Posted by: डॉ. हरदीप संधु | नवम्बर 15, 2016

1988


1-डॉ.सरस्वती माथुर

1

बाल दिवस 

बच्चे खेलते खेल

रेलमपेल ।

2

बच्चों का रेला

बाल दिवस पर 

लगता मेला।

3

पतंग  लाये

बाल दिवस पर 

स्वप्न  उड़ाए ।

4

खेल -खिलौने 

बाल दिवस पर 

ख़्वाब सलोने।

5

ख़ुशी के पल 

मन से सच्चे बच्चे

करें ना छल ।

6

खिला कमल 

बच्चों का भविष्य है 

हमारा कल । 

7

लगते मेले 

बाल दिवस पर 

बच्चों के रेलें ।

8

जीवन पथ

खींच रहे हैं बच्चे 

भविष्य -रथ।

-0-
2-ज्योत्स्ना इन्द्रेश

1

बाल- मन सा

चंचल बनूँ आज

ज़िद करूँ मैं ।

2

बाल दिवस

कढाही माँजता वो

खेल सपना ।

3

बाल दिवस

दो आज़ादी  नन्हों को

खिलें  गुलाब ।

4

खुली हवा में

वक्त की मुस्कान हैं

हँसते बच्चे।

5

बादल जैसा 

उड़ता  बचपन

होता ओझल ।

-0-
3-चंचला इंचुलकर सोनी

1

बच्चों के हाथ

बुलंदियों की जमीं

कच्चे घरौंदे।

2

बच्चों की आँखें

सपने अनमोल

क्षितिज चाह।

3

बच्चों का मन 

मस्ती की पाठशाला

छपाक छई।

4

शिशु की हंसी

मृत्यु तुल्य सा दर्द

माँ सब भूली।

5

नन्हा फरिश्ता

बचपन लौटाया

प्यारा गुमाश्ता।

6

बच्चे रौनक।

गुल्लक की खनक

स्मृति धनक।

-0-
4-डॉ.जितेन्द्र प्रसाद माथुर 

1

यादों का कल

बच्चे थे जब हम

ख़ुशी ही ख़ुशी।

-0-

5-रंजना  त्रिखा

1

बालक मन

भोला , नादान – जाने

अपनापन ।

2

खेल खिलौने

खिलता बचपन

हँसे आँगन ।

-0-

6-रीता ठाकुर

1

टूटे खिलौने 

बिखरी हैं आशाएँ

जीते अभाव।

2

बाल श्रमिक

पड़े हाथों में छाले 

मुँह पे ताले।

3

कूड़ा बीनते 

करें क्षुधा सहन 

कर्मठ बच्चे।

4

भोली मुस्कान

है प्रभु का स्वरूप

निर्मल हृदय।

5

दो इन्हें प्रेम 

सहारा अपनत्व

बच्चे है फूल।

-0-
7-ऋता शेखर ‘मधु

1

ऊर्जा नवल

विश्वास है प्रबल

बाल कँवल

2

एक कदम

बढ़े शिक्षा की ओर

कन्या विभोर

3

घर की खुशी

नन्ही सी किलकारी

माँ बलिहारी

4

नन्हे कदम

बढ़ते जाते आगे

बड़े हैं पीछे

5

मिटी थकान

बाल-सुलभ खिली 

एक मुस्कान।

6

बालक मन

भेद भाव से दूर

खुली किताब।

-0-

8- महिमा (श्रीवास्तव)वर्मा

1

बालक-मन 

निश्छल भोलापन      

क्यों न लें  हम।

2

बड़े सयाने 

बस प्यार ही जाने,

नन्हे नादान ।

3

वो बचपन 

मनमानी -शैतानी

भूली कहानी।

4

प्यार-पुस्तक 

बाँचता बाल-मन 

मिटे तपन ।

5

बालक-मन 

अपना न पराया

प्यार ही भाया।

6

नन्हे फ़रिश्ते

मासूम शरारतें 

नेह जगाते ।

7

शैशव- काल

अब हाल- बेहाल

मरे अकाल।

8

बालक गण 

कच्ची माटी-सा मन 

गढ़ो सपन ।

9

सुख की खान 

गुंजाता किलकारी 

