Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 8, 2017

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1-भावना कुँअर

1

मिटे सन्ताप

लिखा हथेली पर

ज्यों तेरा नाम !

-0-

2भावना सक्सैना

1
सदा वारती
फिर भी हारती
जननी वह।
2
देह प्राण से
करती समर्पण
सारा जीवन।
3
लड़े ज से
अबला है सबल
काँच –सा  मन।
4
स्वयं से युद्ध
जीत अब निश्चित
मौन संकल्प।
5

भावों के रिश्ते

रहते उम्र भर

टूटें स्वार्थ के।   

6

गहन पीर

संवेदना -औषधि

हरती शूल।

7

करुणा -नीर

पड़े जो दर्द पर

विहँसें फूल।

8

पा स्नेह -सार

उपजे वेदना से

गीत करुण।

9

छाया- से सच्चे

मित्र संग चलते

हरते पीर।

-0-

3-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

घना अँधेरा

सिर्फ़ एक रौशनी

नाम तुम्हारा।

2

थामी हथेली

हल हुई पल में

हर पहेली।

3

वापस आओ

ये घर ये आँगना

बाट निहारें।

4

खुशबू फैली

नहाया हर कोना

तुम आ गए।

5

लौटे हैं पंछी

नीड़ हुए मुखर

चले भी आओ!

6

भोर में खिले

सभी फूल कहते-

गले  लगा लो!

-0-

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Responses

  1. वाह! अतिसुन्दर एवं मनमोहक हाइकु !
    डॉ. भावना कुँवर जी, भावना सक्सेना जी एवं भैया जी…आप तीनों को हार्दिक बधाई!

    ~सादर
    अनिता ललित

  2. Bahut khub.Bhavna kunwar ji…

    Behtreen Likha ..Bhavna ji

    Lajwaab .Likha .Sir…..

    Congrates to all…..

  3. बहुत सुंदर हाइकु गुलदस्ता महिला दिवस पर ,काम्बोज भैया – आपने कितनी गहरी बात लिखी है “घना अंधेरा /सिर्फ़ एक रोशनी /नाम तुम्हारा-“–इसकी गहराई को शब्दों में नहीं बाँधा जा सकता है ।— भैया ,सब जानते हैं कि आप यहाँ बहुत कम पोस्ट डालते हैं पर ग़ज़ब की प्रेरणा भर कर जो हमारा मार्गदर्शन करते हैं उनके लिये भी शब्द नहीं –हम आज महिला दिवस पर आपके स्नेह को नमन करते हैं और हरदीप जी के प्रति भी अपना आभार प्रकट करते हैं ।भावना कुँअर जी व भावना सक्सेना जी आपके हाइकुओं ने भी हमारी भावनाओं को गहरे में छू लिया ! आपका नाम सार्थक करते हुअे ।
    सभी को महिला दिवस की शुभकामनाएँ –इन हाइकुओं के माध्यम से—
    1.मैं हूँ नारी
    महकती हूँ जैसे
    केसर क्यारी ।
    २.पाखी सा मन
    नील गगन उड़े
    मुक्त- मगन ।
    ३.कोमल तो है
    कमज़ोर नहीं वो
    छू लेंगी नभ ।
    डाॅ .सरस्वती माथुर

  4. लौटे हैं पंछी
    नीड़ हुए मुखर
    चले भी आओ!

    पंछियों के लौटने पर नीड़ का मुखर होना। आहा क्या चित्र उकेरा है। नीड़ की मुखरता देख किसका मन न बुलाएगा अपने प्रियजनों को। बहुत अच्छे लगे सारे हाइकु।
    आदरणीया भावना जी का इकलौता हाइकु भी बहुत उम्दा।
    आदरणीया भावना सक्सेना जी के हाइकु भी बहुत अच्छे लगे।

  5. लौटे हैं पंछी
    नीड़ हुए मुखर
    चले भी आओ!

    पंछियों के लौटने पर नीड़ का मुखर होना। आहा क्या चित्र उकेरा है। नीड़ की मुखरता देख किसका मन न बुलाएगा अपने प्रियजनों को। बहुत अच्छे लगे सारे हाइकु।
    आदरणीया भावना जी का इकलौता हाइकु भी बहुत उम्दा।
    आदरणीया भावना सक्सेना जी के हाइकु भी बहुत अच्छे लगे।

    छाया- से सच्चे
    मित्र संग चलते
    हरते पीर।

    बहुत सच्ची बात।

  6. कुछ रिश्ते होते ही इतने प्यारे हैं कि उनके नाम से हर संताप मिट जााता है, इन्हीं भावों को समेटे डॉ.भावना कुंवर जी और भैया के प्यारे से हाइकु।
    बहुत सुंदर… बधाई।

  7. मुझे यहां स्थान देने के लिए और मित्रों की अनमोल प्रतिक्रियाओं के लिए बहुत आभार।

  8. महिला दिवस पर बहुत सुंदर हाइकु प्रस्तुत करने हेतु काम्बोज भाई जी , भावना कुँवर व भावना सक्सेना जी को बधाई |
    पुष्पा मेहरा

  9. सुंदर भावनाओं से सजे बहुत सरस ,मधुर हाइकु !
    तीनों हाइकुकारों को हार्दिक बधाई … सभी को शुभकामनाएँ
    💐🙏💐🙏💐🙏💐

  10. Bahiya aap ke man me nari ke liye Jo samman hai usko naman
    Badhai sunder haiku likhen hain
    Bhavna and Bhavna Ji gahre bhav
    Badhai aap sabhi ko
    Rachana

  11. सभी गहराई लिए हुए हाइकू
    बधाई

  12. सुन्दर सरस मनोहारी हाइकु। आप सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई।

  13. भावना कुंवर जी, भावना सक्सेना जी एवं काम्बोज भैया जी, आज बहुत भावपूर्ण हाइकु पढ़ने को मिले | आप सब को बधाई एवं धन्यवाद |

    शशि पाधा

  14. थामी हथेली
    हल हुई पल में
    हर पहेली।

    भोर में खिले
    सभी फूल कहते-
    गले लगा लो!

    लड़े जग से
    अबला है सबल
    काँच –सा मन।

    उत्कृष्ट हाइकु … बधाई

  15. भैया जी, डॉ. भावना कुँवर जी एवं भावना सक्सेना … सुंदर हाइकु….
    आप तीनों को हार्दिक बधाई!

  16. बहुत मनभावन- मनोहारी हाइकु हैं सभी…| मेरी हार्दिक बधाई स्वीकारें…|


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