Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अक्टूबर 14, 2015

1502


1-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

ज्योत्स्ना

-0-

2-अनिता मण्डा

अनिता मण्डा

-0-

3-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

1

दो मीठे बोल

घुले मन-सागर

बहा निर्झर ।

2

बहें हवाएँ

ये बन्द अर्गलाएँ

रोक न पाएँ ।

3

द्वारे दस्तक

बढ़ी थी धड़कन

तुम आ गए !

4

बन्द कपाट

किए जब मन के

बुद्धि बौराई ।

5

जीवन शून्य

छाए घुप्प अँधेरा

जब मन में।

6

जला ही दिए

मेरे मन के दीए

साँसों ने तेरी।

7

घना जंगल

झाड़ियों घिरा रस्ता

फटा आँचल।

8

कुछ तो पाया

दर्द को या  तुझको

गले लगाया।

9

दीवारें देखीं-

बाहर खिलखिल

भीगी भीतर।

10

ओ मेरे मन

जितने भी थे तोड़े

कसे बन्धन ।

11

दु:ख कहके

लगा हम बहके

दो पल जिए ।

12

वो  न समझे

हम क्या समझाते

बीती  है उम्र।

13

कुछ न मिले

दो ही  घूँट प्यार के

होते बहुत ।

14

आस न छोड़ो

अधर कहते हैं-

प्यास न छोड़ो।

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Responses

  1. बहुत सुन्दर हाइकु!
    ज्योत्स्ना जी, अनिता जी शुभकामनाएँ !
    ‘दीवारें देखीं-
    बाहर खिलखिल
    भीगी भीतर’ ———- अद्भुत, अद्वितीय!!
    काम्बोज सर, प्रणाम!

  2. उम्दा हाईकू !!आ०रामेश्वर जी !! प्रकृति व मानवीय मन का सुमेल बहुत खूब!!

  3. मेरे हाइगा को स्थान देने हेतु आभार। ज्योत्स्ना जी सुंदर हाइगा।
    अंकलजी एक से बढ़कर एक हाइकु।
    बहें हवाएँ
    ये बन्द अर्गलाएँ
    रोक न पाएँ । अद्भुत।
    प्रणाम आपकी लेखनी को , आपको।

  4. अतिसुन्दर हाइगा सखी ज्योत्स्ना जी एवं अनीता !
    हार्दिक बधाई आप दोनों को !

    आदरणीय भैया जी, क्या कहें ! इतनी सुंदर, मनमोहक अभिव्यक्ति ! दिल को छू गए सभी हाइकु !

    कुछ तो पाया
    दर्द को या तुझको
    गले लगाया।

    दीवारें देखीं-
    बाहर खिलखिल
    भीगी भीतर। –मन को भिगो गए !

    हार्दिक बधाई !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. आदरणीय रामेश्वर जी

    बहुत बहुत सुन्दर हाइकू हैं हर हाइकू अपनी अपनी कहानी कह रहा है। सुन्दर

    बधाई

    ज्यात्स्ना जी और अनीता जी के हाइगा सुन्दर

  6. 1. दीवारें देखीं ……..,२. कुछ न मिले \ दो ही घूंट प्यार के \ होते बहुत | मेरे द्वारा उद्धृत पहला हाइकु बहुत गहरा भाव छिपाये है ,दूसरे हाइकु का सार जीवन का अर्थ समझा रहा है |विभिन्न भावों पर आधारित सभी हाइकु बहुत सुंदर हैं | भाई जी आपके भावों को नमन |
    ज्योत्स्ना जी व अनिता जी के हाइगा तो कमालके हैं , दोनों को बधाई |
    पुष्पा मेहरा

  7. बंद कपाट /किए जब मन के /बुद्धि बुराई
    दीवारें देखीं /बाहर खिल खिल / भीगी भीतर
    कुछ न मिले /दो ही घूँट प्यार के /होते बहुत

    सभी हाइकु, जो कहा गया है, उससे कहीं अधिक कहते हैं.काम्बोज जी आपको बधाई
    डा. ज्योत्सना तथा अनिता जी के हाइगा भी बहुत सुन्दर हैं. सुरेन्द्र वर्मा

  8. laajvaab haaiga

    भाई हिमांशु जी हाइकु में गागर में सागर भर दिया .
    आप दोनों को बधाई .

  9. बहुत सुन्दर हाइगा….ज्योत्स्ना जी, अनीता जी बधाई!

    दीवारें देखीं-
    बाहर खिलखिल
    भीगी भीतर।

    कुछ न मिले
    दो ही घूँट प्यार के
    होते बहुत।…………..उत्तम हाइकु मन को छू गए!