बच्चा नादान ।

10

बालदिवस 

लुटे न बचपन 

आस जगाएँ ।

-0-

9-मंजू गुप्ता

1

नन्हें ये दूत

आसमान से आते

बालक बन।

2

ख़ुशियाँ आएँ

सूना आँगन हँसे

बच्चों के संग।

3

छोटा खिलौना

देटाआ ख़ुशियाँ  बड़ी

बच्चों के खेल।

-0-

10-डॉ.पूर्णिमा राय

1

बालक मन

दूर है झंझटों से

घृणा विहीन ।

2

ये भोले बच्चे

धरती के सितारे

मन के सच्चे ।

-0-

11-साधना अग्निहोत्री

1

राष्ट्र  निर्माण 

बाल  मन  सुलभ

निर्मल  सोच ।

2

बाल गोपाल 

जीवन अलबेला 

सुखों  का  मेला  ।

3

बालक मन 

दिनभर झूलते 

ख्वाब हिंडोला । 

4

बाल मजूरी   

लाचार बचपन 

शापित   रूह  ।

5

समस्या ग्रस्त 

अनाथ  बचपन 

शिशु  रुदन  ।

-0-
12-गुंजन गौरव अग्रवाल 

1

नन्हा शैशव

सिन्धु- सी मोह माया

डूब ही गया।

2

गया डकार

हँसता बचपन

आज का दौर।

3

परी कथाएँ

सिमटा बचपन

शेष व्यथाएँ।

4

मासूम मन

बिकता बचपन

खरीदे स्वप्न।

5

आज भी जिन्दा

मासूम बचपन

खंगालो मन।

6

नयनतारा

नन्हे पंख सयाने

सुदूर प्यारा।

7

बालक मन

माँ बाप का दबाव

कुंठा जनन।

-0-
13-अमृता मंडलोई पोटा 

1

प्यारे बालक

निर्दोष बचपन

चंचल मन।

2

खेल खिलौना

बचपन सलोना

किसका रोना।

3

बच्चे शिक्षित

सुनहरा भविष्य

देश रक्षित।

4

प्यारा बालक

अनमोल खिलौना

मैया दुलारा।

-0-

14- राजीव शेखर माथुर

1.

बच्चों को मिला

बचपन को छीन

सिर्फ ये दिन ।

2.

बाल श्रमिक

क्या है ?बाल दिवस

न जान पाया ।

-0-

15-डॉ रंजना वर्मा

1

बाल दिवस

कितना उपेक्षित

बाल जीवन ।

2

कच्चे करौंदे

बाल मन है जैसे

नन्हे घरौंदे ।

3

बालक पीर

लिखती तकदीर

अच्छी या बुरी ।

4

बालक मन

सदैव है जिज्ञासा

प्रेम पिपासा ।

-0-
16-मीनाक्षी भटनागर

1

स्वप्न की  नाव 

नेह की नदिया बहे

बाल दिवस ।

-0-

17-शिखा सिल्विया 

1

मन तरंग 

कच्ची सी पगडंडी 

बाल उमंग ।

2

बाल दिवस 

महकता  संकल्प 

नई उमंग ।

3

मासूम  बच्चे 

रोकर है  हँसते 

बिना  वजह ।

-0-

18-अभिषेक जैन

1

नाजुक कंधे

खो गया बचपन

बोझों से लदे ।

-0-
19-विजय आनंद 

बच्चे मुस्काए

ज्यों सागर पे भोर

मन विभोर।

-0-
20-प्रेरणा गुप्ता 

1
बाल दिवस 

लौटाये बचपन 

मन उमंग ।

-0-

Advertisements

Responses

  1. लाजवाब सही हाइकु , पढ़कर अपना बचपन याद आ गया . भीतर का छोटा बच्चा जाग गया

  2. भोले प्यारे से बचपन को ताज़ा करते बहुत सुन्दर सभी हाइकु! सभी रचनाकारों को बहुत बधाई।

  3. बाल दिवस के अवसर पर सभी के मनभावन -सरस हाइकु पढ़ कर चित्त प्रसन्न हो गया । आप सब को बहुत-बहुत बधाई ।
    सनेह विभा रश्मि

