Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जनवरी 16, 2016

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सीमा स्मृति

1

चहकी बया,

चौंका शिकारी,अब

तेरी है बारी ?

2

रोज रावण

रूप बदल सताते

आये न राम ?

3

वो आवाज थी

जादुई सी,क्योंकर

चुभे तीर-सी ?

4

धर्मो के नाम

सवालों का सैलाब

करे प्रहार ?

5

जख्‍मी समाज

क्‍यों न उठे सुनामी

प्रश्‍न बेमानी ?

6

भीड़ का हिस्‍सा

दर्द का एहसास

ये अर्ध सत्‍य ?

7

घायल पंछी

जहरीले ये तीर

क्‍यों चारों ओर ?

8

ये शर्मसार

मानवता,धिक्‍कारे

कब जागोगे ?

9

क्‍या आया वक्‍त

गुलाब में काँटे भी

नहीं डराते ।

-0-babakafunda@gmail.com

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Responses

  1. सामयिक एवं सार्थक हाइकु ! बहुत सुंदर!
    बहुत बधाई सीमा जी !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  2. Sabh haiku behad arthpurn!
    Seema ji shubhkaanayen!

  3. सीमा जी , गहरे कटाक्ष के भाव छिपे हैं आपकी रचनाओं में बधाई |

  4. सुन्दर सार्थक हाइकु….बधाई सीमा जी!

  5. seema ji sabhi haiku samajik visangatiyon ka bhed de rahe hain. bahut sunder ,badhai .
    pushpa mehra .

  6. Bahut khub ! Bahut bahut badhai

  7. बहुत मनभावन हाइकु…हार्दिक बधाई…|

  8. सुन्दर हाइकु सीमा जी। बधाई

  9. सीमा जी ,सभी हाइकु अलग अलग भावों से परिपूर्ण हैं .सुन्दर भाव हैं हार्दिक बधाई .


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