Posted by: डॉ. हरदीप संधु | फ़रवरी 17, 2016

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डा. सुरेन्द्र वर्मा

1

फूलों की खुश्बू

गुन-गुन भौंरों की

बेला बेकाबू

2

दृश्य या स्पर्श

गीत अथवा गंध

आभा वसंत

3

खिल उठता

काँटो को धता बताता

फूल गुलाब 

4

सारी प्रकृति

स्वर-ताल में नाचे

साधे संगीत

5

आँखों का रंग

डूबा है सपनों में

छाया वसंत

6

कितनी दूर

हकीक़त व ख़्वाब

कितने पास

7

ज़िंदा आदमी

देखता है सपने

ख़्वाब ज़िंदगी

8

बिना बताए

मन पे, प्राणों तक

छाई तन्हाई

9

बयाँ हो गई

चुप रहकर भी

मौन की भाषा

10

बजती रही

ज़िंदगी बेआवाज़

किसने सुनी ?

11

सात सुरों में

एक स्वर मौन का

ध्यान से सुनें

12

नम हैं आँखें

बरस ही न पड़ें

कुछ तो बोलो

      डा. सुरेन्द्र वर्मा,१०,/१- सर्कुलर रोड / इलाहाबाद--२११००१

 मो. ९६२१२२२७७८

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Responses

  1. खिल उठता
    काँटो को धता बताता
    फूल गुलाब
    sunder bhav
    rachana

  2. आदरणीय वर्मा जी के सभी हाइकु गहरे भाव लिए हैं विशेष रूप से – कितनी दूर \हक़ीकत व ख़्वाब\ कितने पास – सुंदर और पूर्ण सत्य लगा |

    पुष्पा मेहरा

  3. सारी प्रकृति
    स्वर-ताल में नाचे
    साधे संगीत………… बहुत सुंदर

    सभी हाइकु सार्थक।

  4. अतिसुन्दर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति!
    आदरणीय सुरेन्द्र सर जी को सादर नमन !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. ‘सुन्दरतम’ छाँटना बहुत कठिन है.. फिर भी धृष्टता कर रहा हूँ:
    ‘फूलों की खुश्बू
    गुन-गुन भौंरों की
    बेला बेकाबू’
    और
    ‘खिल उठता
    काँटो को धता बता
    फूल गुलाब’—– अनिवर्चनीय … अद्भुत!
    आदरणीय डॉ. सुरेन्द्र वर्मा साहब को नमन!

  6. सभी हाइकु बहुत उम्दा।
    सारी प्रकृति
    स्वर-ताल में नाचे
    साधे संगीत

    वाह !!

  7. सात सुरों में
    एक स्वर मौन का
    ध्यान से सुनो
    सुरेन्द्र जी बहुत खूब रचा है .शुभकामनाएं और बधाई .

  8. Reblogged this on oshriradhekrishnabole.

  9. sundar haiku …

    सारी प्रकृति
    स्वर-ताल में नाचे
    साधे संगीत….vishesh ….aaadraniy ko haardik badhaii !!

  10. खिल उठता
    काँटो को धता बताता
    फूल गुलाब
    बहुत बढ़िया…| हार्दिक बधाई…|

  11. बजती रही
    ज़िंदगी बेआवाज़
    किसने सुनी ?

    Aapke sabhi haiku bahut bhavpurn hai par is haiku ne man moha liya aapko bahut bahut badhai…

  12. जिन्दगी और बसंत पर लिखे मिले जुले हाइकु बहुत सुन्दर दृश्य ले कर आये बहुत अच्छे लगे । देखो तो एक ही हाइकु में बसंत की पूरी छवि सामने खड़ी हो गई ….. दृश्य या स्पर्श / गीत अथवा गंध /आभा बसंत । सुरेन्द्र जी आप की लेखनी यूँ ही विद्वतापूर्ण रचना लेकर आती रहे ।शुभ कामनायें ।


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