Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 1, 2016

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[डॉ जेन्नी शबनम कविता के क्षेत्र में ऐसा नाम है , जो चुपचाप, प्रदर्शन से कोसों दूर , दिल की गहराइयों में समन्दर –सी हिलोर छुपाए है। कभी गहरी चुप्पी कि हम तलाश करते रह जाते हैं- जेन्नी शबनम कहाँ गुम हो गई ! अचानक गहन मार्मिक काव्य के साथ संवेदनशील पाठक को चौंका देती हैं कि अर्थ की गहनता और कल्पना के रंग पहचानों । लगभग पिछले पाँच वर्षों में आपने हाइकु को एक नई भाव-भंगिमा प्रदान की है। इस अंक में इनके बीस हाइकु ! सम्पादक द्वय ]

 -0-

jenny (1) (1)मुक्ति का मार्ग

 डॉ जेन्नी शबनम

1

मुक्ति का मार्ग

जाने कहाँ है गुम

पसरा तम !

2

कैसी तलाश

भटके मारा– मारा

मन बंजारा !

3

बहुत देखा

अपनों का फ़रेब

मन कसैला !

4

मन यूँ थका,

ज्योंक़्त के सीने पे

दर्द हो रुका !

5

सफ़र लम्बा

न साया न सहारा

जीवन तन्हा !

6

उम्र यूँ बीती,

जैसे जेठ की धूप

तन जलाती !

7

उम्र यूँ ली

पूरब से पश्चिम

किरणें चलीं !

8

उम्मीदें लौटीं

चौखट है उदास

बची न आस !

9

मेरा आकाश

मुझसे बड़ी दूर

है मगरूर।

10

चुकता किए

उधार के सपने

उऋण हुए !

11

जीवन भ्रम

अनवरत क्रम

न होता पूर्ण !

12

बचा है शेष

दर्द का अवशेष,

यही जीवन !

13

मन की आँखें

ज़िन्दगी की तासीर

ये पहचाने !

14

नही ख़बर

होगी कैसे बसर

क्रूर ज़िन्दगी !

15

ये कैसा जीना

ख़ामोश दर्द पीना

ज़हर जैसा !

16

जीवन मर्म

दर्द पीकर जीना

मानव जन्म !

17

मन तीरथ

अकारथ ये पथ

मगर जाना !

18

ताक पे पड़ी

चिन्दी-चिन्दी ज़िन्दगी

दीमक लगी !

19

स्वाँग रचता

यह कैसा संसार

दर्द अपार !

20

मिलता वर

मुट्ठी में हो अम्ब

मन की चाह !

-0-

(29 -2- 2016)

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Responses

  1. शबनम जी जीवन की गहरी समझ आपके हाइकु में सहज ही दिख रही है।
    एक एक हाइकु उत्तम, बधाई

  2. दर्द अपार, कैसे मिले मुक्ति ? हाइकु रचनाओं के ज़रिए मुक्ति का मार्ग ढूँढ़ती शबनम जी की ये कवितायेँ मन में गहरे तक उतर जाती हैं | बधाई |
    सुरेन्द्र वर्मा |

  3. जेन्नी जी सभी हाइकू मोहक हैं विशेषकर …जीवन मर्म /दर्द पीकर जीना /मानव जन्म ।हार्दिक बधाई ।

  4. jenni ji apake sabhi haiku dil ki gaharaiyon se upaje hain .kis -kis ki prashnsa karun ! bhavanatmak abhivyakti hetu badhai .

    pushpa mehra

  5. जीवन की पीड़ा को जीते बहुत गहरे हाइकु सभी !
    ‘मन की आँखें’ बहुत सुन्दर …हार्दिक बधाई जेन्नी जी !!

  6. डॉ.जैनी ..बहुत सुंदर अभिव्यक्ति….
    ये कैसा जीना…वाहहहह..कितना दर्द भरा है आपने….

  7. ताक पे पड़ी
    चिन्दी-चिन्दी ज़िन्दगी
    दीमक लगी !
    khoob bahut sunder likha hai aapne badhai
    rachana

  8. गहन हाइकु…..हार्दिक बधाई जेन्नी जी!

  9. जेन्नी शबनम जी जिन्दगी के बारे में शाश्वत सत्यों को उजागर करते सभी हाइकु दिल में जगह बना कर बैठ गये । कितनी सहजता सेआप ने जिन्दगी के सारे रंग हाइकुयों मे पिरो दिये । यह कैसा जीना /खामोश दर्द पीना /ज़हर जैसा।…..और यह …उम्र यूँ ढली /पूरब से पश्चिम/ किरणे चली ।जिन्दगी की ऐसी सुन्दर व्याख्या बहुत सुन्दर लगी ।बहुत बहुत बधाई।

  10. सभी हाइकु लाजवाब ….
    “बहुत देखा–
    अपनों का फ़रेब
    मन कसैला !”
    बहुत सटीक हाइकु अपनों का फ़रेब वास्तव में बहुत दर्द देता है।बहुत बधाई व शुभकामनाएँ शबनम जी।

  11. अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण हाइकु जेन्नी जी ! विशेषकर-

    बहुत देखा–
    अपनों का फ़रेब
    मन कसैला !

    बहुत बधाई !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  12. चुकता किए
    उधार के सपने
    उऋण हुए !

    ताक पे पड़ी
    चिन्दी-चिन्दी ज़िन्दगी
    दीमक लगी !
    सभी हाइकु बहुत सुन्दर लगे, पर ये दोनों बहुत पसंद आए…| हार्दिक बधाई…|

  13. आदरणीय काम्बोज भाई एवं हरदीप जी, मुझे और मेरे हाइकुओं को इतना सम्मान देने के लिए हृदय से आभारी हूँ.
    काम्बोज भाई के प्रशिक्षण और प्रेरणा का परिणाम है जो मैं हाइकु लिखना सीख रही हूँ. हाँ, अनियमित हो जाती हूँ, पर कोशिश रहती है कि कुछ न कुछ सृजन कर सकूँ. आप सभी का स्नेह पाकर अभिभूत हूँ.
    आप सभी ने मेरे लेखन की सराहना की, हृदयतल से धन्यवाद. आप सभी का स्नेह व आशीष यूँ ही सदैव मिलता रहे कामना है. सभी का आभार!


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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