Posted by: डॉ. हरदीप संधु | दिसम्बर 11, 2016

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किसी भी विधा के नियम होते हैं, लेकिन नियम बाद में बनते हैं। उन नियमों का आधार होता है , सार्थक लेखन । हम दोनों ने जिस समय हिन्दी –हाइकु शुरू किया था, उस समय कुछ वरिष्ठ  रचनाकारों को छोड़कर हमारे पास अच्छे हाइकु रचने वालों  का टोटा था। हाइकु के नाम पर ऊल-जलूल लेखन हमें नहीं भाया। हमारे साथ ऐसे साथी जुड़ते गए; जिनका छपने में कम ; अच्छा लिखने में ज़्यादा विश्वास था। प्रियंका गुप्ता उन्हीं में से एक है। आज इनके हाइकु दिए जा रहे हैं।

( डॉ हरदीप कौर सन्धु-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’)

प्रियंका गुप्ता

1

सुन रे मेघा

रस्ता भूल गया तू

नैनों में घिरा ।

2

वक़्त के हाथों

फिसले कुछ लम्हें

यादों में गुम ।

3

तुमसे माँगी

कुछ यादें पुरानी

तूने गुमा दी ?

4

लू के थपेड़े,

झुलस रहे पाँव

मिले न छाँव ।

5

वफ़ा के किस्से

तुमने थे सुनाए,

खुद भुलाए ।

6

लम्हों ने बुनी

सदियों की दास्तान

बाँची न गई ।

7

फिसल गया

मुट्ठी से रेत -जैसे

बचपन वो ।

8

लौटा दोगे क्या ?

मेरी प्रीत की माला

टूटे हैं मोती ।

9

तलाश रही

जिस स्वर्ग की तुम्हें

घर में मिला ।

10

उड़ाई धूल

तेरे ही अपनों ने

तेरी आन पे ।

11

निंदिया रूठी

नैनों में आन बसी

तुम्हारी यादें ।

12

जागती रही

ख़्वाब बुनती रही

सोई; खो गए ।

13

बुने थे ख़्वाब

बेपरवाह वक़्त

उधेड़ गया ।

14

क्या थी ख़बर

ज़िन्दगी का सफ़र

यूँ झुलसाता !

15

चुनौती दोगे ?

मुट्ठी में रेत बाँध

ख़्वाब बो दूँगी !

-0-

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Responses

  1. बिलकुल निशब्द हूँ…| आदरणीय काम्बोज जी और हरदीप जी ने मुझे इस अप्रतिम परिवार का एक अटूट हिस्सा बनाया है, इसके लिए तहे-दिल से आभारी हूँ…| उनके मार्गदर्शन और स्नेह के लिए कुछ कह पाने को मेरे पास शब्दों की कमी सी हो जाती है…|

  2. बहुत ही उम्दा हाइकु प्रियंका जी।

    चुनौती दोगे ?
    मुट्ठी में रेत बाँध
    ख़्वाब बो दूँगी !

    आशा और हिम्मत से लबरेज़।

  3. सुन रे मेघा
    रस्ता भूल गया तू
    नैनों में घिरा ।
    सभी हाइकु बहुत ही अच्छे प्रियंका|
    सार्थक लेखन के लिए बहुत बधाई !!

  4. Prinka ji , Congratulations ! Beautiful!!

  5. बहुत खूबसूरत हाइकु प्रियंका जी , मुझे 1 , 13 और 15 तो बहुत ही भाये | आपको बधाई |

  6. प्रियंका ज8 बहुत सुंदर हाइकु

    आदरणीया हरदीप जी व सम्माननीय रामेश्वर काम्बोज भैया जी ..आप दोनों को हार्दिक बधाई ….इस बड़ी कामयबी के पीछे आप दोनों का कठिन परिश्रम है..इस विधा को इतना विस्तार देना और जन-जन तक पहुँचाने का श्रेय आपको जाता है …सादर प्रणाम आप दोनों को

  7. pryanka ji sabhi haiku sunder lage .badhai .

    pushpa mehra .

  8. चुनौती दोगे ?
    मुट्ठी में रेत बाँध
    ख़्वाब बो दूँगी !

    बेहतरीन हाइकु….प्रियंका जी बधाई।


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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