Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 3, 2017

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अनुपमा  त्रिपाठी

1

साँझ एकाकी 

कलरव गुनती 

लिखती पाती ।

2

खिलते अब  

सभी रंग मन के 

बसंत आया ।

3

फुलवा  चुन 

रे मन अब सींच 

प्रीत- बेलरी ।

4

 गूँध लाओ री 

सुघड़ मालनिया

फूलन हार ।

5

बसंत गाओ 

राग रंग बगरे 

पर्व मनाओ !

6

नेहा लगाए 

बैरी साँझ न बीते 

आस न जाए। 

-0-

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Responses

  1. सादर आभार भैया !!

  2. बहुत सुंदर हाइकु अनुपमा जी बधाई।

  3. सुंदर वासंती हाइकु
    बहुत बधाई अनुपमा जी !

  4. सभी हाइकु बहुत सुंदर

  5. बेहतरीन हाइकु के लिए बहुत बधाई…|

  6. सुघड़ मालनियाँ, प्रीत बेलरी का तो जवाब ही नहीं, अनुपमा जी अनुपम हाइकु हुए हैं। बधाई।


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