Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जनवरी 24, 2017

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1-कृष्णा वर्मा

1

स्मृति तुम्हारी

सींचे बचपन की

माँ फुलवारी।

2

कैसी जुदाई

रोए पल-छिन माँ

सख़्त सच्चाई।

3

दी कैसी सज़ा

अंतिम समय ली

चुप से बिदा।

4

मन ना माने

तू ना अब जीवित

भ्रम सयाने।

5

दर्द को पीना

आ जाए बिन तेरे

माँ मुझे जीना।

6

अकेलापन

पाने को तरसता

अपनापन।

7

डोलती आस

अकेलापन खाए

रोज़ रुलाए।

-0-

2-शशि पाधा

1

खनखनाई

बतियाई चूड़ियाँ

जागी जुन्हाई ।

2

ओढ़ा ,पहना

सतरंगी घाघरा

नाचे अँगना ।

3

गुनगुनाए

अधर सिहराए

बोल ना पाए ।

4

दूज का चाँद-

सजे निशा-कण्ठ में

चाँदी- हँसली ।

5

पुरवा संग

पाहुन भिजवाए

प्रेम संदेसे ।

6

पग आहट

साँसों की सरगम

हिली नथनी ।

7

ओ रे बिछुआ

क्यूँ खोल दिया भेद

तोड़ा करार ।

-0-

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Responses

  1. Krishnaa ji maa se Judi yaade aur yadon ke jharokon se haiku behad marmsparshi . Kya kahe yadi yah matr rachna srijan hai to bahut badhai aur yadi haqiqat darshan hain to saadar naman.

  2. Sabhi haiku sunder badhai Shashi ji.

  3. कृष्णा जी के अपनी स्वर्गीय माता जी की स्मृति में लिखे हाइकु मर्मस्पर्शी हैं | माँ तो एक अनमोल हीरा होती है , ईश्वर उनकी दिवंगत आत्मा को शन्ति दे | वास्तव में –

    माँ !तू धरती
    तू ही जड़ हमारी
    सिंची हूँ मैं तुझी से,
    सानी ना कोई
    तुझसा, होगा कभी
    जन्म-जन्मान्तर में |
    शशि जी सुंदर हाइकु हेतु आपको बधाई |

    शशि जी सुंदर हाइकु हेतु आपको बधाई | पुष्पा मेहरा

  4. सभी हाइकु उम्दा !!

    माँ अनमोल निधि है उसे खोने की पीड़ा आपके हाइकू में द्रष्टव्य है आद. कृष्णा जी…. माँ को हृदय से नमन। ..अति संवेदनशील हाइकु!

    दर्द को पीना
    आ जाए बिन तेरे
    माँ मुझे जीना।

    शशि जी बहुत सुन्दर बिम्ब के साथ मनमोहक हाइकू !

    दूज का चाँद-
    सजे निशा-कण्ठ में
    चाँदी- हँसली ।

    शुभकामनाओं के साथ –
    ज्योत्स्ना प्रदीप

  5. अति सुंदर हाइकु कृष्णा जी -पुरवा संग/पाहुन भिजवाये/प्रेम संदेश–वाह ।

  6. अति सुंदर हाइकु कृष्णा जी -दी कैसी सजा/अंतिम समय ली /चुप से विदा —
    पुरवा संग/पाहुन भिजवाये/प्रेम संदेश–वाह –शशि जी

  7. कृष्णा जी, माँ की स्मृति ही माँ के खोने के दुःख को कम कर सकती है | आपके हर हाइकु में माँ के चले जाने का दुःख निहित है | धैर्य रखिए और यूँ ही लिखती रहिए | स्नेह और शुभकामनाओं सहित,
    शशि पाधा

  8. मेरे अहसासों को महसूस करने व मेरे दुख में शामिल होने के लिए सुनीता जी, आ० पुष्पा जी, ज्योत्स्ना जी, शशि जी आप सभी का हृदय से धन्यवाद।

  9. शशि जी प्रीत का इज़हार करते बेहद सुंदर सभी हाइकु….हार्दिक बधाई।

  10. माँ की स्मृतियाँ हमेशा संग साथ रहती हैं ।माँ का जग छोड़कर चले जाना ऐसा दुख है जोअन्तिम सांस तक साथ रहता है ।माँ का अंश ही तो होती हैं संताने ।माँ के दिये गुण संस्कारों को ले कर बच्चे हर मुश्किल से जूझ सकते हैं ।सब पर माँ का आशीर्वाद बना रहे ।कृष्णा जी आप अपने को धैर्य दें ।आप के हाइकु माँ की स्मृतियों से सजे बहुत मार्मिक हैं ।माँ को स्मृतियों से न जाने दे ।आप के एक एक हाइकु में वे सजीव हैं ।हर स्मृति को यूं ही संजोये रखें ।

  11. बहन कमला जी सहानुभूतिपूर्ण शब्दों के लिए आपका बहुत धन्यवाद।

  12. Respected krishna ji
    Ek dard ko kitni bhavmayta se apne present kiya ..Naman

  13. Respected Shashi ji Sunder likha

  14. प्रेम का उदय होने पर तन मन में इर्द गिर्द का सारा अहसास प्रेम की अनुभूति कराता है ।बहुत सुन्दर प्रस्तुति है शशिपाधा जी ।बधाई ।

  15. कृष्णा वर्मा जी माँ विषयक बहुत उम्दा भाव।

  16. दूज का चाँद-
    सजे निशा-कण्ठ में
    चाँदी- हँसली ।

    शा
    शशि जी बहुत अच्छा बिम्ब।
    बी

  17. माँ को समर्पित मर्मस्पर्शी हाइकु कृष्णा दी ..

    दी कैसी सज़ा
    अंतिम समय ली
    चुप से बिदा।…बहुत ही मार्मिक ! स्व. माता जी को सादर श्रद्धांजलि !!

    बहुत भावभीने हाइकु शशि दी !

    दूज का चाँद-
    सजे निशा-कण्ठ में
    चाँदी- हँसली ।…बहुत ही प्यारा बिम्ब ! दिल से बधाई !!

    जीवन के दो पक्ष प्रस्तुत करने के लिए सम्पादक द्वय को साधुवाद !!!!

  18. कृष्णा जी माँ की याद में ह्रदय से निकले हैं मर्मस्पर्शी हाइकु |
    दी कैसी सज़ा ….बहुत दर्द से पूर्ण है |आपके दुःख में हमारी संवेदनाएं शामिल हैं |
    शशि जी सुन्दर सृजन के लिए हार्दिक बधाई |

  19. बहुत बेहतरीन…हार्दिक बधाई…


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