Posted by: हरदीप कौर संधु | नवम्बर 27, 2016

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1-कृष्णा वर्मा

1

धन रस के

रसपान के मारे

झगड़े सारे।

2

बंदा कोई हो,

हो वो धन की खान

पाएगा मान।

3

दिल ना भरे

धन रस पीने को

कुकर्म करे।

4

धन शैतान

करा के गुणगान

दे अभिमान।

5

मरा ईमान

धन ही सर्वोपरि

बाकी नाकाम।

6

धन ख़ातिर

रोशन हैं बाज़ार

चोखा व्यापार।

7

रिश्ते ना प्यार

तँगे धन_ परदे

आँखों के द्वार।

8

कैसी खनक

काग़ज़ी टुकड़ों ने

बाँटी सनक।

9

धन जुनून

संवेदनाओं का हो

नित्य ही ख़ून।

10

मिटी मर्यादा

कोई संग साथ ना

धन से ज़्यादा।

11

धन शैतान

हिंसा के पाठ बाँचे

राहें अनाम।

-0-

2-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

धूप -किरन

तुम चन्दनमन

मेरा जीवन।

2

तुम स्पंदन

प्राणों की धड़कन

निर्मल मन।

3

युगों-युगों से

चले हो संग-संग

झेल तपन।

4

ये गहो हाथ

छूटे नहीं बन्धन

 पावन मन !

5

लो साँझ हुई

खो नहीं जाएँ कहीं

कसो बंधन।

6

मिली जो नहीं

अधरों की छुअन

 बढ़ी जलन ।

-0-

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Responses

  1. कृष्णा जी सभी हाइकु बहुत सुंदर ..हार्दिक बधाई

  2. आदरणीय भैया जी बहुत शानदार सार्थक हाइकु ..सादर नमन आपकी लेखनी को

  3. कृष्णा जी के हाइकु तो, धन की खोखली गाथा गाते हुए , सुन्दर हैं हीं; काम्बोज जी की रचनाएं जीवन साथी के प्रति अगाद प्रेम दर्शाती ह्रदय स्पर्शी हैं | दोनों रचनाकारों को बधाई और शुभकामनाएं |-सुरेन्द्र वर्मा |

  4. कैसी खनक
    काग़ज़ी टुकड़ों ने
    बाँटी सनक।

    बहुत सुंदर लिखा..आ.कृष्णा जी

  5. बहुत खूब..सभी हाइकु आ.रामेश्वर सर
    लो साँझ हुई
    खो नहीं जाएँ कहीं
    कसो बंधन।….
    बेहतरीन,उम्दा …

  6. सभी हाइकु सुन्दर एवं प्रभावशाली हैं। डाॅ कृष्णा वर्मा जी तथा श्री रामेश्वर काम्बोज जी को हार्दिक बधाई! “कैसी खनक…”, “धूप-किरन…” और “लो साँझ हुई…” – ये तीन हाइकु सबल बिंबों के साथ विशेष रूप से हृदय को छूते हैं।
    – डाॅ कुँवर दिनेश

  7. भाई काम्बोज जी सभी हाइकु बहुत उम्दा!
    लो साँझ हुई
    खो नहीं जाएं कहीं
    कसो बंधन।…………बेहद मन को छुआ।

  8. वाह! एक तरफ़ कृष्णा दीदी के जीवन के कटु सत्य को दर्शाते ‘धन’ पर हाइकु तो दूसरी तरफ़ आ. भैया जी के कोमल स्पर्श से सहलाते हाइकु !
    आप दोनों को बहत-बहुत बधाई एवं नमन !

    ~सादर
    अनिता ललित

  9. मिटी मर्यादा
    कोई संग साथ ना
    धन से ज़्यादा।
    बहुत सुन्दर…| बेहद बधाई…|

    लो साँझ हुई
    खो नहीं जाएँ कहीं
    कसो बंधन।
    बहुत गहरी बात…| बेहतरीन हाइकु के लिए हार्दिक बधाई…|

  10. बहुत धनवान अंक !!!

    धन पर आदरणीया कृष्णा दीदी के सच्चे और अच्छे हाइकु और प्रेम की उजास लिए काम्बोज भैया जी के भावपूर्ण हाइकु मन को आनन्द से भर गए | दोनों दिग्गजों को सादर नमन ..हृदय से बधाई !!

  11. आदरणीय भैया जी ,आदरणीय कृष्णा जी बहुत शानदार हाइकु !!

    मिटी मर्यादा
    कोई संग साथ ना
    धन से ज़्यादा।
    बहुत सुन्दर…|

    लो साँझ हुई
    खो नहीं जाएँ कहीं
    कसो बंधन।
    गहरी बात!

    .सादर नमन आपकी लेखनी को!!


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