Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | दिसम्बर 15, 2016

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1-कृष्णा वर्मा

1

कान जो कच्चे

बिखर जाएं रिश्ते

भले हों अच्छे।

2

खोए हैं होश

करते मनमानी

वक़्त ख़ामोश।

3

बनाओ ऐसा

दरवाज़ा जो खुले

सच की ओर।

4

करम आड़े

चौके में गुरबत

पाँव पसारे।

5

दुखी दीन की

हालत का लिहाज़

करे ना भूख।

6

पीड़ा ने जनीं

क्या बागी सिसकियाँ

थामें ना थमीं।

7

धो कड़वाहट

सब्र के चुल्लू से

मीठी हो ज़ुबाँ।

8

दिल की क्यारी

उगे जो नफरत

मरे सद्गुण।

9

तलखियाँ पी

जवाँ हुई ख़ामोशी

पढ़ती मौन।

10

रहें अवाक

इल्ज़ाम की ईंटों से

होते हलाक।

11

ममता पाले

कोख की दौलत हो

बहू हवाले।

12

मन चरखे

काता दुखों का सूत

आँसू सबूत।

13

हमदर्दों ने

दिए हैं बेदर्दी से

क़ायम दर्द।

14

स्मृतियाँ हरी

लाख दे तसल्ली जी

खाई ना भरी।

-0-

2-अमन चाँदपुरी

1

ट्रेन का डिब्बा

हर यात्री विद्वान

मुफ़्त दे  ज्ञान।

2

तेज बारिश

बचा न पाया मुझे

बेबस छाता।

3

 सूर्य सो रहा

कोहरे से डरके

ओढ़ रजाई।

4

 खिली ज्यों धूप

मिट ही गए सारे

ओस के मोती।

5

 बुरे वक़्त में

शूल _से चुभते हैं

रेशमी रिश्ते।

6

उतर धरा

रातभर तैरता

झील में चाँद।

7

 जीवन -यात्रा

थक कर मनुज

सोए कब्र में।

8

काली रात है

सूरज सो गया है

चाँद डटा है।

9

बिछड़ गया

कोई बहुत ख़ास

मन उदास।

10

चूनर ओढ़े

दुल्हन का चेहरा

साए में धूप।

11

शब्द अर्पण

मन हुआ दर्पण

नया सृजन।

12

रूठ गया है

क्यों गाँव से त्योहार

पूछो न यार।

13

ओ मनमीत!

अधरों पे लिख दो

प्यार के गीत।

14

पाँव के छाले

लम्बा रस्ता देख के

फूट के रोए।

15

गिरी दीवार

बिखरा परिवार

पिता थे नींव।

16

उतर धरा

रातभर तैरता

झील में चाँद।

-0-

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Responses

  1. उतर धरा\रातभरतैरता\झील में चाँद बहुत सुन्दर | वाकई दो बार कहने लायक हाइकू |
    बधाई |

    Name Madan Goyal
    ID mgoyal@nc.rr.com Aa[ DI nahI badlaa
    E_mail Madeera.goyal@gmail.com
    PW TI Aar [ vaI Aao Aar

  2. बहुत सुन्दर हाइकु…,अमन चाँदपुरी जी बधाई।

  3. बहुत अच्छे हाइकु हैं…हार्दिक बधाई…|

  4. अलग अलग अंदाज के हाइकु बहुत पसंद आये हार्दिक बधाई आप दोनों रचनाकारों को –
    शशि पुरवार

    2016-12-15 8:51 GMT+05:30 हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब
    पत्रिका’-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है ! :

    > रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ posted: “1-कृष्णा वर्मा 1 कान जो कच्चे बिखर
    > जाएं रिश्ते भले हों अच्छे। 2 खोए हैं होश करते मनमानी वक़्त ख़ामोश। 3 बनाओ ऐसा
    > दरवाज़ा जो खुले सच की ओर। 4 करम आड़े चौके में गुरबत पाँव पसारे। 5 दुखी दीन की
    > हालत का लिहाज़ करे ना भूख। 6 पीड़ा ने जनीं क्या”
    >

  5. Krishna verma ji &aman ji
    Bahut khubsurat haiku likhe apne…congrates

  6. krishna ji aman ji sunder haiku hetu badhai .
    pushpa mehra .

  7. बहुत सुंदर हाइकु सभी ! दिल को छू गए !
    हार्दिक बधाई कृष्णा दीदी व अमन चाँदपुरी जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  8. कृष्णा जी ,अमन जी आप दोनों को खूबसूरत हाइकु के लिए हार्दिक बधाई

  9. Krishna verma ji &aman ji….Bahut khubsurat haiku!!! haardik badhai !!!


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