Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 15, 2016

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 1प्रदीप कुमार दाशदीपक

प्रदीप दास1

माँ का आँचल
छँट जाते दुःख के
घने बादल l
2

म्बा सफ़र
टूटती जिन्दगानी
सँभल चल l
3

दिन है दूल्हा
दुल्हन सज रही
चाँदनी रात l
4

जानते दुःख
झड़े हुए पत्ते ही
पतझर का l
5

लोक गीत की
देखो लय चुराए
पवन आए l
6

नीड़ अपना
रोज़ बनाए पाखी
हवा ले उड़ी l

7

टूटें  शाखाएँ
कहाँ करे बसेरा
नन्ही चिड़िया l
-0-
प्रदीप कुमार दाशदीपक,    साहित्य प्रसार केन्द्र सांकरा
व्हायासरिया,जि रायगढ़,    छत्तीसगढ़ – 496554

-0-

2-शशि पाधा  ( यू  एस)

1

सिंदूरी शाम

रचाए महावर

धरती पाँव ।

2

धूप ओढ़ाए

सरसों की चुनरी

धरा यौवना ।

3

मेघ गगरी

छलकी, ना बरसी

सिहरी धरा ।

4

जेठ- आषाढ़

तप गया सूरज

अग्नि परीक्षा ।

5

बहती चली

उमंगों की नदिया

रुकी ना थमी ।

6

चाँद! सुनो तो

सँभलकर आना

सोई  है  रात ।

7

फूटे अंकुर

रिश्तों की फुलवारी

नेह के बीज ।

8

मन ने ठानी

हो गई मनमानी

मन ही ज्ञानी ।

-0-


Responses

  1. बहुत खूबसूरत हाइकु प्रदीप जी, शशि जी….बधाई!

  2. प्रदीप कुमार दाश और शशि पाधा जी के हाइकु सरस और मनोहर है.दोनो ने ही प्रकॄति के विविध रूपों को सह्ज रूप में चित्रित किया है. दोनों को साधुवाद।

  3. प्रदीप जीऔर शशि जी सुंदर सृजन द्वारा मन हर लिया ।हार्दिक बधाई ।

  4. sunder haiku shashi ji v pardeep ji badhai . pushpa mehra

  5. खूबसूरत हाइकु रचना ।बधाई शशि जी व प्रदीप जी ।

  6. अप्रतिम हाइकु
    बधाई आप दोनों को .

  7. बेहतरीन हाइकु के लिए बहुत बधाई…|

  8. bahut sunder haiku shashi ji v pardeep ji bahut badhai aap donon ko ….


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