Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | दिसम्बर 8, 2015

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डाँ सरस्वती माथुर

1

गुलाबी सर्दी

डूबता लाल सूर्य

मन रंगीला।

2.

सालों हैं बीते

चिट्ठियाँ देखे हुए

काग़ज़ हैं रीते।

3.

राज खोलतीं

कुछ ख़ामोशियाँ भी

ख़ूब बोलतीं ।

4

अलक संध्या

चंपई फूलों पर

उतरा चाँद ।

5

सहमी नदी

सपनों के सागर

डूबते गये।

6

रेत किनारे

बच्चों सी रार मचा

लहरें खेली।

7

हवाएँ काँपीं

अलाव जलते ही

दौड़ी तो हाँफीं ।

-0-

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Responses

  1. सरस्वती जी बहुत अच्छे हाइकु। बधाई।

  2. सभी हाइकु सुंदर लगे ,माथुर जी बधाई |
    पुष्पा मेहरा

  3. राज खोलतीं
    कुछ ख़ामोशियाँ भी
    ख़ूब बोलतीं ।

    हवाएँ काँपीं
    अलाव जलते ही
    दौड़ी तो हाँफीं ।
    सभी हाइकु बहुत बेहतरीन, पर ये दो ख़ास तौर से पसंद आए…| हार्दिक बधाई…|

  4. सुन्दर हाइकु, सरस्वती जी शुभकामनाएँ !

  5. स्नेही संपादक द्धय , अनिता जी ,पुष्पा जी , प्रियंका जी ह्रदय से आभार ।एेसे ही स्नेह बनाये रहें।

  6. बहुत सुन्दर हायकु हैं बहन हार्दिक बधाई

    2015-12-08 16:35 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  7. राज खोलतीं
    कुछ ख़ामोशियाँ भी
    ख़ूब बोलतीं ।
    बहुत ही खूब हाइकु । दीदी आपको हार्दिक बधाई।

  8. अमित जी , शशि जी व सीमा जी बहुत बहुत आभार …स्नेह बनाये रहें।

  9. अतिसुन्दर हाइकु सरस्वती जी।

  10. अति सुंदर हाइकु सरस्वती जी । बधाईं

  11. बहुत सुन्दर हाइकु ..बधाई !


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