Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 12, 2016

1600


1-कृष्णा वर्मा

1

टाले ना टलीं

यादें आ धमकीं जो

दिल की गली।

2

छाँव में पले

तभी नारी जीवन

फूले ना फले।

3

सीना है चाक

दबा के दुख कहें

हैं ठीक-ठाक।

4

यादों में खोई

सीलन पलकों की

ओढ़ के सोई।

5

करवटों में

चुभें जो बीती बातें

सीली हों रातें।

6

युग त्रासदी

वक्ती आँचल ओढ़

जिए बेबसी।

7

चटके स्वप्न

पहरन के धागे

ज्यों टूट जाते।

8

उखाड़े घर

रिश्तों की बुनियाद

शक की नमीं।

9

हसरतों  को

निगलें जो चिंताएं

उठें गुब्बार।

10

आए ना पिया

आँसुओं के तेल से

जलाऊँ दीया।

11

दिखें ना रिसें

फिर कैसे ये घाव

केवल टिसें।

12

तय करती

जिंदगी सिलेबस

मिलते जवाब।

13

दिल तोड़ के

कहें लोग अपना

रखना ख़्याल।

14

मरी संस्कृति

मर्यादा गांधारी- सी

बाँधे है पट्टी।

15

हारोगे यदि

रिश्तों से युद्ध में

निश्चित जीत।

16

कैसा जुनून

खून के रिश्ते लगे

चूसने ख़ून।

17

छोड़ो ये रोग

मेरे बारे में क्या क्या

कहेंगे लोग।

18

कामयाबी के

कैसे नए विचार-

चाकू- कटार।

19

होगा सुकून

खोएगी जिस दिन

ख़्वाबों की चाबी।

20

शक्ति है प्यार

वरना जूठे बेर

 क्यों खाते राम ?

21

पालो विश्वास

मुश्किलों से लड़ता

शस्त्र ये ख़ास।

22

मन का मीत

चुनतीं सदा आँखें

कैसी ये रीत।

23

गिरें दीवारें

जब-जब घर की

बढ़ें दालान।

-0-

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Responses

  1. वाह वाह कृष्णा जी बहुत हाइकु है हार्दिक बधाई , सभी एक से बढ़कर एक धारदार
    सुन्दर हाइकु हेतु बधाई – शशि पुरवार

    2016-04-12 15:08 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-हाइकु कविताओं की वेब
    पत्रिका-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है !” :

    > रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ posted: “1-कृष्णा वर्मा 1 टाले ना टलीं यादें आ
    > धमकीं जो दिल की गली। 2 छाँव में पले तभी नारी जीवन फूले ना फले। 3 सीना है
    > चाक दबा के दुख कहें हैं ठीक-ठाक। 4 यादों में खोई सीलन पलकों की ओढ़ के सोई। 5
    > करवटों में चुभें जो बीती बातें सीली हों रातें। ”
    >

  2. वाह वाह कृष्णा जी बहुत सुन्दर हाइकु है , सभी एक से बढ़कर एक धारदार सुन्दर
    हाइकु हेतु हार्दिक बधाई – शशि पुरवार

    2016-04-12 15:14 GMT+05:30 Shashi Purwar :

    > वाह वाह कृष्णा जी बहुत हाइकु है हार्दिक बधाई , सभी एक से बढ़कर एक धारदार
    > सुन्दर हाइकु हेतु बधाई – शशि पुरवार
    >
    > 2016-04-12 15:08 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-हाइकु कविताओं की वेब
    > पत्रिका-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है !” comment-reply@wordpress.com>:
    >
    >> रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ posted: “1-कृष्णा वर्मा 1 टाले ना टलीं यादें आ
    >> धमकीं जो दिल की गली। 2 छाँव में पले तभी नारी जीवन फूले ना फले। 3 सीना है
    >> चाक दबा के दुख कहें हैं ठीक-ठाक। 4 यादों में खोई सीलन पलकों की ओढ़ के सोई। 5
    >> करवटों में चुभें जो बीती बातें सीली हों रातें। ”
    >>

  3. वाह कृष्णा जी ! क्या बात है ! एक से एक बढकर हाइकु | इतने सुन्दर हाकु के लिए आपको बहुत बहुत बधाई |टाले न टली / छाँव में पले / यादों में खोई / करबटो में / आए न पिया / दिल तोड़ के / किस किस की बात करें |सभी बेहद खूब सूरत, विचारोत्तेजक | ह्रदय से बधाई |
    सुरेन्द्र वर्मा |

  4. सुंदर हाइकु सभी ….एक से बढ़कर एक …
    सीना है चाक
    दबा के दुख कहें
    हैं ठीक-ठाक….विशेष ..हार्दिक बधाई दीदी !
    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  5. कलम की पैनापन है
    बधाई दीदी

  6. कृष्णा जी सभी हाइकु विचारोत्तेजक हैं ।युग की सच्चाई ,रिश्तों की असलियत ,कामयाबी की पोल खोलते ,आज की कड़बी सच्चाई ब्याँनते एक से बढ़ कर एक हाइकु ।आज के हालात दर्शाते सभी बहुत अच्छे लगे । यह वाला कितना खूब लिखा हाइकु …. दिल तोड़के/ कहें लोग अपना / रखना ख़्याल ।बहुत सारी बधाई ।

  7. वाह सुन्दर सृजन । बधाई एवं शुभकमनाये ।

    गिरी दिवार
    जब जब घर की
    बढे दालान
    बेहतरीन हाइकु

  8. गिरी दिवार
    जब जब घर की
    बढे दालान…..वाह !
    सभी हाइकु बहुत ही सुंदर ….बधाई कृष्णा जी।

  9. वाह बहुत खूब लिखे हैं सभी हाइकु सशक्त हैं |आये न पिया …..| गिरें दीवारें /जब जब घर की ……,| यादों में खोयी …..| बहुत अच्छे लगे | बधाई हो कृष्णा जी |

  10. |
    सीना है चाक
    दबा के दुख कहें
    हैं ठीक-ठाक।

    दिखें ना रिसें
    फिर कैसे ये घाव
    केवल टिसें।

    गिरें दीवारें
    जब-जब घर की
    बढ़ें दालान।
    वाह सुन्दर सृजन । एक से बढ़कर एक……..नमन है आपको और आपकी लेखनी को. कृष्णा जी |

  11. कृष्णा जी एक से एक बढ़कर हाइकु
    शक्ति है प्यार
    वरना जूठे बेर
    क्यों खाते राम ?

    दिल तोड़ के
    कहें लोग अपना
    रखना ख़्याल।

    सीना है चाक
    दबा के दुख कहें
    हैं ठीक-ठाक।

    जितनी बार भी पढ़ो उतना कम है। आपको सादर नमन ।

  12. कैसा जुनून
    खून के रिश्ते लगे
    चूसने ख़ून।
    बहुत सच्चे और सटीक हाइकु…| हार्दिक बधाई…|


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