Posted by: डॉ. हरदीप संधु | नवम्बर 21, 2015

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अनिता ललित

1

दुःख के मोती

ये रात है चुनती

भीगी चाँदनी।

2

सुख की भोर

महकी खिली – खिली

मन विभोर।

3

जो देता सुख

जग में क्यों पाता वो

दुःख ही दुःख ?

4

लुटाए सुख

अब दोनों हाथों से

समेटे दुःख।

5

 

गहरी पीड़ा

जो मन में थी दबी

नैनों ने छली।

6

सुख की आस

प्रकृति है बुनती

हँसती सृष्टि।

7

दुःख के काँटे

अपने ही चुभोते-

ग़ैरों ने बाँटे।

8

कैसा है न्याय !

हर दुःख का हर्ता

दंड भरता !

9

सुख-सपने !-

समझेंगें अपने-

छोड़ी उम्मीदें !

 10

आस-उजास

न तरंगों का झाला

टूटी है माला।

 

-0-

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Responses

  1. वाह अनिता जी सारे हाइकु एक से बढ़कर एक।मन को छू गए। बधाई।

  2. सभी हाइकु बहुत अच्छे लिखे हैं , अनिता ललित जी बधाई|
    पुष्पा मेहरा

  3. दिल छू लेने वाले हाइकु बधाई अनीता जी।

  4. बहुत अच्छे हाइकु लिखे हैं ! अनिता जी, बधाई !

  5. सुन्दर हाइकू अनीता जी बहुत बहुत बधाई।

  6. दुःख के काँटे
    अपने ही चुभोते-
    ग़ैरों ने बाँटे।

    aapke sabhi haiku man bhigo gaye bahut kareeb se jana aapne dukh ko…ye haiku sach ke eakdam kareeb hai meri shubhkamnaye…

  7. दुःख के मोती
    ये रात है चुनती
    भीगी चाँदनी।
    vaah anita ji ! eak se badhkar eak haiku …jeevan ki katu sachchaie badi hi mithaas ke saath parosi hai aapne …badhai !

  8. जो देता सुख
    जग में क्यों पाता वो
    दुःख ही दुःख ?
    बहुत सच्ची बात कही है |

    सभी हाइकु दिल को छू गए…हार्दिक बधाई…|


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