Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | नवम्बर 9, 2016

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1-अनिता ललित
1

मन के रिश्ते
जो मन को बींधते
होंठ सी देते ।

2

बची हैं आहें
साँझ ढले क्यों तूने
फेरी निगाहें।

3

कोई तो बात
आँखों-आँखों में कटी
ये लम्बी रात।

4

सर्द मौसम
देने लगा दस्तक
याद-
देहरी

5

गहरा नाता
दर्द का ही दिल से
खरा है रिश्ता।

6

कैसे ये नाते?
अपने कहलाते
दर्द ही बाँटें!

7

क्यों न समझे?
जो नफ़रत बोते
काँटे ही पाते।

8

क्यों मग़रूर?
चाँदनी ही चाँद का
तोड़े ग़ुरूर।

9

चोट गहरी-
नयनों की गगरी
अश्क़ों से भरी।
-0-

2-मंजूषा मन

1

जीवन जैसा

नहीं कोई ज़हर

पीना ही होगा।

2

जीवन जिया

हमने हंस कर

ज़हर पिया।

3

समीकरण

जीवन का गणित

हल न मिले।

4

भोर से साँझ

जीवन यूँ ही बीता

तम– उजास

-0-

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Responses

  1. मंजूषा जी बहुत सुंदर हाइकु
    अनिता जी भावपूर्ण हाइकु

  2. anita ji aur manjuusha ji ap donon ke haiku bahut sunder hain ,badhai .
    pushpa mehra .

  3. कोई तो बात
    आँखों-आँखों में कटी
    ये लम्बी रात।
    बहुत भावपूर्ण…|

    समीकरण
    जीवन का गणित
    हल न मिले।
    अक्सर यही तो होता है…|

    सार्थक हाइकु के लिए आप दोनों को बहुत बधाई…|


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