Posted by: डॉ. हरदीप संधु | फ़रवरी 28, 2016

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1-अनिता  मण्डा

1

साँसों के तार

अंतर्मन ने सुनी

प्रीत-झंकार।

2

रात के आँसू

कमल की हथेली

फिसल गए।

3

मिट्टी के रंग

सिखलाते हमको

जीने के ढंग।

4

टिमटिमाते

धरा पर जुगनू

नभ पे तारे।

5

भारी थे आँसू

हल्का हुआ है मन,

जब भी बहे।

6

मन -कमल

परतें हैं हजार

भीतर खाली।

7

फागुन माह

रँगी है चुनरिया

प्रेम के रंग

8

फूली सरसों

बिछी है धरा पर

पीली चुनरी

9

गेंदे की क्यारी

बसंत की पगड़ी

खुली, बिखरी ।

10

झड़े हैं पत्ते

जीर्ण वस्त्र उतारे

नवीन धारे।

-0-

2-राम शरण महर्जन ( नेपाल)

1

मन के रंग

रंग देता जन को

हाइकु भूमि

2

उड़ते पंछी

सँवारते जीवन

स्मृति के पन्ने

3

अमूल्य देह

मत फेंको वक्त पे

जीवन डालो

4

बात -बात को

ठुकराना नहीं तू

शब्द बाण से

5

चंचल बच्चे

रंग भरते  हमें

रूठें पल में।

6

दुखों के आँसू

सँवारते जिंदगी

शक्ति बना लो

7

प्यार की डोरें

बाँधती जन्म-जन्म

रिश्ते हमारे ।

8

डूबता रहा

पहचाने आप को

झील हाइकु

9

जीनें सहारा

मुश्किलों से सामना

ये हुई बात

10

जगाते रहो

उम्मीदों को दीप पे

फूलों की  वर्षा ।

-0-

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Responses

  1. मिट्टी के रंग/सिखलाते हमको/जीने के ढंग
    बधाई ।दोनों रचनाकारों को सुंदर हाइकु रचनाओं के लिए
    कैलाश बाजपेयी

  2. सुन्दर भाव भरे बहुत सुन्दर हाइकु ….अनिता जी , राम शरण महर्जन जी बहुत-बहुत बधाई !

  3. गेंदे की क्यारी

    बसंत की पगड़ी

    खुली, बिखरी ।

    दुखों के आँसू

    सँवारते जिंदगी

    शक्ति बना लो।

    bahut khub kaha meri badhai aap dono ko…

  4. सुंदर रंगों भरे हाइकु ! अनीता ….

    गेंदे की क्यारी
    बसंत की पगड़ी
    खुली, बिखरी ।- तो बहुत ही अच्छा लगा !

    राम शरण महर्जन जी…
    दुखों के आँसू
    सँवारते जिंदगी
    शक्ति बना लो। -प्रेरक एवं अच्छा लगा।

    हार्दिक बधाई आप दोनों को !

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. अनिता मंडा जी के सभी हाइकु बहुत सुन्दर हैं | नेपाल से रामशरण जी के हाइकु देखकर बड़ी प्रसन्नता हुई | ‘स्मृति के पन्ने’ ‘प्यास की डोरें’ – क्या बात है!
    सुरेन्द्र वर्मा

  6. मेरे हाइकु को यहाँ स्थान देने व सराहना देने हेतु हार्दिक आभार।

    रामशरण जी बहुत उम्दा हाइकु।

    दुखों के आँसू
    सँवारते जिंदगी
    शक्ति बना लो।

    वाह, बधाई।

  7. सुन्दर भाव भरे बहुत सुन्दर हाइकु …

    गेंदे की क्यारी
    बसंत की पगड़ी
    खुली, बिखरी ।

    दुखों के आँसू
    सँवारते जिंदगी
    शक्ति बना लो।.
    अनिता जी , राम शरण महर्जन जी बहुत-बहुत बधाई !

  8. फूली सरसों
    बिछी है धरा पर
    पीली चुनरी।
    अनिता मण्डा जी

  9. मन मोहक हाइकु , सुंदर शब्द संयोजन , बधाई दोनों रचनाकारों को |

  10. मनोहारी हाइकु…..अनीता मण्डा जी, राम शरण जी हार्दिक बधाई!

  11. बहुत मनभावन हाइकु हैं…| अनीता जी और नेपाल से हमारे इस परिवार में शामिल रामशरण जी को हार्दिक बधाई…|


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