Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जनवरी 31, 2016

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1-पुष्पा मेहरा  

1

भोर उठाती

निशा का आवरण

होता उजाला ।

2

रूठे सूर्य को

कितनी  बार भेजी !

दर्दीली  पाती ।

3

चेता ना सूर्य

रूठा ही पड़ा रहा

ले शीतपाटी ।

4

घमंडी सूर्य

कोहरे की जेल में

बंदी हो गया ।

5

आये बादल

खींच गये परदा

सूर्य के आगे ।

6

DSC03728

फोटो:अनिता ललित

निर्दय माघ

घूम घूम बाँटता

हिम– सौगात ।

7

धरती बढ़ी

ज्यों सूरज की ओर

धूप भी बढ़ी ।

8

बदले धरा

जब अपनी दिशा

हँसे सूरज ।

pushpa.mehra@ gmail.com

-0-

2-वंशस्थ गौतम

1

कम्पित तन

ढूँढे टुकड़ा धूप

बेचैन मन ।

2

लो दिन बीता

जोहता रहा बाट

धूप न आई ।

3

खोलो खिड़की

आने दो धूप-हवा

मिटे सीलन ।

4

धूप के बिना

ये जग थम जाए,

अँधेरा छाए ।

5

बंद कमरे

पी रहे अंधकार

खोल दो उन्हें ।

-0-

~ वंशस्थ गौतम , ग़ाज़ियाबाद

    ०९८९७७७७६६३

-0-

3-सुनीता अग्रवाल

1

DSC03737

फोटो: अनिता ललित

बर्फ ही बर्फ

दिखे हर तरफ  –

रिश्तो के रूप ।

2

स्नोजिला  तूफाँ-

तकनीक से स्पर्धा

जीती प्रकृति ।

3

बर्फ बिखरी –

प्रकृति ने उकेरी

छवि रिश्तों की ।

4

हिम संसार –

ले रही है आकार

संवेदनायें ।

5

दागे बुलेट

खोलते ही कपाट –

सर्द बयार ।

-0-

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Responses

  1. बहुत सुन्दर…हार्दिक बधाई…

  2. बहुत सुन्दर…हार्दिक बधाई…

  3. sabhi haiku bahut achhe lage hardik badhai…

  4. सर्दी का सुन्दर चित्रण ..सभी को हार्दिक बधाई !

  5. ati sundar,,,

  6. बंद कमरे \पी रहे अंधकार\खोल दो उन्हें | सही लिखा गौतम जी इसी भाव से मिलती- जुलती कुछ पंक्तियाँ मैंने भी लिखी थीं – ‘ खोल दो इन रोशनदान और खिडकियों को, अँधेरा जहाँ कुंडली मारे बैठा है , आने दो हवा , भरने दो रोशनी इन दरीचों में’ |
    स्नोजिला तूफाँ\तकनीक से स्पर्धा \जीती प्रकृति |सत्य बताता हाइकु, गौतम जी व सुनीता जी बधाई|

    पुष्पा मेहरा

  7. खूबसूरत प्रस्तुति के लिए आप सभी हाइकुकारों को हार्दिक बधाई!

  8. वाह पुष्पा जी सूरज के अलग अलग बिम्ब बहुत सुंदर। वाह गौतम जी, वाह सुनिता।जी।

  9. bada hi mohak chitran hai sabhi haiku me aap sabhi ko badhai
    rachana

  10. सुन्दर सामयिक हाइकु ; सभी हाइकुकारों को इतनी सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए साधुवाद !

  11. बहुत सुन्दर हाइकु है पुष्पा दीदी के प्रकृति रंग बहुत सुन्दर होते हैं एक एक
    मोती जड़ा हुआ है
    सभी रचनाकारों को ह्रदय से बधाई

    2016-01-31 10:40 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-हाइकु कविताओं की वेब
    पत्रिका-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है !” :

    > डॉ. हरदीप संधु posted: “1-पुष्पा मेहरा 1 भोर उठाती निशा का आवरण होता
    > उजाला । 2 रूठे सूर्य को कितनी बार भेजी ! दर्दीली पाती । 3 चेता ना सूर्य
    > रूठा ही पड़ा रहा ले शीतपाटी । 4 घमंडी सूर्य कोहरे की जेल में बंदी हो गया । 5
    > आये बादल खींच गये परदा सूर्य के आगे । 6 निर्दय माघ घूम– घू”
    >

  12. आये बादल
    खींच गये परदा
    सूर्य के आगे ।

    बहुत सुंदर बिंब। बधाई पुष्पा जी !

    कम्पित तन
    ढूँढे टुकड़ा धूप
    बेचैन मन ।

    बहुत सुंदर वंशस्थ गौतम जी !

    दागे बुलेट
    खोलते ही कपाट –
    सर्द बयार ।

    बहुत बधाई सुनीता जी !

  13. subhash jee,pushpa mehra jee,sunita Agarwal jee,Gautam jee n Anita lalit jee sundar mousamee haiga ke liye bahut saree badhai svikaren.

  14. सुंदर हाइकु।

    सभी हाइकुकारों कओ हार्दिक बधाई

  15. bada hi mohak chitran hai sabhi haiku metn……….. aap sabhi ko haardik badhai!

  16. khubsurat vimb or gudh bhaw liye bahtreen haiku sabhi pushpa di evam vanshasth ji ko hardk badhayi 🙂 evam meri rachna ko sthan dene ke liye sampadak mandal ka dil se abhar sarahna kar utsah badhane hetu sabhi priyjano ka hardik aabhar 🙂
    आये बादल
    खींच गये परदा
    सूर्य के आगे ।

    बंद कमरे
    पी रहे अंधकार
    खोल दो उन्हें ।


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