Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 26, 2016

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1– डॉ सुरेन्द्र वर्मा

1

लुटाके पानी 

प्यास बुझाए – घट 

प्यासा का प्यासा  

2

मैं चौंक गया 

खटका दरवाज़ा 

देखा, हवा थी

3

द्वारे लटका, 

इंतज़ार ताली का 

विरही ताला

4

वृक्ष विशाखा 

हुआ छाया विहीन  

ठूँठ सा खड़ा 

5

लोग चुप हैं 

निर्विकार से खड़े 

जैसे पहाड़ 

6

मंजिल नहीं 

हाँ ढाल मिलती 

बहते लोग 

7

किसको कहें 

अपनी ही सुनते 

बहरे लोग

8

चिड़िया प्यासी 

कुत्ता पी गया पानी 

दर्द कहानी 

9

बीता सो बासी 

कोई पुरानी पीड़ा 

हो क्यों हावी 

10

ताके ऊपर 

दरकती धरती 

नभ बेदर्दी 

11

बाँधी है घड़ी 

बाँध न पाए वक्त 

फिसल गया 

12

लापता कल 

पल पल पीकर 

जीते हैं जन 

-0-

10, एच आई जी ,1, सर्कुलर रोड ,इलाहाबाद –211001 

-0-

2-डॉ सरस्वती माथुर

1

आओ घटाओ

मेघों की बंदिश में

बूँदें ले आओ ।

2

ख़ुशी अथाह

झमाझम बरसे

नैनो से अश्क़ ।

3

दरिया हूँ मैं

साहिल को छूकर

निकल लूँगी ।

4

बना दिया है

तुमने कंठलता

मैं तो लता थी।

5

माटी के जैसी

भीनी -सी ख़ुशबू  है

याद तुम्हारी

6

निकला चंदा

गाँव के अँगना में

खेत दमके ।

7

हवा -सा मन

आकाश नाप कर

उड़ान भरे ।

8

अचानक ही

रोक कर उड़ान

लौटी चिड़िया ।

-0-

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Responses

  1. डॉ सुरेन्द्र जी व डॉ माथुर जी के हाइकु अच्छे लगे बधाई।

    अपनी ही सुनते /बहरे लोग ।बहुत ख़ूब । डा. सुरेन्द्र जी

    अचानक ही /रोक कर उड़ान /चिड़िया लौटी ,
    दरिया हूँ मैं /साहिल को छूकर/ निकल लूँगी ।सुन्दर रचना डॉ माथुर जी

  2. द्वारे लटका \ इन्तजार चाभी का \ विरही ताला | आ. वर्मा जी का यह हाइकु द्वैतार्थक है |
    एकाकी जीवन की एकरसता भंग करने हेतु किसी अन्य का होना भी आवश्यक है नहीं तो मन का ताला कैसे खुलेगा और उसके विरह तरंगों से घिरे दरवाजे भी क्योंकर खुलेंगे माथुर जीके हाइकु भी सुंदर हैं | बधाई |

    पुष्पा मेहरा

  3. सभी हाइकु सुंदर
    बाँधी है घड़ी ,कंठलता विशेष !
    हार्दिक बधाई !

  4. सुरेन्द्र जी सभी हाइकु बहुत भाव भरे हुए हैं सरस्वती जी आपका हाइकू दरिया हूँ मैं /साहिल को छूकर /निकल लूंगी ।बहुत मन भाया ।दोनों हाइकुकारों को ह्रदय से बधाई ।

  5. सुरेन्द्र जी बहुत सुन्दर आज के सभी हाइकु ।इनका तो क्या कहना-खटका दरवाजा…विरही ताला…और बीता सो बासी । तभी तो कहतें हैं बीती ताही विसार दे आगे की सुधि ले ।
    सरस्वति जी आप के हाइकु भी बहुत सुन्दर है ।जैसे – बना दिया है /तुमने कंठमाला /मैं तो लता थी।
    अन्य भी खूब हैं ,खुशी अथाह ,माटी के जैसी ,दमके खेत ।एक से बड़कर एक । आप दोंनो को हार्दिक बधाई ।

  6. बहुत बढिया हाइकु

    बाँधी है घड़ी
    बाँध न पाए वक्त
    फिसल गया।

    बना दिया है
    तुमने कंठलता
    मैं तो लता थी।

    आप दोंनो को बहुत बधाई।

  7. बाँधी है घड़ी
    बाँध न पाए वक्त
    फिसल गया
    हवा -सा मन
    आकाश नाप कर
    उड़ान भरे ।
    sunder haiku badhai aapdono ko
    rachana

  8. सुरेन्द्र जी, विभिन्न भाव लिए सभी हाइकु अच्छे लगे | हर हाइकु में एक रहस्यमय भाव था जो उनका सौन्दर्य बढ़ा रहा था |
    बधाई |

    सरस्वती जी , बहुत खूब मेघों की बंदिश,हवा सा मन , सभी बिम्ब भावप्रबल | बधाई |

  9. eaksebdhkar eak haiku bahutbhavpurn dono rachnakaron ko meri hardik badhai..

  10. सभी हाइकु बहुत मन भाये…हार्दिक बधाई आप दोनों को


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