Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | फ़रवरी 12, 2016

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1-डॉ सरस्वती माथुर

1

बसंत आया

सुमनों ने बिछा

दस्तरख़ान ।

2

बासंती गीत

सुगंध बिखेरते

छू हुआ शीत।

3

नेह बटोर

फूलों ने बसंत को

रंगों से सींचा।

4

सुमनों संग

रेशमी धरा पर

मन बसंत।

5

बासंती धरा

पीली चूनरी ओढ़

दुल्हन बनी।

6

पाग रंगों की

पहन के वसंत

फूलों पे सजा।

7

अमराई में

कोयलिया जो बोले

बसंत डोले।

-0-

2-मंजु शर्मा

तपती धरा

आ रही है छन के

पत्तों से धूप

2    

तप रही भू

लटका है अकेला

पेड़ पे रवि

3    

जमीं पे बच्चा

जर्सी में घुटना दे

गहरी निद्रा

तम में खड़े

तारों के संग तरु

मौन तपस्वी

5

कट रहे पेड़

सिकुड़ रहे वन

बेघर  पंछी

mnjs64@gmail.com

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Responses

  1. सुंदर हाइकु, पर्यावरण वाला हाइकु बहुत पसंद आया।
    डॉ सरस्वती माथुर और मंजु शर्मा जी को बधाई !

  2. सुंदर भावपूर्ण हाइकु !
    सभी साथियों को ‘बसंत-पंचमी’ एवं ‘सरस्वती पूजा’ की हार्दिक शुभकामनाएँ !!!
    ~सादर
    अनिता ललित

  3. वसंत राग – बहुत सुन्दर |मंजु जी ओर सरस्वती जी को बधाई |
    सुरेन्द्र वर्मा

  4. आदरणीय संपादक जी का मेरे हाइकुओं को हिंदी हाइकु पत्रिका में स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद। भावना सक्सेना जी , सरस्वती दी , विजय आनंद जी , सबके हाइकु पढ़ कर आनंद आ गया सभी एक से बढ़ कर एक हैं।

  5. Sundar haiku meri badhai…

  6. बहुत अच्छे हाइकु हैं…| आप दोनों को बधाई…|


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