Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | नवम्बर 21, 2016

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1-डॉ.सुधेश

1

आया वसन्त

पतझर का भय

क्यों अनन्त ।

2

आया वसन्त

शिशिर भय से ही

सरसों पीली ।

3

आया वसन्त

हरियाली के मिस

भू रोमांचित ।

4

फूला वसन्त

सोये अरमानों की

निदिया टूटी ।

5

वर्षा रितु

कुण्ठाओ की गरमी

फिर भी ज़्यादा ।

6

बरस बीता

पूरा जीवन घट

मानो हो रीता ।

7

नया बरस

आया इतराता सा

पर दो पल ।

8

ख़ुशी मनाओ

होली आई है देखो

खोलो तो द्वार ।

-0-

2-प्रदीप कुमार दाश ‘दीपक’

1
प्रीत के गीत
पढ़ लो नयनों की
बनोगे मीत ।
2
स्मृति के वन
महकता चंदन
चहका मन ।
3
अश्रु टपके
वियोगिनी रो पड़ी
व्यथा सुनाते ।
4
हों न उदास
मन ही बताएगा
अपनी बात ।
5
माटी का गंध
मनुज ने पा लिया
अपनापन ।
-0-

 

3-रमेश कुमार सोनी

1

भोर ठिठुरी                              

धूप काँपते आती

धुंध छिपती।

2

धुंध रजाई

शीत से छिपे सूर्य

थोड़ा सोने दे।

3

धूप से प्यार

सूर्य मनुहार

निकलो यार।।

4

सूर्य निकले

कोहरा भाग जाता

ठंड छोड़के।।

5

सर्दी का डंक

सब कुछ है बंद

क्या राजा रंक।।

6

धुंध के गर्भ

ओस, सूर्य, दुनिया

छिपे थे सारे।।

7

धुंध दुनिया

किसने है बुलाई

सोचे चिडि़या।।

8

हुई विधवा

शुभ्र वसना धरा

ओस ही रोती।।

9

ठंड की छुट्टी

बच्चो की मटरगश्ती

सर्दी को ठेंगा।।

10

शीत मोहिनी

धूप तापने आती

मेरे अंगना।।

11

शीत जो जमे

पेड़ पहाड़ बोले

समेटो डेरे।।

12

रातें सर्दी की

इंतजार से बड़ी

यादो की गर्मी।।

13

धूप कोहरा

खेलें  आँख मिचौली

सखीसहेली।।
-0- जे.पी. रोड़ बसना 493554(छ.ग.)

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Responses

  1. सभी को उत्तम भावपूर्ण सृजन के लिए बधाई सभी हाइकु बहुत सुंदर

  2. मंजूषा मन जी का एक ही हाइकु प्रभावित कर रहा है,यह हाइकु संकेत में गहन दार्शनिक भाव बोध को व्यक्त कर रहा है,वहीं सरस्वती माथुर जी ने भँवर को केंद्र में रखा है उनके प्रत्येक हाइकु में भँवर भी अनेक अर्थो को खोल रहा है।पूर्णिमा जी का प्रथम हाइकु सामयिक सन्दर्भ का है,शेष सभी भावुक मन की आकुलता को व्यक्त कर रहे हैं। तीनो हाइकु कवयित्रियों को सुंदर हाइकु हेतु बहुत बहुत मंजूषा मन जी का एक ही हाइकु प्रभावित कर रहा है,यह हाइकु संकेत में गहन दार्शनिक भाव बोध को व्यक्त कर रहा है,वहीं सरस्वती माथुर जी ने भँवर को केंद्र में रखा है उनके प्रत्येक हाइकु में भँवर भी अनेक अर्थो को खोल रहा है।पूर्णिमा जी का प्रथम हाइकु सामयिक सन्दर्भ का है,शेष सभी भावुक मन की आकुलता को व्यक्त कर रहे हैं। तीनो हाइकु कवयित्रियों को सुंदर हाइकु हेतु बहुत बहुत बधाई।
    –शिवजी श्रीवास्तव।

  3. “वर्षा ऋतु…”, “माटी की गंध…”, “भोर ठिठुरी…”, “सर्दी का डंक…” – हाइकु बहुत अच्छे बन पड़े हैं। रचनाकारों को बधाई!

  4. बहुत अच्छे लगे सभी हाइकु…आप सभी को हार्दिक बधाई…|

  5. बहुत बढ़िया हाइकु ..सभी हाइकुकारों को बहुत बधाई !


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