Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 6, 2017

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1-डॉ०पूर्णिमा  राय

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 सर्द हवाएँ 

बहकता मौसम 

रंगीन मन।। 

2

जाड़े की धूप 

एहसास गर्मी का 

धड़के दिल।।

3

ये शोरगुल

सिसकती दीवारें

 काँपे हृदय!! 

4

रात्रि पहर 

शान्त वातावरण 

साँसें ठहरीं!! 

5

हिम कणों से 

टपक रहे अश्रु 

 बिना बात के!! 

6

कदम रुके 

सहेज रही रिश्ते 

बिखरी आस!! 

 7

 आँसू या मोती 

सोनजूही के फूल 

लगते प्यारे!! 

8

मन का पंछी 

अकेला भाग रहा

मिले अपने। 

9

मन बेबस 

चाहता है उड़ना 

पंख विहीन।। 

10

मन निर्मल 

जैसे गंगा-यमुना  

धुलते पाप ।। 

11

 मन भँवरा 

इत उत डोलता 

चाहे कलियाँ। 

12

 मन बावरा 

 मिलन अभिलाषा 

 अटकी साँसें।। 

 13

मन क्रोधित 

स्वार्थ रंग में रँगा 

करे अहित।। 

-0-

ग्रीन ऐवनियू,घुमान रोड,

 तहसील बाबा बकाला

 मेहता चौंक-143114 अमृतसर,पंजाब।।

-0-

2- डॉ मधु त्रिवेदी

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अनेकानेक
रंग होली पर्व के
लाल गुलाबी

2

खिलते रंग
प्यार के, यौवन के
हर अंग में

3

हिय हुलसे
हूँ ओर बहता
प्रीत का रंग

4

नई उमंग
तरंग डूबा

गाता है मन

-0-

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Responses

  1. डाॅ पूर्णिमा जी प्रकृति के बहुत सुंदर हाइकु के लिए बधाई लें ।
    डाॅ मधु जी प्यारे हाइकु के लिये बधाई लें ।
    सनेह विभा रश्मि

  2. बहुत बेहतरीन हाइकु…मेरी हार्दिक बधाई पूर्णिमा और मधु जी को…|

  3. बहुत बढ़िया हाइकु… पूर्णिमा जी, मधु जी बहुत बधाई।

  4. सभी है हाइकु बहुत सुन्दर .हार्दिक आप दोनो को

  5. सभी हाइकु सुंदर हैं ,पूर्णिमा जी व मधु जी बधाई |
    पुष्पा मेहरा

  6. डॉ पूर्णिमा जी जाड़े की ऋतु का सुन्दर वर्णन किया है और मधु जी आपने होली के मौसम में मन में उठती रंगीन उमंगों से मन भरमाया है आप दोनों को बधाई हो |

  7. मधु जी व पूर्णिमा जी के दोहे बहुत अच्छे लगे सुन्दर कोमल अभिव्यक्ति दोनों
    रचनाकारों को हार्दिक बधाई – शशि पुरवार

    2017-03-06 16:35 GMT+05:30 हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब
    पत्रिका’-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है ! :

    > डॉ. हरदीप संधु posted: “1-डॉ०पूर्णिमा राय 1 सर्द हवाएँ बहकता मौसम
    > रंगीन मन।। 2 जाड़े की धूप एहसास गर्मी का धड़के दिल।। 3 ये शोरगुल सिसकती
    > दीवारें काँपे हृदय!! 4 रात्रि -पहर शान्त वातावरण साँसें ठहरीं!! 5 हिम
    > कणों -से टपक रहे अश्रु बिना बात के!! ”
    >

  8. हिम कणों –से
    टपक रहे अश्रु
    बिना बात के!!

    हिम कणों से अश्रु सुंदर कल्पना पूर्णिमा जी।

    मधु जी सुंदर हाइकु


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