Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 5, 2017

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1-ज्योत्स्ना प्रदीप

2-कृष्णा वर्मा

1

झूठा छलावा

मज़दूर दिवस

निरा दिखावा।

2

स्वेद बहाऊँ

हक हलाल की मैं

रोटी कमाऊँ।

3

राम अनोखा

केवल श्रम लिखा

भाग्य की रेखा।

4

किले बनाता

सोता खुद झुग्गी में

हँसता-गाता।

5

करे निहाल

बनाके कोठी ख़ुद

है खस्ता हाल।

6

करो जतन

श्रमिकों के बच्चे भी

देखें सपन।

-0-

3-पुष्पा मेहरा  

1

जीवन जंग

बिजली-चक्रवात

रहते संग ।

2

शब्दों की चोट

पाषाण मन को भी

चटका  देती  ।

3

शब्द तोड़ते

सारे आत्मीय बंद

शब्द जोड़ते ।

4

आए बादल

एक बूँद जल भी

नहीं दे सके ।

5

प्यासा पखेरू

नल से एक बूँद

माँगता रहा ।

6

यादों में आई

ठण्डी-ठण्डी फुहार

भीगी  मैं सारी ।

7

जीवन नद

सुख-दु:ख किनारे

साथ चलते ।

8.

मन परिंदा

जितना पंख काटो

उतना उड़े ।

9

शब्द थे मौन

नैन चित्रकार ने

भाव उकेरे ।

10

छिपा न सका

सच को कभी मौन

सूर्य को घन ।

11

यादें हमारी

विस्मृत घटाओं में

विद्युत-कौंध ।

12

लू-धूप-तपी

मन के कोठे में आ

यादें जुड़ातीं ।

13

जीवन मूल्य

मन पेटी में बंद

धन अमूल्य ।

14

श्रमिक श्वासें

जीवन रथ खींचें

थकें तो रुकें ।

15

समय-चक्र

काट रहा है पन्ने

ज़िन्दगानी के ।

16

खिली जो कली

उड़-उड़ सुगंध

हवा में बसी ।

17

नियति-हाथ

कठपुतली बने

नाचते हम ।

18

जलता हुआ

गरीब का टट्टर

तमाशा बना ।

19

अकथ कथा

कौन,कब औ कहाँ

किससे मिला !

20

मेले में आए

रहट है अदृश्य

घूमते सब ।

21

वक्त की आँधी

पेड़ों से उड़ा चली

सूखे पत्रक ।

22

बजुर्ग पेड़

नव शिशु खातिर

बाहें फैलाए ।

23

जीवन वन

सूनी पगडंडी पे

यादों का शोर ।

-0-

Pushpa.mehra@gmail.com

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Responses

  1. आ.ज्योत्सना जी
    आ.कृष्णा वर्मा जी
    आ.पुष्पा मेहरा जी
    मन के भावों को उद्वेलित करती आप सभी की रचनाएं ,चिंतन-मनन एक खास व्यक्तित्व की पहचान करवाती हैं….शुभकामनाएं

  2. झूठा छलावा
    मज़दूर दिवस
    निरा दिखावा।
    कटु सत्य कृष्णा जी।

    ज्योत्स्ना जी सुंदर हाइगा।

    पुष्पा जी बेजोड़ हाइकु सभी।

    जीवन वन
    सूनी पगडंडी पे
    यादों का शोर ।

  3. बहुत सुंदर हाइगा बहुत बढ़िया हाइकु।
    ज्योत्स्ना प्रदीप जी तथा पुष्पा मेहरा जी को बधाई।

  4. ज्योत्सना जी का हाइगा अतिसुंदर पुष्पा जी व कृष्ण वर्मा जी के हाइकु मनभावन हैं ।आप सब को बधाई ।

    सनेह विभा रश्मि

  5. सुन्दर , मन प्रफुल्लित करता हाइगा !
    सभी हाइकु भी बहुत बढ़िया लगे ..
    ‘झूठा छलावा ‘…और ..’शब्दों की चोट ‘ बहुत प्रभावी !
    सखी ज्योत्स्ना जी ,आ. कृष्णा दीदी एवं पुष्पा दीदी को हार्दिक बधाई !!

  6. ‘किले बनाता \सोता ख़ुद झुग्गी में\हँसता गाता’ -मज़दूरों की स्थिति को अभिव्यक्त करता सुंदर हाइकु ,अनिता जी का ‘सुगंध धारा ….काँटों की कारा’ हाइगा में कारा तोड़ कर ख़ुशबू और हँसी बिखर रही है कृष्णा जी व अनिता जी बधाई |

  7. आप सभी रचनाकारों को सुन्दर भावपूर्ण सृजन के लिए हार्दिक बधाई |

  8. मेरी हाइगा को स्थान देने के लिए सादर धन्यवाद सम्पादक द्वय!!

  9. आ.कृष्णा वर्मा जी,आ.पुष्पा मेहरा जी आप की रचनाएं , अतिसुंदर !!…
    .शुभकामनाएं!!


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