Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 1, 2017

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1-डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा

1

यूँ तो वीरानी

फैली है चारों ओर

भीतर शोर !

2

आँख में नमी

कहो क्या खलती है ?

हमारी कमी !

3

नन्हें क़दम

चलके आओ धूप

मेरे आँगन !

4

बोझ का मारा

फट पड़ता दिल

जैसे बादल !

5

धूप ,छाँव में

ख़ुशबू ,फूल कभी-

शूल पाँव में !

6

वादे आबाद

बेचैन करती है

आवारा याद !

7

पान-गिलौरी

खूब रंग लाती है

याद निगोड़ी !

8

किसकी याद ?

भोर के मुख पर

सुख-संवाद !

9

एक चाहत

सुना गई दुख को

सुख की बात !

10

तुम्हारे लिए

दुआ माँगता दिल

होंठ हैं सिए !

11

क्यों तड़पाना ?

नज़दीक आकर

यूँ दूर जाना !

12

मिलो हमसे

मिलती हैं ख़ुशियाँ

गम से जैसे !

13

भीगा तकिया

सीला हुआ रूमाल

कहते हाल !

14

सीली लकड़ी

सुलगती हो जैसे

ज़िन्दा हूँ ऐसे !

15

ओ मेरे मीत

नींद गाए रातों में

तेरे ही गीत !

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Responses

  1. भावनाओं से लबरेज़ सभी हाइकु बहुत उम्दा !

    सीली लकड़ी
    सुलगती हो जैसे
    ज़िन्दा हूँ ऐसे !
    वाह!!

  2. भावों को बहाव में डूबते उतरते सुंदर हाइकु। बधाई ज्योत्नसा जी।

  3. सभी दिल को छूती हुई रचनाएं हैं। साधुवादः बधाई । सुरेंद्र वर्मा।

  4. सभी हाइकु गहराई लिए हुए .
    बधाई

  5. सभी हाइकु बहुत उम्दा हैं डॉ ज्योत्सना जी को हार्दिक बधाई |

  6. Baat jo Dil ko chu gyi..

    Bhut Khoob….Jyotsna ji

  7. संपादक द्वय तथा प्रेरक प्रतिक्रिया के साथ उपस्थित आप सभी सुधीजनों का हृदय से आभार | सदैव स्नेह रखियेगा |

    सादर

  8. बहुत भावपूर्ण हाइकु ज्योत्स्ना जी बहुत बधाई।

  9. Vaah, badhayi aadarniya jyotsna ji

  10. भीगा तकिया
    सीला हुआ रूमाल
    कहते हाल !

    सभी हाइकु बहुत सुंदर ..हार्दिक बधाई सखी

  11. वाह! क्या बात है सखी ! बहुत ही प्यारे हाइकु !
    आँख में नमी
    कहो क्या खलती है ?
    हमारी कमी ! — बहुत ही प्यारा सवाल … 🙂

    सस्नेह
    अनिता ललित

  12. सभी हाइकु बहुत ह्रदयस्पर्शी, पर ये ख़ास तौर से बेचैन कर गया…

    सीली लकड़ी
    सुलगती हो जैसे
    ज़िन्दा हूँ ऐसे !
    बहुत बधाई…|

  13. Bahut khub likha, meri hardik dhubhkamnayen…

  14. स्नेहसिक्त उपस्थिति के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद !

  15. वाह वाह अनुपम दोहे ज्योत्सना जी एक एक दोहा गहरा भाव लिए हुए सटीक व सार्थक
    बन पढ़ा है , बहुत समय बाद उम्दा दोहों का आनंद लिया, हार्दिक बधाई सखी

    2017-03-01 14:39 GMT+05:30 हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब
    पत्रिका’-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है ! :

    > रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ posted: “1-डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा 1 यूँ तो वीरानी
    > फैली है चारों ओर भीतर शोर ! 2 आँख में नमी कहो क्या खलती है ? हमारी कमी ! 3
    > नन्हें क़दम चलके आओ धूप मेरे आँगन ! 4 बोझ का मारा फट पड़ता दिल जैसे बादल !
    > 5 धूप ,छाँव में ख़ुशबू ,फूल कभी- शूल पाँव में ”
    >


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