Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 28, 2017

1745


कमला घटाऔरा
1
जीवन देती
नारी जननी नहीं
है संजीवनी ।
2
तुलना कैसी
सहनशीला न्यारी
धरा लजाए ।
3
गुणों की खान
बंदिशों -तले दबी
सदा से नारी ।
4
नेह- गागर
बाँटते न अघाई
कद्र न पाई ।
5
मृत -सा तन
मिला स्पर्श प्यार का
जीवन खिला ।
-0-

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Responses

  1. अच्छे हाइकु के लिए बहुत बधाई…|

  2. बहुत सुन्दर हाइकु !
    हार्दिक बधाई !!!

  3. सुंदर!!

  4. सुंदर हाइकु ,कमला जी बधाई |
    पुष्पा मेहरा

  5. Worth memorising these lines are full depth and truth. The description of woman is like a piece of art . Great work. Shiam Tripathi

  6. बहुत सुन्दर हाइकु !
    हार्दिक बधाई कमला जी | !!!

  7. सभी हाइकु बहुत सुंदर कमला जी

  8. Kamla ji bahut achhe haiku likhe hain meri hardik badhai…


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