Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 7, 2016

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हाइकु-जुगलबंदी

( पहले स्थान पर अनिता मण्डा के हाइकु और दूसरे स्थान पर जुगलबन्दी में रचे डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा  के हाइकु)

अनिता मंडा : डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

1

साँसों के तार

अंतर्मन ने सुनी

प्रीत-झंकार।

0

मन की वीणा

बज उठते गीत

प्रेम-संगीत !

2

रात के आँसू

कमल की हथेली

फिसल गए।

0

बूँद का मन

सीपी में गिर जाऊँ 

मोती कहाऊँ !

3

मिट्टी के रंग

सिखलाते हमको

जीने के ढंग।

0

माटी मगन

रंगों का जीवन में –

करो सृजन  !

4

टिमटिमाते

धरा पर जुगनू

नभ पे तारे।

0

तारों- से प्यारे

नयनों के जुगनू

प्रिये ! तुम्हारे ।

5

भारी थे आँसू

हल्का हुआ है मन,

जब भी बहे।

0

आँसू जो झरे

बुझे मन अगन

जीवन तरे !

6

मन -कमल

परतें हैं हजार

भीतर खाली।

0

याद –भँवरा

मन के शतदल-

आए , न जाए !

7

फागुन माह

रँगी है चुनरिया

प्रेम के रंग।

0

खुशी के रंग

तन-मन चढ़ी है

प्रेम की भंग !

8

फूली सरसों

बिछी है धरा पर

पीली चुनरी।

0

धानी चूनर

ऋतुराज करते

फूलों की वर्षा !

9

गेंदे की क्यारी

बसंत की पगड़ी

खुली, बिखरी ।

0

गेंदे का तुर्रा

ऋतुराज पधारे

पगड़ी धारे !

10

झड़े हैं पत्ते

जीर्ण वस्त्र उतारे

नवीन धारे।

0

था  जर्द पत्ता

थाम रहीं कोपल

फूलों की सत्ता !

-0-

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Responses

  1. दोनों रचनाकारों को बहुत बहुत बधाई

  2. वाह ज्योत्स्ना दीदी अद्भुत सृजन बधाई।

  3. aik se badhkar aik ! kis -kis ki tareef karou samajh nahin aa raha …jyotsna ji evam anita ji ko bahut abahut badhai sundar srajan ke liye !

  4. दोनों रचनाकारों को बधाई ,,,,,सभी हाइकु लाजवाब

  5. अंतर्मन की वीणा के तार जुड़ते ही जब कोई अदृश्य शक्ति साँसों के तारों को आपस में जोड़ने में समर्थ होती है तब ऐसी जुगलबंदी सम्भव हो पाती है …….मन -मस्तिष्क पर छाने वाली | ज्योत्स्ना जी साथ ही अनिता जी को भी बधाई |
    पुष्पामेहरा

  6. माहिया की जुगलबन्दी के बाद अब हाइकु की जुगल बंदी | वाह! बहुत भायी यह प्रस्तुति | दोनों रचनाकारों को बधाई |

  7. aap sabhi sudhijanon kaa hruday se aabhaar !

    saadar
    jyotsna sharma

  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति….दोनों रचनाकारों को बहुत बधाई!

  9. अरे वाह बहुत पसंद आया अंदाज ..बहुत बहुत बधाई।

  10. अनीता जी के हाइकू और ज्योत्सना जी की जुगलबंदी में बंधे हाइकु सभी अनेक रंगों में रचे हैं हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ।

  11. कला कोई भी हो, जुगलबंदी से सदा ही उसका रूप निखर उठता है ! लेखन में भी यह चार चाँद लगा देती है !
    अनीता के हाइकु पर ज्योत्स्ना जी की जुगलबंदी अत्यंत रुचिकर तथा मनमोहक लगी !
    आप दोनों को बहुत-बहुत बधाई!!!

    ~सादर-सस्नेह
    अनिता ललित

  12. Sundar bahut bahut badhai..,

  13. बहुत प्यारी जुगलबंदी

    वासंती रंग में रँगे लाजवाब हाइकु
    दोनों हाइकुकारों को बधाई

  14. स्नेह भरे प्रोत्साहन के लिए आप सभी का हृदय से आभार !

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  15. बहुत ही सुन्दर जुगल बंदी 🙂

  16. हाइकु जुगलबंदी अपूर्व ।बधाई अनीता व ज्योत्स्ना जी ।

  17. सुनीता जी , विभा रश्मि जी ..दिल से शुक्रिया आपका !

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  18. आप दोनों की अनूठी जुगलबंदी में हाइकु संसार खिलखिला उठा सादर बधाई |

  19. बहुत सुन्दर जुगलबंदी…| आप दोनों को हार्दिक बधाई…|


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