Posted by: हरदीप कौर संधु | मार्च 4, 2017

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1-सुरेन्द्र वर्मा  

1

रंग बरसे 

ज्यों पलाश दहके 

दिन फागुन 

2

गीतों में बसा 

बस प्यार ही प्यार 

मीठी बयार 

3

तन-मन से 

आरोह अवरोह 

श्वास फागुनी 

4

प्रसन्न मन

तोड़े रति-बंधन सब 

कान्हा की वंशी 

5

फूलों के द्वारे 

मँडराते भँवरे 

कली शर्माई 

6

होली में झूमें 

महुआ कचनार

बौरी बयार

7

 

धरे न धीर 

कूक कोयलिया की 

जगाती पीर 

8

रंगोगे रंग 

केसरिया सुगंध 

कहाँ हो कन्त 

9

महका बौर 

चू  पड़ा है महुआ  

रंग गुलाल   

-0-

2- प्रियंका गुप्ता

1

व्यापार बना  

शब्दों में रचा प्यार

बेमोल बिका ।

2

शब्दों के तीर

जितनी बार चले

घायल किए ।

3

प्रेम का खाता

खोला था जाने कब

ब्याज न मिला ।

-0-

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Responses

  1. आदरणीय सुरेन्द्र जी की हाइकु बहुत बेहतरीन हैं…| मेरी बधाई…|

  2. सुरेन्द्र जी ,प्रियंका जी आप दोनों को हार्दिक बधाई
    सभी हाइकु मनभावन

  3. रंग बरसे से महका बौर तक मोहक रंगों से सजे सुन्दर हाइकु ..डॉ. वर्मा जी को हार्दिक बधाई !
    तीनों हाइकु लाजवाब प्रियंका जी …बहुत बधाई !!

  4. आ.सुरेन्द्र जी के फागुनी हाइकु व प्रियंका जी के तीनों हाइकु बहुत सुंदर । दोनों को बहुत-बहुत बधाई ।
    सनेह विभा रश्मि

  5. माननीय वर्मा जी व प्रियंका जी को सुंदर हाइकु हेतु बधाई
    पुष्पा मेहरा


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