Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अक्टूबर 15, 2015

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कम शब्दों में गहरी से गहरी बात

हरकीरत हीर

हाइकु लेखन में मुझे पहले अरुचि -सी हुआ करती थी …शायद पहले मैंने इसे गम्भीरता से नहीं लिया था या यूँ कहें कि इसकी गहराई में उतर ही नहीं पाई थी .. जब रामेश्वर काम्बोज जी ने अपनी वेब साइट से जोड़ हाइकु लेखन का अनुरोध किया तो धीरे -धीरे यह समझ आया कि यह विधा तो शब्दों का चमत्कार है .. सबसे कम शब्दों में गहरी से गहरी बात कह जाना इसकी खूबसूरती है और यह इतना आसान नहीं जितना दीखता है ….

          आज ही मिले पुष्पा मेहरा जी के हाइकु संग्रह ‘मन- सागर’ ने मन मोह लिया और इस चमत्कार से साँझा करवाया । प्रकृति पर केंद्रित इतने खूबसूरत हाइकु पढ़कर मन आत्मविभोर हो उठा …प्रकृति हमारे जीवन से जुड़ी रब्ब की सबसे खूबसूरत देन है .. इसके बिना जीवन अधूरा- सा है … ये नदी , झरने , पर्वत , पशु -पक्षी , पेड़ – पौधे , चाँद , सूरज सभी प्रकृति का खूबसूरत अंग हैं … इस नैसर्गिक सौंदर्य से ही आँखें तृप्त हो जाती हैं …अपने दुःख सुख में हम इन्हीं को अपना निकटतम मित्र बनाते हैं और इस सौंदर्य को एक प्रकृति- प्रेमी ही कलमबद्ध कर सकता है … पुष्पा जी की कलम ने इस इस अद्भुत सौंदर्य को न सिर्फ़ चुन- चुनकर पिरोया है ;बल्कि अपने शब्दों की कलात्मकता से इसके सौंदर्य को और बढ़ा दिया है ….मैं ज्यादा तो नहीं बस चंद हाइकुओं की ही झलक आपको दूँगी …अच्छे लगे तो पुष्पा जी से या अयन प्रकाशन से पुस्तक ले कर ज़रूर पढियेगा …

1

मन्द मुस्कान

बिखेरती कलियाँ

धूप पे हँसी ।

2

सूर्य ने डाला

मन भर सिंदूर

साँझ की माँग ।

3

फूलों ने ओढ़ी

चुनरी बंधेज की

हवा मचली ।

4

आँधी रेतीली

ताज ले काँटों– भरा

खड़ा कैक्टस।

5

शीत धुनकी

फैलाती धरा पर

पाले की रुई।

6

खोली किताब

मुरझाया गुलाब

ताज़ा हो झरा ।

****

यह संग्रह इसी वर्ष अयन प्रकाशन , दिल्ली  से प्रकाशित होकर आया है और इसमें पुष्पा जी के 645 हाइकुओं का संचयन है …. पुष्पा जी के इससे पहले 3 काव्य संग्रह और भी प्रकाशित हो चुके हैं ….पुष्पा जी का दूरभाष न है – 011-22166598

          मेरी हार्दिक बधाई पुष्पा जी को इस खूबसूरत संग्रह के लिए … उम्मीद है कि यह संग्रह हाइकु संग्रहों में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में कामयाब होगा ….

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Responses

  1. pusha ji ko hardik badhai…or aapko bhi kayoki ab aapko bahut gahare tak pasand aa gaye tabhi aapne itna achha likha.. 🙂

  2. सुन्दर पुस्तक-परिचय!
    धन्यवाद हरकीरत जी!

  3. प्रिय ‘heer’ जी आपने अपने अनमोल सुंदर शब्दों द्वारा सागर- मन काव्य संग्रह की प्राप्ति सूचित की आपका बहुत – बहुत आभार |
    पुष्पा मेहरा

  4. सभी गहराई लिए सुंदर हाइकु
    पुष्पा मेहरा जी के हाइकु संग्रह ‘मन- सागर’ के लिए , समीक्षक हरकीरत हीर को बधाई . विश्व साहित्य में शिखर को छुए .
    जय माता दी

  5. हरकीरत हीर जी ने पुष्पा जी के हाइकु संग्रह के बारे में सुन्दर परिचय दिया है और कुछ हाइकु भी चुनकर लिखे हैं सभी हाइकु अत्यंत खूबसूरत हैं |आप दोनों को ही मेरी ओर से शुभकामनाएं और बधाई |

  6. harkirat ji bahut hi pyare shabdon me aapne likha hai
    pustak jarur hi bahut achchhi hogi jarur padhungi pushpa ji ko badhai
    aapka abhar
    rachana

  7. बहुत बहुत बधाई पुष्पा जी !

  8. आ०पुष्पा मेहरा जी पुस्तक के प्रकाशन पर हार्दिक बधाई !!

    हरकीरत जी के काव्य संग्रह संबंधी विचारों ने पुस्तक परिचय देते हुए अपने वैयक्तिक काव्य लेखन रूचि की ओर संकेत करके सिद्ध कर दिया है कि रचनाकार कभी भी एक परिपाटी में बंधकर नहीं रह सकता।उसकी अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकता।

  9. मोहक पुस्तक पर बहुत सुन्दर प्रस्तुति …हीर जी एवं पुष्पा जी को बहुत-बहुत बधाई

  10. aadarniya pushpa ji kopyari v sundar pustak prakashan ke liye dheeron shubhkaamnayen saath hi heer ji ko jinhonen is par sundarta se likha hain !

  11. हरकीरत जी…अपने मन की बात कहते हुए आपने पुष्पा जी के इस संग्रह के प्रति मिश्चित रूप से पाठको में एक उत्सुकता जगा दी है…|
    पुष्पा जी को हार्दिक बधाई…|


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