  4. इतने सारे हाइकु पढ़ कर अपना बचपन याद आ गया | कहाँ गए वो दिन ? सब को बधाई |

  5. बहुत सुंदर अलग अलग बिंब पिरोते रचनाकारों के मन भावन हाइकु मन मोह गये। |सभी रचनाकारों को बधाई व शुभकामनाएँ जो सरस्वती दीप साहित्यिक पत्रिका मंच से भी जुड़े हैं ।सभी की तरफ संपादक द्वय का हार्दिक आभार -हाइकु को इतनी ऊँचाइयों पर लाने का और सबको साथ लेकर चलने का जो कार्य हिंदी हाइकु के माध्यम से हो रहा है उसका कोई सानी नहीं है ,इस मंच ने अंतराष्ट्रीय स्तर पर हाइकु को पहचान दिलायी है । इनका यह योगदान साहित्य जगत कभी भुला ना सकेगा | बहुत बहुत आभार ।

  6. बहुत सुन्दर मनभावन हाइकु| सभी रचनाकारों को हृदय से बधाई और हिन्दी हाइकु मंच का बहुत बहुत आभार मंच पर स्थान देने के लिए| आदरणीया सरस्वती जी का बहुत बहुत धन्यवाद जिन्होंने श्रमपूर्वक संकलन का निर्माण किया| इस मंच से मुझे विश्ष लगाव है| जब लेखन की दुनिया में कदम रखा तो हिन्दी हाइकु मंच के प्रोत्साहन पर आगे बढ़ी| इसके लिए सदा आभारी रहूँगी| संकलन में सभी हाइकु बहुत अच्छे हैं फिर भी जिन हाइकू ने विशेष रूप से प्रभाव डाला उसे दे रही हूँ|
    पतंग लाये/बाल दिवस पर /स्वप्न उड़ाए ।
    खुली हवा में/वक्त की मुस्कान हैं/हँसते बच्चे।
    बच्चों के हाथ/बुलंदियों की जमीं/कच्चे घरौंदे।
    खेल खिलौने/खिलता बचपन/हँसे आँगन ।
    दो इन्हें प्रेम /सहारा अपनत्व/बच्चे है फूल।
    प्यार-पुस्तक /बाँचता बाल-मन /मिटे तपन ।
    नन्हें ये दूत/आसमान से आते/बालक बन।
    बालक मन /दिनभर झूलते /ख्वाब हिंडोला ।
    ये भोले बच्चे/धरती के सितारे/मन के सच्चे ।
    आज भी जिन्दा/मासूम बचपन/खंगालो मन।
    प्यारे बालक/निर्दोष बचपन/चंचल मन।
    बालक मन/सदैव है जिज्ञासा/प्रेम पिपासा ।
    मन तरंग /कच्ची सी पगडंडी /बाल उमंग ।
    जिन रचनाकारों की एक ही प्रस्तुति है वह सभी सुन्दर|
    पुनः बधाई सभी को|
    —-ऋता

  7. सभी रचनाकारों ने बच्चों के प्रति अपने समर्पण लेखन भाव को दिखाकर सजग रचनाकार होने के दायित्व का निर्वहन किया।संपादक द्वय एवं सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई…डॉ.सरस्वती माथुर जी,संपादक द्वय जी आपका शुक्रिया..मेरे. हाइकु को स्थान देने हेतु…..

  8. सभा हाइकुयों में बचपन के सुनहरे चित्र मन बचपन को भा गये ।बधाई सब को ।

  9. सभी रचनाकारों से हाइकु बहुत सुन्दर है, आप सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई हिंदी हाइकु परिवार को पुचनाकारों नः नमस्कार। मित्रों अपरिहार्य कारणों के चलते लेखन बंद हो गया था व सक्रियता भी अब पुनः वापसी करने का प्रयास कर रही हूँ , आज इस मंच पर आकर जो असीम सुख मिला है बयां नहींर सकती , पुनः सभी रचनाकारों को प्रणाम व हार्दिक बधाई।

  10. बाल दिवस पर रचे सरस और मन भावन हाइकु सभी रचना कारों को हार्दिक बधाई |

  11. बहुत सुन्दर मनभावन हाइकु…. सभी रचनाकारों को बहुत-बहुत बधाई।

  12. मन वापस बचपन में लौट गया ! बहुत ही ख़ूबसूरत एवं मन विभोर कर देने वाले हाइकु हैं सभी !
    सभी हाइकुकारों हार्दिक बधाई !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  13. यकीनन बचपन ही एक इंसान की ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत वक्त होता है…बेफ़िक्र, खुशनुमा और उल्लास से भरपूर…| इन हाइकु के माध्यम से निसंदेह ही एक बार फिर बचपन जीने का मौक़ा मिला…| सबको बधाई इतने प्यारे हाइकु लिखने के लिए…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: