास ।

7

माँ है रोशनी

बच्चों के जीवन का

अंधेरा पीती।

8

माँ तो पूजा है

उन जैसा  जग में

कौन दूजा है?

9

माँ को नमन

बुनकर -सी बुने

हमारा मन ।

-0-

पुराने दिन

1- प्रियंका गुप्ता

1

पुराने दिन

शाख से गिरे पत्ते

जुड़ न पाएँ ।

2

टूटी उम्मीदें

जुड़ने के आसार

फिर न दिखें ।

3

उम्मीद की लौ

डगमगाई ज़रूर

बुझ न पाई ।

4

देकर हँसी

मेरे सूने लबों को

खुद रो दिया ।

5

सूना था मन

दस्तक दी तुमने

भर ही गया ।

6

छालों -सा फूटा

पुराना दर्द कोई

बह निकला ।

7

बादल गए

गर्मी की छुट्टियों में

नानी के घर ।

8

पेड़ों के नीचे

सोई पड़ी थी छाँव

कहीं न जाए ।

9

बादल लौटे

चुपके से बरसे

छुट्टियाँ ख़त्म ।

10

ऊँघती उठी

चाँद तारों को संग

ले गई रात ।

11

तन्हा -सा घर

गर्मी की दोपहरी

खामोश पड़ा ।

-0-

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Responses

  1. बहुत सुंदर भावपूर्ण हाइकु मन को छू गए। सभी रचनाकारों को मेरी हार्दिक बधाई।

  2. Maa par haiku, purane din bahut khub likhe sabhi meri hardik badhai….

  3. बेहतरीन हाइकु का सृजन हुआ , आप सभी को बधाई | माँ , गर्मी की छुट्टियाँ और नानी का घर याद करा गयी |

  4. सभी हाइकु सुंदर प्रस्तुति के साथ में सागर हैं ।
    सभी को दिल से बधाई ।

  5. विभिन्न मनोभावों की उम्दाभिव्यक्ति …आ.रामेश्वर सर,पुष्पा जी,डॉ.सरस्वती जी,प्रियंका जी…

  6. ईश्वर कहे-
    मुझसे ज़्यादा दर्द
    सिर्फ़ माँ सहे।
    अद्भुत हाइकु के लिए बधाई भैया । डॉ सरस्वती माथुर, पुष्पा जी और प्रियंका जी को सुंदर सृजन के लिए बधाई !

  7. बहुत ही उम्दा,सुन्दर और भावपूर्ण हाइकु के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय रामेश्वर भैया , पुष्पा मेहरा जी , डॉ. सरस्वती माथुर जी एवं प्रियंका गुप्ता जी ।

  8. सभी रचनाकारों के हाइकु भावपरक लगे। मेरे हाइकुओं को समूह में स्थान देने के लिये संपादक द्वय का आभार।

  9. ईश्वर कहे-
    मुझसे ज़्यादा दर्द
    सिर्फ़ माँ सहे।
    आ.हिमांशु भाई , पुष्पा दी , सरस्वती जी एवं प्रियंका जी को मनभावन , सार्थक हाइकु रचना के लिये दिल से हार्दिक से बधाई ।
    सनेह विभा रश्मि

  10. माँ पर रचे गये सभी हाइकु उत्कृष्ट रचना हैं ।आप सभी को हार्दिक बधाई ।प्रियंका गुप्ता जी पुराने दिनों पर नाना भावों भरे हाइकु भी बहुत सुन्दर लगे ।आप को भी बधाई ।
    कमला घटाऔरा ।

  11. आदरणीय रामेश्वर भैया जी, पुष्पा मेहरा जी , डॉ. सरस्वती माथुर जी एवं प्रियंका गुप्ता जी ..अति सुंदर मनभावन हाइकु..आप सबको हार्दिक बधाई ।

  12. काँपे थे पग
    माँ ने उँगली थामी
    जागा विश्वास ।
    आदरणीया पुष्पा जी बहुत सुंदर हाइकु सभी।

  13. काँपे थे पग
    माँ ने उँगली थामी
    जागा विश्वास ।
    आदरणीया पुष्पा जी बहुत सुंदर हाइकु सभी।

    ईश्वर कहे-
    मुझसे ज़्यादा दर्द
    सिर्फ़ माँ सहे।

    बहुत विराट कहन है इस हाइकु का, स्वयं ईश्वर कहता है कि मुझसे ज्यादा दर्द सिर्फ माँ सहती है, ईश्वर से यह स्वीकारोक्ति माँ को ईश्वर से उच्च स्थान प्रदान करती है।

  14. ईश्वर कहे-
    मुझसे ज़्यादा दर्द
    सिर्फ़ माँ सहे।
    कितनी सच्ची और मार्मिक बात…| माँ का स्थान तो स्वयं ईश्वर से बड़ा है…|

    माँ जो मुस्काई
    अँधेरे को मिली है
    तारों की छाँव।|
    हम चाहे कितने भी बड़े हो जाएँ, जब कभी कोई कष्ट पड़ता है तो चैन माँ के पास ही मिलता है…|

    माँ का क्या मोल
    बनी नहीं तराज़ू
    वो अनमोल |
    बिलकुल सही बात है…|
    आप सभी को हार्दिक बधाई और मेरे हाइकु सराहने के लिए दिल से आभार…|

  15. सुंदर गहरे भावों से भरे हाइकु हेतु मा.काम्बोज भाई जी, माथुर जी वा प्रियंका जी को बधाई |

  16. आदरणीय भैया जी, पुष्पा मेहरा जी , डॉ. सरस्वती माथुर जी एवं प्रियंका गुप्ता जी ..अति सुंदर हाइकु..आप सबको हार्दिक बधाई ।

  17. माँ पर लिखे सारे हाइकु मन पर अंकित हो रहे हैं
    बहुत बहुत खूबसूरत पावन लेखनी को सादर नमन

  18. माँ की महिमा को कहते अनुपम हाइकु !
    ‘ईश्वर कहे’ , ‘तारों की छाँव’ , अनमोल माँ ,’उम्मीदों की लौ’ बहुत ही अच्छे लगे |
    आदरणीय भैया जी, पुष्पा दीदी , डॉ. सरस्वती माथुर जी एवं प्रियंका गुप्ता जी को हार्दिक बधाई ।


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