Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 4, 2017

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सुशील शर्मा

1

प्यास का व्यास

थरथराता आँसू

ताल -सा लगा।

2

प्यासी तलैया

मरती मछलियां

कौन बचैया?

3

लू के थपेड़े

प्यासी फिरे गोरैया

प्यास घनेरी।

4

अमृत जल

सूखे नजर आएँ

कुओं के तल।

5

कचरा दान

बन चुके तालाब

कुँए गायब।

6

सब खाली हैं

कुँए, नदी, तालाब

उड़ता पानी।

7

डोले रे हिया

कहाँ गए तालाब

रे मोरे पिया।

8

कुएँ- तलैया

सूखते नदी- ताल

कहाँ गोरैया ?

9

पपीहा प्यासा

सूना है पनघट

खाली गागरें।

10

प्रथम वर्षा

सौंधी -सौंधी महक

भरे तालाब।

11

ताल हैं शुष्क

टूटती नदी धारा

सूखते अश्क।

-0-

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Responses

  1. गर्मी की भीषणता का बेहद सजीव और खूबसूरत चित्रण किया गया है इन हाइकु में…बहुत बधाई…|

  2. बहुत सुंदर हाइकु

  3. सामयिक चिंतन से सजा सृजन..शुभकामनाएं}

  4. प्यास का व्यास
    थरथराता आँसू
    ताल -सा लगा।

    प्यास केंद्रित सुशील जी के सभी हाइकु उम्दा हैं। प्यास का व्यास बहुत अनूठा प्रयोग है। बधाई।

  5. बहुत सुंदर हाइकु!!!

    प्यास का व्यास
    थरथराता आँसू
    ताल -सा लगा।

    गहन भाव …बहुत बधाईसुशील शर्माजी …|

  6. प्यास पर बहुत सुन्दर हाइकु , बधाई सुशील जी ।

  7. बहुत सुन्दर , सामयिक हाइकु…हार्दिक बधाई


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