Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 28, 2015

प्रेम के धागे


1-पुष्पा मेहरा

1

उलझे  पड़े

हिंसा के बबूल में

प्रेम के धागे ।

2           

बीती उमर

वासना की गठरी

खाली  न  हुई।

3

परिंदे हम

नफ़रत  की आग

जलाती हमें

4

एक चादर

प्यार की सीपी जड़ी

चिरने लगी ।

5

रीते घन सा

निरहंकारी मन

रुई समान।

6

शब्दों की  फाँ

गड़ी  थी जो  गहरे

जख्म दे  ग

7

शब्द है सिन्धु

सम्भाल लेता है जो

भाव- लहरें

8

शब्द रुलाएँ

शब्द शृंगार गढें

शब्द हँसाएँ ।

9

जगातीं तट

पुकारती लहरें

कहे सागर

10

साधिका नदी

दौड़ी चली जा रही

पाने को तट

11

नदी जानती

बन्धनों को तोड़ना

पाने को लक्ष्य

12

जूठे ना होते

मधुसिक्त प्रसून

भौरों  से लिप्त।

13

घिरे सुमन

प्रेम की गुंजार से

देते सुगंध।

14

शब्दों के तीर

भेदें मन की ऑंखें

होते अचूक।       

-0-

2-सविता अग्रवाल सवि

1

हिय का दर्द

कह न सकी कभी

बढ़ता गया

2

दर्द की सीमा

माप दंड न कोई

असीमित ही

3

कैसा ये दर्द

काँटे सा चुभ गया

सीने में मेरे

4

दर्द ने घेरा

मन में भर आया

घना अन्धेरा

5

दर्द का बाँध

बाँधा ना गया जब

लाया तूफ़ान

6

प्रीत का दर्द

उर में बस कर

शूल सा चुभा

7

दर्द की कीलें

ठुकती रहीं सदा

मौन हिय पे

8

काँटों के बीच

फूलों ने ही समझी

दर्द की भाषा

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Responses

  1. बहुत मनभावन हाइकु…आप दोनों को हार्दिक बधाई…|

  2. सुन्दर भावपूर्ण हाइकु…. पुष्पा जी सविता जी बधाई।

  3. 1
    उलझे पड़े
    हिंसा के बबूल में

    Ek pankti chhut gayi hai ismen…

    शब्द रुलाएँ
    शब्द शृंगार गढें
    शब्द हँसाएँ ।
    sundar!badhai…
    दर्द का बाँध
    बाँधा ना गया जब
    लाया तूफ़ान

    bahut khub!bahut badhi..

  4. पुष्पा जी की १ की एक पंक्ति नहीं है

    सभी मन भावन हैं
    बधाई .

  5. पुष्पा मेहरा के सभी हाइकु उनके गंभीर सोच को वाणी देते हैं. – एक चादर / प्यार की सीपी जडी / चीरने लगी. शब्दाधारित हाइकु भी बहुत सुन्दर हैं.
    सविता जी के दर्द केन्द्रित सभी हाइकु ह्रदय को छू जाते हैं. — काँटों के बीच / फूलों ने ही समझी / दर्द की भाषा.
    दोनों रचना कारों को अभिनन्दन
    सुरेन्द्र वर्मा

  6. बहुत सुन्दर हाइकु !
    पुष्पा जी, सविता जी शुभकामनायें!

  7. hiy ka dard \ kah na saki kbhi\ badhta gaya. sachhai batata haiku . dard kahane sekam ho jata hai . sabhi haiku bahut sunder hain.badhai.
    pushpa mehra.

  8. सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे । पुष्पा मेहरा जी और सविता अग्रवाल ‘सवि’ जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  9. पुष्पा जी एवं सविता जी उम्दा हाइकु।शुभकामनाएं

  10. मेरे हाइकु को यहाँ स्थान देने के लिए भाई कम्बोज जी और डॉ.हरदीप जी की ह्रदय से आभारी हूँ | पुष्पा जी के “शब्दों” पर अपने भाव दर्शाते हाइकु बहुत पसंद आये हार्दिक बधाई पुष्पा जी आपको |मेरे हाइकु को भी पसंद करने के लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद |

  11. उलझे पड़े
    हिंसा के बबूल में
    प्रेम के धागे |

    मूल हाइकु इस प्रकार था, पोस्ट छपते समय एक पंक्ति शायद गलती से छूट गई थी जो बाद में लिख दी गई है |खेद है कि आप लोगों को प्रारम्भ में अधूरा हाइकु पढ़ने को मिला और आप लोगों ने इस ओर ध्यान आकृष्ट करा दिया|धन्यवाद
    पुष्पामेहरा

  12. bahut saargarbhit ,sundar haiku ! haardik badhaii !

  13. पुष्प जी बहुत बजुट सुन्दर हाइकु सभी बहु ही सुन्दर हैं। शब्दों की फ़ांस और शब्दों के तीर सुन्दर।
    बधाई

    सविता जी सुन्दर हाइकू। दर्द की कीलें वाह। बधाई

  14. sabhi haiku bahut sunder hain.par

    शब्द रुलाएँ
    शब्द शृंगार गढें
    शब्द हँसाएँ ।
    atisundar…!
    दर्द का बाँध
    बाँधा ना गया जब
    लाया तूफ़ान
    bahut khoobsurat …. haardik badhai aadarniya pushpa ji evam savi ji !


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