Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 25, 2015

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1-बीता जीवन कमला निखुर्पा

1

भूल जा मन

रिश्तों की अनबन

बीता जीवन ।

2

नेह की आँच

पिघल बह चला

मोम सा मन ।

3

राहों पे बिछी

धुँधली दो अँखियाँ

बूढ़ी सखियाँ ।

4

काँपते होंठ

अपनों को पुकारे

बाट निहारें ।

5

छकके पिए

जो नेह अमि मधु

 तृप्त हो जिए

         

 -0-

2-शैफाली गुप्ता 

सुबहशाम 

गूँजे है किलकारी 

पुलके मन 

कोमल मन 

सच से लबालब 

गुड़िया मेरी ।

 3 

 स्नेह उड़ेले  

बोलतीसी  आँखें 

बाँधे मन को  ।

माँ का जीवन 

ममता लुटाकर 

पाता खज़ाना ।

महका घर 

फूलोंसी जो सुन्दर 

बिटिया मेरी

-0-

3-डॉ मंजुश्री गुप्ता

1

MANJUSHRI GUPTAवृद्धावस्था

जीवन का सच है

शिथिल तन।

2

क्यों  करते

पूर्णता की तलाश,

मिलती किसे ?

3

पाप धुले है

पर मैली हो गई

पावन गंगा ।

4

ट्रेफ़िक जाम

समय बरबाद

कितने काम !

5

हीरे- सी लगे

ग्लैमर की दुनिया

काँच ही काँच

6

दौड़ते लोग

उपभोक्तावाद में

मज़िल खोई।

7

स्याह चेहरे

सफेदपोश लोग

टूटते रिश्ते ।

8

खुली  परतें

चेहरा बेनक़ाब

झूठ ही झूठ ।

9

गर्मी बढ़ी है                

शहर में उबाल,                  

पानी न कहीं !            

10

गाँव की गोरी

प्यासा है पनघट

खाली मटका।

11

जल प्लावित

एक ही बारिश में

डूबा शहर ।

12

बचो लड़की !

चतुर बहेलिये

बिछाते जाल ।

-0-

मंजुश्री- परिचय

पूरा नाम – डॉ मंजुश्री गुप्ता

शिक्षा -एम.ए  पी एच डी (अर्थशास्त्र ),(बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी )

सम्प्रति -राजकीय कन्या महाविद्यालय ,अजमेर में अर्थशास्त्र व्याख्याता (एसोसिएट प्रोफेसर ) के रूप में कार्यरत

लेखन की विधाएँ -कविता ,लघुकथा ,हाइकु ,कहानी और लेख इत्यादि

मौलिक पुस्तकें -मौन का संवाद (काव्य -संग्रह)

सम्पादित पुस्तकें -काव्यार्चन  (श्री बद्री प्रसाद पंचोली द्वारा सम्पादित ),ख्वाब ईसा हुए साँसे हुई सुकरात (डॉ संदीप अवस्थी द्वारा सम्पादित)काव्य संग्रहों में कविताएँ प्रकाशित। हंस ,कादम्बिनी ,अभिनव इमरोज सरिता ,मुक्त व गृहशोभा इत्यादि में रचनाएँ प्रकाशित

अन्य- साहित्य प्रोत्साहन संस्थान ,मनकापुर ,उत्तर प्रदेश द्वारा साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित

म्पर्क सूत्र  एफ  यू आई टी कॉलोनी ,धौलाभाटा ,अजमेर। राजस्थान 305007

guptamanjushri@gmail.com

-0-


Responses

  1. नेह की आँच
    पिघल बह चला
    मोम सा मन ।

    माँ का जीवन
    ममता लुटाकर
    पाता खज़ाना ।

    गाँव की गोरी
    प्यासा है पनघट
    खाली मटका।
    bahut hi sunder haiku
    aap tino ko badhai
    rachana

  2. कमला जी खूबसूरत भाव पूर्ण हाइकु रचे हैं विशेषकर ..राहों पे बिछी ……ने मन द्रवित किया |शेफाली जी आपके भी हाइकु पसंद आये | डॉ मंजुश्री गुप्ता जी आपके भी सभी हाइकु ने मन को छुआ | ख़ास कर बचो लडकी /चतुर बहेलिये …… आप तीनो को हार्दिक बधाई |

  3. कमला निखुर्पा जी आप के हाइकु नेह की महत्ता बताते बहुत सुन्दर लगे…. छक के पिये / जो नेह अमि मधु / तृप्त हो जाये ।
    शैफाली गुप्ता जी आप की माँ की ममता एवम् बिटिया का कोमल मन/सच से लबालब भी भा गया ।
    डा.मँजुश्री गुप्ता जी आप के यथार्थवादी सामयिक हाइकु बहुत खूब लगे ।जैसे… स्याह चेहरे / सफेदपोश लोग / टूटते रिश्ते ।सभी उत्तम हैं ।आप सभी को बधाई ।

  4. sabhi haiku yathart se bhare hain , teeno rachnakaron ko badhai .
    pushpa mehra.

  5. कमल निखुर्पा जी का संवेदनशील और सुंदर सृजन मन को छू गया…..भूल जा मन……गहन वेदना को कितने सहज और सरल शब्दों में मार्मिकता से अभिव्यक्ति किया गया है ! अन्य हाइकु भी उत्तम।
    शेफाली जी और मंजू श्री जी के सृजन ने भी प्रभावित किया ।
    आप सभी को बधाई !

  6. एक से बढ़के सभी के हाइकु
    सभी को बधाई

  7. बहुत सुन्दर हाइकु…हार्दिक बधाई…|

  8. sabhi haiku bahut achhe hain aap sabko hardik badhai..

  9. अति सुन्दर हाइकु कमला जी शैफाली जी एवम् मंजू श्री जी

  10. बहुत सुन्दर हाइकु

  11. वाह वाह सुन्दर हाइकु

  12. भूल जा मन
    रिश्तों की अनबन
    बीता जीवन ।बहुत सटीक हाइकु कमला निखुर्पा जी ,बधाई
    महका घर
    फ़ूलों–सी जो सुन्दर
    बिटिया मेरी।! मन की बात कह डाली शैफाली गुप्ता”
    स्याह चेहरे
    सफेदपोश लोग
    टूटते रिश्ते । सही कहा डॉ मंजुश्री गुप्ता जी

  13. बेहद सुन्दर हाइकु…. कमला जी शैफाली जी एवम् मंजू श्री जी बधाई।

  14. कमला जी शैफाली जी डॉ०मंजु जी उम्दा भाव ।
    शुभकामनाएं


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