Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 17, 2016

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प्रदीप कुमार दाश दीपक

1

स्वप्नों के पंख
चाह छूने की  जगी,
क्षितिज दूर ।
2
संध्या -अधर
दोपहरी के गीत
दुःख के मीत ।
3
खिली ,मुस्काई
आए पवन चूमे
जूही लजाई ।
4
मन पंछी रे !
मैं तो बस तिनका
प्रकृति -नीड़ ।
5
माँ की गोद में
भूलता अग -जग
शिशु- सूरज ।
6
पत्ते  टूटते
गुन -गुनाते चले
गीत विदा के ।
7
मन -अंकुर
प्राण तरु में प्रिय
शाश्वत फूल ।
-0-
साँकरा, जिला- रायगढ़ (छ.ग.)

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Responses

  1. प्रदीप कुमार जी भावपूर्ण हाइकु आपके अच्छे लगे।

    यह विशेष लगा

    पत्ते टूटते
    गुन -गुनाते चले
    गीत विदा के ।

  2. सुंदर सभी हाइकु
    बधाई

  3. प्रदीप कुमार जी सभी हाइकु सुंदर लगे ।यह वाला अधिक भाया – स्वप्नों के पंख/ चाह छूने की जगी / क्षितिज दूर ।बधाई ।

  4. भावपूर्ण हाइकु…प्रदीप जी बधाई।

  5. मन -अंकुर
    प्राण तरु में प्रिय
    शाश्वत फूल ।
    sunder bhav badhai
    rachana

  6. sabhi haiku apane- apane mein arthpurn hain , badhai .
    pushpa mehra

  7. पत्ते टूटते
    गुन -गुनाते चले
    गीत विदा के ।
    bahut achhi soch badhai..

  8. सभी हाइकु बहुत सुन्दर !
    स्वप्नों के पंख … और …मन पंछी रे ! ..अनुपम !!
    हार्दिक बधाई !!

  9. प्रदीप कुमार जी सभी हाइकु सुंदर लगे ….

    मन -अंकुर
    प्राण तरु में प्रिय
    शाश्वत फूल ।

    अनुपम !!
    हार्दिक बधाई !!

  10. सभी हाइकु बहुत अच्छे हैं…बधाई…|


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