Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 29, 2016

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नीलमेन्दु सागर

NEELAMENDU SAGAR1

गुलमोहर

क्यों अगिया  बैताल

गुस्साया लाल ।

2

नभ में चाँद

आँगन इठलाती

दूधिया नदी ।

3

आँगन खड़ी

चाँदी कटोरा हाथ

भिक्षुणी रात ।

4

बिछौना हरा

आई पसर बैठी

धूप अप्सरा ।

5

राधा  लिपटी

घनश्याम के गले

कौंधी बिजली ।

6

दूब पे ओस

ओस पर किरण

दीप्त जीवन ।

7

न दिल आग

न ही आँखों में पानी

क्या जिन्दगानी ।

8

धूप की धूनी

रमाए बैठा वन

आदिम मन ।

9

शिशिर शोभा

पेड़ नग्न, उदास

रूप की प्यास ।

10

जूड़े में फूल

देह राखड़ -धूल

पर्वती बाला ।

11

ललाया वन

ढाक के तीन पात

शप्त जीवन ।

12

धुंध में रेल

सिन्धु बीच तैरती

गर्भिणी ह्वेल ।

13

चाँदनी रात

पपीहे की पुकार

चौंका संन्यास ।

14

खारा का खारा

पी नदी की मिठास

सिन्धु बेचारा।

15

माँग में टीका

कण्ठ अबुझ प्यास

रात उदास ।

[ सद्य प्रकाशित हाइकु-संग्रह ‘त्रिदल ही त्रिदल‘ से ।अंग्रेजी विभागाध्यक्ष पद से सेवा निवृत्त।मूल नाम: रामसागर राय । पत्नी का नाम नीलम ।इसलिए साहित्यिक नाम नीलमेन्दु सागर । अवस्था के 80 वर्ष एक जनवरी 2016 को पूर्ण कर चुके ।आज भी लेखनरत । हर तरह की आपाधापी से कोसों दू्र।हिन्दी हाइकु-परिवार के लिए निरन्तर स्नेहशील ।]

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Responses

  1. नीलमेंदु जी सभी हाइकू बहुत सुन्दर भावों से परिपूर्ण और सशक्त शब्दों में गुंथे हैं ।शुभकामनाएं और बधाई स्वीकारें ।

  2. saskt sbhi haaiku .

  3. नीलमेंदु जी के सभी हाइकु बहुत सुंदर बिम्ब लिए हुए हैं।

    धुंध में रेल
    सिन्धु बीच तैरती
    गर्भिणी ह्वेल ।

    नवीन बिम्ब वाह !! बधाई

  4. हाइकु संकलन, त्रिदल ही त्रिदल , के प्रकाशन पर नीलमेंदु जी आपको बहुत बहुत बधाई| यहाँ तो कुछ चुने हुए हाइकु ही हैं ,लेकिन इनसे पता चलता है कि पुस्तक के अन्य हाइकु भी कितने लाजवाब होंगे| आपको हार्दिक बधाई |

  5. सभी हाइकु सुंदर भावों व नवीन बिंबों से युक्त हैं नीलमेंदु जी को ‘ त्रिदल ही त्रिदल’ हाइकु संग्रह के प्रकाशन हेतु बधाई |
    पुष्पा मेहरा

  6. आदरणीय नीलमेंदु जी को हाइकु संग्रह के लिए बहुत बधाई | प्रकृति के सौन्दर्य को शब्दों में चित्रित किये सभी हाइकु एक कंद्र छटा बिखेरते हैं | अद्भुत लेखन |

    सादर,
    शशि पाधा

  7. आदरणीय निमलेन्दु जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाये ।निश्चित ही यह संकलन नव हाइकुकारों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाएगा ।
    धुंध में रेल
    सिन्धु बीच तैरती
    गर्भिणी ह्वेल ।

  8. आदरणीय नीलेंदु जी सर्व प्रथम आप को आप की पुस्तक त्रिदल ही त्रिदल के लिये बहुत सारी बधाई ।बहुत खूबसूरत लगे आज के हाइकु नवीन बिम्ब लिये … बहुत सुन्दर लगे ।जूड़े में फूल/ देह राखड़ धूल/ पर्वत बाला ।…. दूब पे ओस/ ओस पर किरण/ दिप्त जीवन । इसी तरह आगे भी अपनी रचनाओं का रसास्वादन करातें रहें ।नमन और शुभ कामनायें ।

  9. बहुत मनभावन हाइकु ….असीम बधाई ।

  10. हाइकु संकलन, त्रिदल ही त्रिदल , के प्रकाशन पर आदरणीय नीलमेंदु जी आपको बहुत बहुत बधाई| सभी हाइकु बहुत सुंदर बिम्ब लिए हुए हैं।
    नवीन बिम्ब लिये लाजवाब हाइकु !
    आँगन खड़ी
    चाँदी कटोरा हाथ
    भिक्षुणी रात ।

    दूब पे ओस
    ओस पर किरण
    दीप्त जीवन ।

    धुंध में रेल
    सिन्धु बीच तैरती
    गर्भिणी ह्वेल ।
    सादर नमन और शुभ कामनायें !

  11. सभी बहुत मनभावन हाइकु…| इन सभी बेहतरीन हाइकु के लिए हार्दिक बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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