Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | फ़रवरी 10, 2016

1573


1-डा.सुरेन्द्र वर्मा

1

बेल व बूटे

पूरी उम्र वसंत

झड़ते पत्ते ।

2

सारी प्रकृति

स्वर- ताल में नाचे

साधे संगीत।

3

सूख न जाए

बचाके थोड़ा रक्खो

आँख का पानी

4

रुकता नहीं

चरैवेति है मन्त्र

सरिता पानी ।

5

आँच प्यार की

सहेजी जिसने भी

जीवन जिया।

6

धरा को मिला

आसमान का साया

फूली-फली वो ।

7

सहित भाव

जीवन हो साहित्य

तभी सार्थक।

8

कभी सुखान्त

तो है दुखांत कभी

जीवन कथा

9

हम सभी तो

निभाते हैं भूमिका

मंच संसार।

10

उठ जाएँगे

महफ़िल में बैठे

बारी आने पे

11

मौत का साया

रहा ज़िंदगी भर

डरी नहीं वो ।

-0-

2-कशमीरी लाल चावला

1

उमर भर

कद बढाते रहे

छोटे ही रहे।

2

लंबी डगर

पग धरते गए

पाई मंजिल॥

-0-

Advertisements

Responses

  1. आदरणीय डॉ. सुरेन्द्र सर जी कलम किसी परिचय की मोहताज तो है नहीं…
    अतिसुन्दर अभिव्यक्ति!
    आपको सादर नमन !

    कश्मीरी जी सुंदर हाइकु !
    हार्दिक बधाई आपको!

    ~सादर
    अनिता ललित

  2. आदरणीय वर्मा जी द्वारा अति सुंदर सृजन हेतु उनकी कलम को नमन, चावला जी को भी
    बधाई|

    पुष्पा मेहरा

  3. chavla ji bahut sunder likha hai bhavon ko shabdon me bakhubi piroya hai
    surendra ji bahut khoob likha hai badhai aapko
    aapdono ko punah badhai
    rachana

  4. सभी लाजवाब हाइकु
    बधाई

  5. आदरणीय वर्मा जी ,कश्मीरी जी सुंदर हाइकु !
    हार्दिक बधाई आपको!

  6. बहुत सुन्दर हाइकु…हार्दिक बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: