Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 3, 2016

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1-मौन विश्राम-डॉ सुधा गुप्ता

1
कण -कण में
बजती बाँसी की धुन
सुन रे मन !
2
अमृत -वर्षा
करते कृपा-घन
चिर नूतन ।
3
देह -पिंजर
रोग शोक सदन
तू परमात्मन्।
4
पुलकित है
शान्त करुणा स्नात
धरती मन।
5
त्याग दे राग
नश्वर रंगमंच
कर मनन ।
-0-
2-वसन्तोत्सवडॉ सुधा गुप्ता

1
‘वसन्त सेना’
‘मदनोत्सव’ हेतु
सजी खड़ी है ।
2
‘कन्दर्प’ बाण
अचूक है संधान 
सृष्टि घायल।
3
काम -दहन
शिव शाप से ग्रस्त
हुए ‘अतनु’।
4
रति -विलाप
द्रवित शिव देते
पुनर्जीवन ।
5
सखा वसन्त
मचाते हैं ऊधम
‘मनोज’ बन ।

-0-

3-मोक्षदा शर्मा

1

मन तराश 

खुलेंगे तभी तेरे 

ये मोहपाश । 

2

वो  निर्धन  जो 

भर न सके घाव 

कई अभाव । 

 3               

हो जो आसक्त

फिर कैसे हो मुक्त 

 आत्मा अतृप्त। 

4

तेरी पीड़ा ने 

दिया नवजीवन

खुले बंधन । 

-0-

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Responses

  1. सुधा जी को प्रणाम. गज़ब की सुन्दरता और निर्मलता होती है आपकी लेखनी में.
    जीवन के दो भाव, कितने अद्भुत रूप…
    त्याग दे राग
    नश्वर रंगमंच
    कर मनन ।

    ‘वसन्त सेना’
    ‘मदनोत्सव’ हेतु
    सजी खड़ी है ।

    मोक्षदा शर्मा जी का स्वागत एवं बधाई भावपूर्ण हाइकु के लिए.
    वो निर्धन जो
    भर न सके घाव
    कई अभाव ।

  2. वाह सुधा जी आपकी लेखनी को नमन । मोक्षदा जी आपके हाइकु भी भावपूर्ण हैं हार्दिक बधाई ।

  3. बहुत दिनों बाद सुधाजी के अमृतमय हाइकुओं का आस्वादन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । मन शीतल हो गया । मोक्षदा जी को भी उनके सुन्दर सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई

  4. सुधा जी आप की सिद्ध कलम से लिखे गये सभी हाइकु दार्शनिक चिंतन से ओत प्रोत हैं ।ज्ञान से भर गये ।वसंतोत्सव वाले हाइकु में काम देव के अतनु होने की कम शब्दों मे कथा गुनगुना गये ।अति सुन्दर लगे , और मोक्षदा शर्मा जी आप ने भी बहुत सुन्दर रचना की बहुत अच्छा लगा …. मन तराश/ खुलें गे तभी तेरे / ये मोह पाश । दोनों को बधाई ।

  5. आदरणीया सुधा दीदी जी की लेखनी सदा ही निःशब्द कर देती है। जीवन-दर्शन के सुंदर भाव प्रस्तुत करते हाइकु मन को मोह लेते हैं।
    त्याग दे राग/नश्वर रंगमंच/कर मनन ।– कुछ सोचने को मजबूर कर जाता है।
    आपको तथा आपकी लेखनी को सादर नमन !!!

    मोक्षदा जी के भी सभी हाइकु सुंदर एवं भावपूर्ण हैं।
    मन तराश /खुलेंगे तभी तेरे /ये मोहपाश । –बहुत सुंदर !
    आपको बहुत-बहुत बधाई !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  6. सभी हाइकु तथ्यों से पूर्ण बहुत सुंदर हैं, मदनोत्सव हेतु तत्पर वसंतसेना मन में राग जगा रही है तो नश्वर जीवन को राग-विराग के भाव से मुक्त होने का संदेश देता हाइकु इस संसार वन से और मन से वासना के विषाक्त काँटों को छाँट -छाँट कर फेंकने और शांत भाव की सुगंध मन में बसाने की प्रेरणा दे रहा है |.मोक्षदा के भी सभी हाइकु सुंदर हैं | सुधा दीदी की लेखनी को ,उनके भावों को नमन ,शर्मा जी को बधाई |
    पुष्पा मेहरा

  7. ‘त्याग दे राग’ , देह-पिंजर’ ,’वसंतसेना’ ..क्या कहिए ..सभी अमृत वर्षा करते , मन को पावन भावों से भरते बहुत सुन्दर हाइकु ..आदरणीया दीदी को, उनकी लेखनी को सादर नमन !

    मोक्षदा जी के भी सभी हाइकु नवीन भावों से भरे ..बहुत सुन्दर हैं !
    हार्दिक बधाई !

  8. बेमिसाल हाइकु लड़ी में यह गज़ब का हाइकु …..त्याग दे राग / नश्वर रंगमंच / कर मनन |
    आ० सुधा गुप्ता जी को मेरा नमन।

    सादर
    कृष्णा वर्मा

    सभी हाइकु बहुत सुन्दर भावपूर्ण….मोक्षादा जी हार्दिक बधाई।
    मन तराश / खुलेंगे तभी तेरे / मोहपाश । ………बेजोड़!

  9. अति सुन्दर…अप्रतिम हाइकु…हार्दिक बधाई…


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