Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अक्टूबर 6, 2016

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विनोद कुमार दवे

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ढलतीआयु

क्षितिजसा जीवन

स्वप्न शतायु

2

रेत को ओढ़

सोया है मरुस्थल

नींद न तोड़

3

खाली बादल

सहरा की आँखों का

भीगा काजल।

4

रात आँचल

बहका हुआ चाँद

शिशु चंचल।

5

यौवनझोंका

गहरा समन्दर

खण्डित नौका।

-0-

206,बड़ी ब्रह्मपुरी,मुकाम पोस्ट=भाटून्द,तहसीलबाली,जिलापाली

राजस्थान-306707

ईमेल = davevinod14@gmail.com

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Responses

  1. यौवन–झोंका
    गहरा समन्दर
    खण्डित नौका।
    bahut sunder badhai
    rachana

  2. aapkii rcnhnaaon mey aapne hridy ko nichod kr ek sanjeevnii kaa kaam kiyaa hai . Shiam Tripathi Hindi Chetna

  3. विनोद जी भावपूर्ण हाइकु की रचना की है हार्दिक बधाई ।

  4. भावपूर्ण, सुन्दर हाइकु…बधाई विनोद जी।

  5. विनोद जी सभी हाइकु भावपूर्ण और सार्थक

  6. रेत को ओढ़
    सोया है मरुस्थल
    नींद न तोड़ ।
    विनोद कुमार जी बहुत सुंदर अभिव्यक्ति के लिए बधाई ।

  7. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद।

  8. आप सभी का हार्दिक धन्यवाद

  9. यौवन–झोंका
    गहरा समन्दर
    खण्डित नौका।….

    बेहतरीन सार्थक चित्रण …शुभकामनाएं

  10. सुंदर हाइकु !

    ~सादर
    अनिता ललित

  11. बहुत अच्छे हाइकु…बहुत बधाई…|

  12. भावपूर्ण, सुन्दर हाइकु…बधाई विनोद जी!!!


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