Posted by: डॉ. हरदीप संधु | फ़रवरी 18, 2016

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अनिता ललित

1

मीत ने छला

हाथों की लकीरों से

क्या करूँ गिला !

2

तोड़ा भरोसा

टूट के बिखरी मैं 

काँच सा धँसा !

3

थी मझधार

हाथ छुड़ाके तूने

किया किनारा।

4

आस के प्याले

किए तेरे हवाले

क्यों दिए छाले ?

5

जीवन डोर

हर पल उलझे

राह न सूझे।

6

प्रीत के सिरे

किस तरह मिलें

तुम बिसरे।

7

पीड़ा गहरी

सही जाए न कही

आँख है भरी। 

8

लाऊँ कहाँ से

बुझे दीप में ज्योति

साँसें हैं चुकी।

9

क्यों छल किया ?

मेरे प्यार का तूने 

क्या सिला दिया ?

10

गहरे धारे

कैसे मिले किनारे

टूटे सहारे। 

-0-

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Responses

  1. अनिता ललित जी बहुत सुंदर हाइकु, बधाई स्वीकार करें।

  2. अनिता ललित जी बहुत सुंदर हाइकु, बधाई स्वीकार करें।
    आस के प्याले
    किए तेरे हवाले
    क्यों दिए छाले ?

    बहुत अच्छे

  3. निराशा और भग्नाशा का भावपूर्ण पूर्ण बहुत सुन्दर चित्रण |बधाई अनिता जी |
    सुरेन्द्र वर्मा

  4. सुन्दर हाइकु ; इतनी सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए अनिता ललित जी बधाई !

  5. अनिता ललित जी प्रेमी के छल से प्रेमी हृदय के टूटन बिखरन का भावात्मक वर्णन नन्ही कविता हाइकु में पिरो कर आप ने सुन्दर रचना की है ।बधाई आप को । कमला।

  6. गहरे धारे
    कैसे मिले किनारे
    टूटे सहारे।
    bahut khoob badhai
    rachana

  7. अनीता जी बहुत खूबसूरत भाव भरे हाइकु रचे हैं हार्दिक बधाई .

  8. bhut bhavpurn haiku hain anita ji badhai.

    pushpa mehra

  9. आप सभी के स्नेहसिक्त मान हेतु ह्रदय से आभार!
    मेरे हाइकु को यहाँ स्थान देने के लिए भैया जी एवं हरदीप का हार्दिक आभार!!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  10. आप सभी के स्नेहसिक्त मान हेतु ह्रदय से आभार!
    मेरे हाइकु को यहाँ स्थान देने के लिए भैया जी एवं हरदीप जी का हार्दिक आभार!!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  11. Sabhi haiku behad sundar!
    मीत ने छला
    हाथों की लकीरों से
    क्या करूँ गिला …………….laajawaab!
    Anita ji shubhkamnayen!!

  12. बहुत सुन्दर भावपूर्ण हाइकु !
    हृदय से बधाई सखी !!

  13. दिल को छूने वाले सुन्दर हाइकु के लिए बहुत बधाई…|

  14. bichoh bhav ko sunder v saleke se bimbit karte bhavmayi haiku hetu sadar badhai

  15. anita ji bade hi pyare v bhaavpurn haiku hain..
    मीत ने छला
    हाथों की लकीरों से
    क्या करूँ गिला !behad sundar! bas isi tarh likhtee rahiye …shubhkaamnaon ke saath –
    jyotsna pradeep

  16. bahut bhavpurn …bahut bahut badhai..

  17. मीत ने छला
    हाथों की लकीरों से
    क्या करूँ गिला !…….उम्दा हाइकु…..अनीता जी हार्दिक बधाई!


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