Posted by: डॉ. हरदीप संधु | फ़रवरी 2, 2016

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1-सुभाष चंद्र लखेड़ा

1

घर न द्वार

पटरी पर सोता

ये परिवार।

2

कड़क सर्दी

फटे हुए कपड़े

इनकी वर्दी।

3

दुःख की बात

ठिठुरते रहते

ये सारी रात।

4

ठण्ड से मौत

हालात जब ऐसे

रुकेंगी कैसे।

-0-

2-वंशस्थ गौतम

1

धूप फिर से

भाने लगी तन को,

है लौटा शीत  ।

2

धूप निगोड़ी

कभी तन जलाए

कभी सुहाए ।

3

बहे पवन

छँट जाए कोहरा

छा जाए धूप ।

4

हे भगवन

अन्धकार मिटाओ

धूप फैलाओ ।

-0-

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Responses

  1. sardee par sundar haiku …haardik badhaii!

  2. sheet ki dhoop chahate aur sheet se sataye nirdhan , besahara logon ke shriheen tan va mukh ke dard ko atmsat karke likhe gaye subhash ji ke haiku sunder hain, donon ko badhai .

    pushpa mehra

  3. शीत ऋतु पर सुंदर हाइकु !
    हार्दिक बधाई सुभाष लखेड़ा जी एवं वंशस्थ गौतम जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  4. सुन्दर हाइकु, दोनों रचनाकारों को शुभकामनायें!

  5. शीत ऋतु पर विविध, सुंदर हाइकु। रचनाकारों को बधाई !

  6. शीत ऋतु पर केन्द्रित सुन्दर हाइकु के लिए बहुत बधाई…|

  7. sardi or dhup ka milan achha laga meri shubhkamnaye…

  8. सुंदर हाइकु

  9. शीत ऋतु पर सुंदर हाइकु !
    हार्दिक बधाई सुभाष लखेड़ा जी एवं वंशस्थ गौतम जी !


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