Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 13, 2016

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1- डॅा सुधा गुप्ता

1

विकास- आँधी

घायल है चाँदनी

रो रही सृष्टि

2

क्षुद्र मानव!

अन्धाधुन्ध दोहन

रूठी प्रकृति

3

ओजोन ज़ख़्मी

धरती खतरे में

विनाश -लीला

4

सूर्य का कोप

ग्लेशियर पिघले

नदी बौराईं

-0-

2-डॅा अर्पिता अग्रवाल

1

नीम -पत्तों की

हज़ारों तितलियाँ

धरा पे बिछीं

2

अग्नि जिह्वाएँ

लील रहीं जंगल

बेबस जीव

3

आँखें झपका

लाल किरणों वाली,

सूरज छिपा

4

रेत के टीले

दूध -सी चाँदनी में

हिम -से लगें

-0-

3-शशि पुरवार

1

स्वप्न साकार

मुस्कुराती हैं राहें

दरिया- पार।

2

धूप सुहानी

दबे पॉँव लिखती

छन्द रूमानी।

3

लाडो सयानी

जोबन -दहलीज

कच्चा है पानी।

4

धूप बातूनी

पोर -पोर उन्माद

आँखें क्यूँ सूनी ?

5

दुःखों को भूले

आशा का मधुबन

उमंगें -झूले।

6

प्रीत पुरानी

सूखे गुलाब बाँचे

प्रेम कहानी।

7

छेड़ो न तार

रचती सरगम

हिय -झंकार।

8

प्रेम- कलियाँ

बारिश में भीगी है

सुधि- गलियाँ।

9

आई जवानी

छूटा है बचपन

बदगुमानी।

-0-

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Responses

  1. गागर में सागर भर दिया

    डॉ.अर्पिता अग्रवाल, डॉ.सुधा गुप्ता, शशि पुरवार जी बधाई

  2. सम्माननीय सुधा दीदी के प्रकृति दोहन से उत्पन्न भयावह आपदाओं को बताते हाइकु
    बहुत सुंदर व स्पष्ट है , अर्पिता जी और शशि जी के हाइकु भी सुंदर हैं बधाई|

    पुष्पा मेहरा

  3. नमस्कार आ. कम्बोज जी , सन्धु बहन परिवार में पुनः प्रकाशन हेतु तहे ह्रदय से आभार। पुष्पा दीदी , मंजू जी आप सभी का तहे ह्रदय से आभार

  4. सुधा दीदी , अर्पित जी बहुत सुन्दर हाइकु हार्दिक बधाई

  5. डॉ सुधा जी ,डॉ अर्पिता जी और शशि जी आप तीनों को भिन्न भिन्न भावों से पूर्ण हाइकु सृजन के लिए हार्दिक बधाई ।

  6. बहुत बढ़िया हाइकु….सुधा दीदी, अर्पिता जी, शशि पुरवार जी बधाई!

  7. नाना भान बिम्ब लिये सभी हाइकु उत्तम लगे ।आदरणीया सुधी जी ,अर्पिता एवं शशि पुरवार जी सभ को बधाई ।

  8. hamesha ki trha sudha ji ke haiku bahut achhe lage, baki rachnakaron ke haiku bhi bahut bhavpurn hain sabhi ko meri badhai…

  9. पर्यावरण की चिंता को व्यक्त करते बहुत सुन्दर हाइकु ..आ सुधा दीदी की सजग लेखनी को सादर नमन !
    डॉ. अर्पिता जी एवं शशि जी को भी सुन्दर सृजन हेतु बहुत बधाई !

  10. डॉ सुधा जी प्रकृति के प्रति सजगता के पावन सन्देश को नमन है –

    विकास- आँधी
    घायल है चाँदनी
    रो रही सृष्टि |

    ,डॉ अर्पिता जी और शशि जी –

    रेत के टीले
    दूध -सी चाँदनी में
    हिम -से लगें |

    धूप सुहानी
    दबे पॉँव लिखती
    छन्द रूमानी।

    सुन्दर सृजन !

    डॉ सुधा जी ,डॉ अर्पिता जी और शशि जी आप तीनों को हार्दिक बधाई ।

  11. बहुत ही बेहतरीन हाइकु…आप सभी को हार्दिक बधाई…|


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