Posted by: डॉ. हरदीप संधु | फ़रवरी 21, 2017

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1-डा.सुरेन्द्र वर्मा

1

नूतन  हेतु

टहनी से उतरे

बुज़ुर्ग पात ।

2

कोई न रोया

आँसुओं- से टपके

निराश पत्ते ।

3

पवन संग

झर-झर नाचते

गिरते पत्ते।

4

झर रहे हैं

पत्र पतझर में पात

टिक सकोगे?

5

जीर्ण पत्र था

हलके से झोंके में

टूटा बेबस ।

6

गिरते पत्र

निरुपाय -सा तरु

खड़ा  देखता ।

7

उम्रदराज़

एक -एक पाती को

झरते देखा ।

-0-(मो.९६२१२२२७७८),१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड

इलाहाबाद -२११००१

-0-

2-अनिता मण्डा

1
हरे को पीला
करे बौराया फाग
मस्ती का राग।
2
उलझे हवा
आम्र मंजरियों से
भाँग का नशा ।
3
सिकुड़ी रातें
उठे सर्दी के ठाठ
यूँ आया फाग।
4
आहट पाई
फूलों ने फागुन की
बिखेरे रंग।
5
रंग उतरे
पहली बारिश में
केवल कच्चे।
6
छाई ख़ुमारी
चटकी हैं कलियाँ
लो आया फाग।
7
मद का प्याला
भरा फिर रीतता
नभ में चाँद।
8
ठहरें नहीं
लहरें बंजारन
एक ही ठाँव।
9
निर्वासित हो
नगर से वसंत
बसा जंगल ।

-0-

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Responses

  1. डाॅ. सुरेन्द्र जी व अनिता माँड़ा जी के सुंदर हाइकु पढ़े – वाह
    एक “उम्रदराज़ एक एक पाती को /झरते देखा “— डाॅ सुरेन्द्र
    “ठहरें नहीं /लहरें बंजारन/एक ही ठांव ” –डाॅ.अनिता मंडा –अति सुंदर
    दोनों रचनाकारों को बधाई

  2. आ.सुरेन्द्र भाई के पतझर पर कशीशवाले हाइकु । बहुत बधाई ।
    उम्रदराज़
    एक -एक पाती को
    झरते देखा ।
    प्रिय अनिता मंडा जी प्रकृति के मनभावन हाइकु । बहुत बधाई लें ।
    सनेह विभा रश्मि

  3. कशिशवाले हाइकु बहुत सुन्दर बधाई भाई सुरेन्द्र जी व अनिता मंडा जी ।

  4. सुंदर हाइकु -दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई— नूतन हेतु /टहनी से उतरे /बुज़ुर्ग पात —डाॅ.वर्मा जी -बहुत ख़ूब
    ठहरें नहीं /लहरें बंजारन/एक ही ठाँव — डाॅ मंडा जी -बहुत मनोरम हाइकु

  5. सुंदर हाइकु दोनों रचनाकरों को हार्दिक बधाई— नीति हेतु /टहनी से उतरे /बुज़ुर्ग पाँत डाॅ.वर्मा जी -बहुत ख़ूब
    ठहरें नहीं /लहरें बंजारन/एक ही ठांन– डाॅ मुंडा जी -बहुत मनोरम हाइकु

  6. सुंदर हाइकु दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई— नूतन हेतु /टहनी से उतरे /बुज़ुर्ग पात डाॅ.वर्मा जी -बहुत ख़ूब
    ठहरें नहीं /लहरें बंजारन/एक ही ठांव -डाॅ.अनिता मंडा जी

  7. डा. सुरेंद्र जी वह अनीता जी के सभी हाइकु बहुत अच्छे है मुझे खास यह पसंद
    आया उम्रदराज़एक -एक पाती कोझरते देखा ।बहुत सुन्दर वाह बेहद खूबसूरत बिम्ब
    उकेरा है हार्दिक बधाई
    *ठहरें नहीं*
    *लहरें बंजारन*
    *एक ही ठाँव। वाह। अति सुन्दर *
    *आप दोनों को हार्दिक बधाई *
    *शशि पुरवार *

  8. नूतन हेतु \टहनी से उतरे\बुज़ुर्ग पात | बहुत सुंदर,निर्वासित हो \नगर से बसंत \बसा जंगल |
    सुंदर हाइकु हेतु मा.वर्मा जी व अनिता जी को बधाई |
    पुष्पा मेहरा

  9. पतझर और वसंत खूब सजे हैं हिंदी हाइकु पर ..
    ‘निरुपाय से तरु’ और ‘मद का प्याला’ मन में उतर गए …
    आदरणीय डॉ. सुरेन्द्र वर्मा जी एवं अनिता जी को हार्दिक बधाई !!

  10. गिरते पत्र / उम्रदराज / मद का प्याला/ ठहरे नहीं…बहुत मनमोहक हाइकु।
    आ० सुरेन्द्र वर्मा जी तथा अनिता मण्डा जी हार्दिक बधाई।

  11. गिरते पत्र
    निरुपाय -सा तरु
    खड़ा देखता ।

    सुरेन्द्र वर्मा जी सभी हाइकु बहुत सुंदर मनभावन हार्दिक बधाई आपको ।

    मद का प्याला
    भरा फिर रीतता
    नभ में चाँद।

    अनिता जी सभी हाइकु सार्थक हार्दिक बधाई आपको

  12. दोनों हाइकुकारों को सुन्दर हाइकुओं के लिए बधाई 👍

  13. बहुत सुंदर।
    4th हाइकु में पत्र और पात दोनों शब्दों के कारण वर्णों का आधिक्य हो गया है। शायद editing के समय अशुद्धि रह गई। छोटे मुँह बड़ी बात हेतु क्षमा प्रार्थी हूं।

  14. सुरेन्द्र जी आप के पतझड़ पर सभी हाइकु अपनी सुन्दरता में बेमिसाल हैं ।…. कोई न रोया /आँसुओं -से टपके/ निराश पत्ते । पत्तों के झरने का समूचा दर्द एक ही हाइकु ने अपने में समो दिया है । हार्दिक बधाई ।
    अनिता मण्डा जी आप के हाइकु भी कमाल के हैं । कितना सुन्दर चित्र आँका है – उलझे हवा / आम्र मंजरियों से /भांग का नशा । बहुत बहुत हीर्दिक बधाई ।

  15. Sabhi haiku bhavpurn meri sabhi ko badhai…

  16. सुरेन्द्र वर्मा जी ने हाइकु के माध्यम से पतझड़ को सजीव कर दिया, बहुत अच्छे हाइकु

    नूतन हेतु
    टहनी से उतरे
    बुज़ुर्ग पात ।

    मेरे हाइकु यहाँ देने व सराहने हेतु आभार।

  17. Dr surender ji…dil ko chu gye Haiku..Marmik….

  18. Umda haiku..Anita ji…Manbhavan

  19. बहुत सुन्दर हाइकु हैं सभी…हार्दिक बधाई…|


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