Posted by: डॉ. हरदीप संधु | दिसम्बर 1, 2016

1700


1-डॉ.सरस्वती माथुर

1

पलाशी मन

नदी की लहरों में

बहा दीप- सा।

2

ठिठुरे तारे

ओढ़ कर कोहरा

सो गये सारे

3

दो पीत पात

पतझड़ की रात

डाल से छूटे।

4

घूमते रहे

पतझड़ के पत्ते

सैलानी हुए ।

5

नदी किनारे

तितली -सी हवाएँ

यादों की रेत।

6

श्वेत केश थे

सागर लहरों के

खोलें हवा ने।

7

सितारों जैसा

टिमटिमाते देखा

जुगनू मन ।

8

कूकी कोयल

सोई हुई घाटियाँ

नींद से जागी।

9

मन लय भी

चरखे- सी चलती

यादें बुनती।

 -0-

2-ऋता शेखरमधु

1

हरी चुनरी

रुपहले कुन्तल

मक्का शृंगा

2

खेत में बाली

कृषक के घर में

खुशी निराली

3

मूँगफलियाँ

चट चट तोड़तीं

गिलहरियाँ ।

-0-

3– विजय आनंद
1
दर्द के साये
ये शाम की खामोशी
आँसू -मुस्काए
2
जीवन हारा
थके दिन के काँधे
शाम सँभाले
3
ज़िन्दगी अश्क़
पलकों पे ठहरी
ख्वाहिशों की लौ

-0-

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Responses

  1. बहुत सुंदर, भावपूर्ण हाइकु ! विशेषकर–ठिठुरे तारे/ओढ़ कर कोहरा/सो गये सारे और दर्द के साये/ये शाम की खामोशी/आँसू -मुस्काए
    हार्दिक बधाई सरस्वती जी, ऋता जी एवं विजय आनंद जी !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  2. ह्रदय से आभारी हूँ संपादक द्वय की ,जिन्होंने हमेशा सभी रचनाकारों को एक सुंदर मंच देकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी ।मैं तो इसे मंच नहीं बल्कि एक यूनिवर्सिटी मानती हूँ जहाँ से सीख कर निकलने का अर्थ है एक नया सोपान छूना । वरणा इस स्वार्थी दुनिया में लोग बहुत जल्दी राह दिखाने वाले को भूल जाते हैं । साथ छोड़ देते हैं । बहरहाल अपना आभार प्रकट करते हुए इस मंच को हमेशा नया लिखने की ऊर्जा देने के लिए सलाम करती हूँ और ऋता शेखर मधु व विजय आनंद जी को सुंदर हाइकु रचने के लिए बधाई देती हूँ ।

  3. सरस्वती जी, ऋता जी ,विजय जी
    मनभावन सुन्दर हाइकु

  4. सभी रचनाकारों के हाइकु अच्छे लगे खासकर सरस्वती जी का
    नदी किनारे
    तितली -सी हवाएँ
    यादों की रेत।
    मधु जी का विशेष मूँगफलियाँचट चट तोड़तींगिलहरियाँ एवम
    विजय जी का यह हाइकु बेहद सुन्दर बिम्ब लिए हुए है.*दर्द के साये**ये शाम की
    खामोशी*
    *आँसू -मुस्काए*
    *सुन्दर बिम्बात्मक हाइकु के लिए आप सभी को पुनः बधाई *
    *शशि पुरवार *

    2016-11-30 19:02 GMT+05:30 हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब
    पत्रिका’-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है ! :

    > डॉ. हरदीप संधु posted: “1-डॉ.सरस्वती माथुर 1 पलाशी मन नदी की लहरों में बहा
    > दीप- सा। 2 ठिठुरे तारे ओढ़ कर कोहरा सो गये सारे 3 दो पीत पात पतझड़ की रात
    > डाल से छूटे। 4 घूमते रहे पतझड़ के पत्ते सैलानी हुए । 5 नदी किनारे तितली -सी
    > हवाएँ यादों की रेत। 6 श्व”
    >

  5. सभी हाइकु सुन्दर हैं। रचनाकारों को हार्दिक बधाई!
    – डाॅ कुँवर दिनेश

  6. सरस्वती जी, ऋता जी ,विजय जी
    मनभावन सुन्दर हाइकु……हार्दिक बधाई!

  7. bahut sundar ,mohak drishy ukerate haiku !
    haardik badhaaii !!

  8. मेरी रचना को स्थान देने के लिए मंच का हार्दिक आभार!!
    आ० सरस्वती जी एवं आ० विजय आनंद जी को बधाई!!
    प्रोत्साहन हेतु अनीता जी, सरस्वती दी, ज्योत्सना प्रदीप जी, शशि जी, ज्योत्सना शर्मा जी, कुँवर दिनेश जी, सुनीता जी को हार्दिक धन्यवाद !!

  9. प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार आदरणीया अनीता ललित जी, आदरणीया डॉ सरस्वती माथुर जी, आदरणीया सुनीता काम्बोज जी, आदरणीया Shashi Purwar ji, आदरणीय Kanwar Dinesh जी, आदरणीया jyotsana Pardeep जी, आदरणीया Jyotsana Sharmaji तथा आदरणीया ऋता शेखर मधु जी।

  10. ठिठुरे तारे
    ओढ़ कर कोहरा
    सो गये सारे
    क्या बात है…|

    हरी चुनरी
    रुपहले कुन्तल
    मक्का शृंगार
    बहुत सुन्दर…|

    दर्द के साये
    ये शाम की खामोशी
    आँसू -मुस्काए
    खूबसूरत…|

    आप तीनों को हार्दिक बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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