Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मई 4, 2016

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1-प्रियंका गुप्ता

1

बुहार देना

अकेलापन मेरा

ख्वाबों में आके ।

2

जाने क्यों लौटे

उम्मीदों के मेहमाँ

यूँ बिन मिले ।

3

अलाव जले

कुछ बुरी यादों के

सपने ख़ाक ।

4

टूटी है डोर

कभी बाँधी थी तूने 

मेरे ख्वाबों की ।

5

सोचा तो न था

क्या रंग दिखाएगी

ज़िन्दगी मेरी ।

6

रचती रही

सपनों की दुनिया

बिखर गई ।

7

तन्हाई में क्यों

बजाता रहे मन

अपनी धुन ।

8

कभी पा लेगी

ढूँढ रही जो राह

ज़िन्दगी मेरी ।

9

करना चाहा

जो अपने मन का

रिश्तों ने रोका ।

-0-

2-*सुवना*  डॉ अम्बुजा मलखेडकर

अम्बुजा1

नही आसरा

कोई मजदूरों का

मन है दु;खी ।

2

मजदूर है

कोई गुलाम नही

न कर जुल्म

3

आज छीने हैं

मजदूरों का काम

विद्युत-यंत्र ।

4

ओहदेवाले

मजदूर– वेदना

समझें कब

 5

माता का अंक

है निज सिंहासन

अमृत पान

6

ममता– मूर्ति

सभी को सँवारती

राह दिखाती ।

7

ऊर्जा जगाती

वात्सल्य– प्रेममूर्ति

कष्ट छुपाती ।

8

हे महतारी

तुम मेरा सहारा

तुम्हीं किनारा

9

तुम करुणा

पूर्ण स्वरूप दिया

तुम चट्टान

10

त्याग की मूर्ति

गतिशील रहती

सदा हँसती

11

माँ के समान

जगत मे न कोई

पीड़ा सहती

12

माता मै बनूँ

तुम्हारी हर पीड़ा

टीस की दवा

13

माँ के बिना

हमेशा सूना -सूना

मन –आँगन।

-0-

परिचय

*सुवना* डॉ अम्बुजा मलखेडकर

जन्म 16 नवंबर 1976,कलबुर्गी

शिक्षा : एम.ए बी.एड पी एच डी (हिन्दी )

व्यवसाय : अतिथि प्राध्यापिका

सरकारी महाविद्यालय ,कलबुर्गी

प्रकाशित पुस्तक : हाइकु एवं काव्य संग्रह, पिरामिड काव्य संग्रह 2016

सम्मान : तमिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी चेन्नई द्वारा समय प्रबंधन एवं गुणवत्ता सम्मान 2014,

राष्ट्रीय दलित साहित्यकार सम्मेलन द्वारा डॉ अंबेडकर नेशनल फेलोशिप सम्मान , पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी द्वारा 2015 मे समग्र लेखन तथा साहित्य धर्मिता के लिए डॉ महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान, हिमाक्षरा राष्ट्रीय साहित्य परिषद द्वारा डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम एक्सलेन्स इन एजुकेशन अवार्ड

-0-

पता : प्लाट नंबर 35 विश्वराध्या कालोनी आलंद रोड कलबुर्गी कर्नाटक

 

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Responses

  1. बहुत रस सिक्त सुन्दर हाइकु प्रियंका जी बहुत बधाई !

    माँ और मजदूर दोनों पर बेहद भावपूर्ण हाइकु .. डॉ.अम्बुजा मलखेडकर *सुवना* जी हार्दिक वंदन अभिनन्दन !

  2. 1
    बुहार देना
    अकेलापन मेरा
    ख्वाबों में आके
    2
    माँ के समान
    जगत मे न कोई
    पीड़ा सहती ।
    बहुत भावपूर्ण हाइकु आप दोनों को हार्दिक बधाई।

  3. प्रियंका गुप्ता, डॉ.अम्बुजा मलखेडकर *सुवना* जी लाजवाब हाइकु .
    बधाई

  4. बुहार देना
    अकेलापन मेरा
    ख्वाबों में आके ।
    माँ के बिना
    हमेशा सूना -सूना
    मन –आँगन।
    badhai aapdono ko
    rachana

  5. प्रियंका जी और डॉ अम्बुजा जी अपने भावों को हाइकु में बांधकर सुन्दर सृजन किया है हार्दिक बधाई |

  6. बुहार देना
    अकेलापन मेरा
    ख्वाबों में आके ।
    माँ के बिना
    हमेशा सूना -सूना
    मन –आँगन।

    सुन्दर सृजन !
    प्रियंका जी हार्दिक बधाई |
    डॉ.अम्बुजा मलखेडकर *सुवना* जी हार्दिक वंदन अभिनन्दन हार्दिक बधाई….

  7. .सुवना जी के माँ पर लिखे सभी हाइकु बहुत सुंदर हैं ,प्रियंका जी के भी हाइकु सुंदर हैं |
    दोनों को बधाई |

    पुष्पा मेहरा

  8. प्रियंका जी, आपके हाइकु एक बार फिर से सपनों की दुनिया में ले गए | सपनों में आके एकाकीपन बुहारने का बिम्ब बहुत अच्छा लगा |

  9. सुवना जी, स्वागत है आपका हमारे हाइकु कुटुंब में | माँ का कोई सानी नहीं यह तो शाश्वत सत्य है | बधाई आपको |

  10. आप सभी का दिल से आभार…|
    सुवना जी, बहुत सुन्दर हाइकु हैं आपके…| हार्दिक बधाई…|


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