    हार्दिक बधाई भाईसाहब!

  10. सभी बहुत सुंदर।
    विशेष बिम्ब
    .
    आस न छोड़ो
    अधर कहते हैं-
    प्यास न छोड़ो।

    नमन सर।

  11. ज्योत्स्ना शर्मा जी और अनिता मंडा जी गुलमोहर पर सुंदर हाइकु लिख कर चित्र की शोभा और बढ़ा दी। दोनों के हाइकु बहुत सुंदर भावपूर्ण हैं। रामेश्वर जी आप के हाइकु तो उत्कृष्ट हाइकु हैं। ह्रदय ही उंडेल कर रख दिया हर हाइकू में। किसी एक की तारीफ करना अन्य हाइकु के साथ अन्याय होगा। ऐसी रचना पढ़ने का आनंद ही कुछ और होता है। बहुत बहुत हार्दिक शुभ कामनायें। आप की लेखनी यूँ ही बुलंदिओं को छूती रहे।

  12. मेरे हाइकु पसन्द करने के लिए आप सभी स्नेहीजन का हृदय से आभार !

  13. घना जंगल
    झाड़ियों –घिरा रस्ता
    फटा आँचल।
    bahut gahan abhivaykti hai is haiku men”mano kah rahe hai ki pareshaniyon musibaton se ghira hamara man dukon (jhaadiyon ghira rasta) ke raste se jab gujra to dil jar jar roya bahut khub!
    कुछ न मिले
    दो ही घूँट प्यार के
    होते बहुत ।
    eakdam sach!
    आस न छोड़ो
    अधर कहते हैं-
    प्यास न छोड़ो।
    bahut sundar..
    दीवारें देखीं-
    बाहर खिलखिल
    भीगी भीतर।
    bahut payara hai ye haiku alag trha ka prog achha laga meri hardik badhai..

    haiga ne bhi man moh liya bahut bahut badhai sabhi lekhkon ko…

  14. bhaiya ji bahut sundar bhaav………

    बहें हवाएँ
    ये बन्द अर्गलाएँ
    रोक न पाएँ ।
    aashao ka sundar sanchaar –
    जला ही दिए
    मेरे मन के दीए
    साँसों ने तेरी।
    sach !jo dikhta hai vo hota nahin !
    दीवारें देखीं-
    बाहर खिलखिल
    भीगी भीतर।

    sundar sakratmak sandes-
    आस न छोड़ो
    अधर कहते हैं-
    प्यास न छोड़ो।
    jyotsna ji gulmohar par mohne wala haiga ,”dhoop ke paanv ‘
    anita ji bada hi manmohak haiga ” gulmohar ,vinamr hua “…aap logon ko hridy se badhai !

  15. ज्योत्सना जी और अनीता जी के गुलमोहर के प्यारे रंगों में रंगे हांईगा और भाई कम्बोज जी के सभी हाइकू बहत अच्छे लगे विशेषकर दीवारें देखी /बाहर खिलखिल /भीतर भीगी |और आस न छोडो/ अधर कहते हैं/प्यास न छोडो | आप सभी को बधाई |

  16. jyotsna ji anita ji gulmohar pr bahut sunder haiku bhaiya
    आस न छोड़ो
    अधर कहते हैं
    प्यास न छोड़ो।
    bahut hi gahri abhivyakti ye to aap hi likh sakte hain badhai sabhi ko
    rachana

  17. बहुत सुंदर हाइगा जयोत्सना जी व अनिता मंडा जी बधाई! रामेश्वर भैया जी के हाइकुओं ने तो मन ही रंग दिया वाह वाह सभी सुंदर यह बहुत गहरा हाइकु ,बधाई आपको!
    बन्द कपाट
    किए जब मन के
    बुद्धि बौराई ।

  18. ज्योत्सना जी , अनीता जी, बधाई, बहुत सुंदर हाइगा!

  19. बहुत बढ़िया हाइगा…बधाई…|

    बन्द कपाट
    किए जब मन के
    बुद्धि बौराई ।
    कितनी सटीक बात…| आदरणीय काम्बोज जी के सभी हाइकु कुछ न कुछ गहरी बात कर जाते हैं, बहुत बहुत बधाई…|

  20. द्वारे दस्तक
    बढ़ी थी धड़कन
    तुम आ गए !
    यह विशेष सभी हाइकु गहराई लिए हुए भाई कम्बोज जी . .
    हाइगा लाजवाब हैं डॉ ज्योत्स्ना शर्मा , अनिता मंडा जी के .

    बहुत बधाई…


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