Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अक्टूबर 10, 2015

चम्पई भोर


1-डा. सुरेन्द्र वर्मा

1

पुलक उठी

जूही मधुमालती

स्वागत क्वार

2

तुम क्या आए

मिटे मैल मन के

मिटे शिकवे

3

गूँजा आँगन

कई दिनों के बाद

बोली गौरैया

4

रात की रानी

खिली, किसने देखी

उडी सुगंध

5

बेतकल्लुफ

खुली खिड़की देख

आई  चाँदनी  ।

6

चम्पई भोर

फुनगी पर कागा

करता शोर

9

गीली धरती

ओढ़े चादर धानी

भीगी चाँदनी।

10

शरद श्वेत

उरई के पात पे

बूँदें सफ़ेद 

-0-

उराई=खस

-0-

सविता अग्रवाल ‘सवि

1

बिना संवाद

भटकता है मन

याद सताती

2

प्रीतम बिन

जीवन रसहीन

यादों के तीर

3

मन लगता

खाली गागर जैसा

पिया का प्यासा

घना कोहरा

तुम बिन प्रीतम

राह न सूझे

4

प्यासी धरा– सा

पुकारे प्रीतम को

अधीर मन

4

नैना बरसें

जियरा है बैचेन

मन तरसे

-0-

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Responses

  1. सभी हाइकु उम्दा आदरणीय डॉ सुरेन्द्र वर्मा जी व सविता सवि जी को हार्दिक बधाई

  2. सभी हाइकु बहुत सुन्दर!
    शुभकामनाएँ !!

  3. सभी हाइकु गागर में सागर हैं
    आप दोनों को बधाई

  4. सभी हाइकु बहुत सुंदर!
    आदरणीय सुरेन्द्र वर्मा जी एवं सविता अग्रवाल जी को हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. अमित अग्रवाल जी ,मंजू गुप्ता जी और अनीता जी आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद सराहना के लिए | सम्पादक द्वय का भी आभार |मेरे हाइकु को यहाँ स्थान देने के लिए |
    सादर
    सविता अग्रवाल “सवि”

  6. वर्मा जी ,एवं सविता जी के हाईकु अच्छे लगे .सविता जी ने श्रृगार रस की सुन्दर प्रस्तुति की है.बधाई .

  7. गूँजा आँगन
    कई दिनों के बाद
    बोली गौरैया ।

    Dr surendra ji ये हाईकू दिल छू गया ।

    पूरी रचना बहुत खूब!!!

  8. सविता जी
    प्यासी धरा और अधीर मन तुलनात्मक प्रस्तुति बधाई!!

  9. सुरेन्द्र सुन्दर हाइकू वाह

    सविता जी सुन्दर हाइकू

  10. उत्साहवर्धन के लिए आप सभी का हार्दिक आभार |

  11. सुरेन्द्र वर्मा जी आपके सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे। बेतकल्लुफ़ /खुली खिड़की देख /आई चाँदनी। सुंदर चित्रण।
    और सविता जी आप के हाइकु में प्रेमपूर्ण हृदय की भावनाओं का सुंदर चित्रण भी भा गया।
    बहुत भाया … बिना संवाद /भटकता है मन /याद सताती।
    दोनों को बधाई।

  12. सुरेन्द्र वर्मा जी एवं सविता जी आप दोनों के हाइकु बहुत मन भाए…..हार्दिक बधाई।

  13. चम्पई भोर व घना कोहरा – सुरेन्द्र वर्मा जी एवं सविता जी दोनों के हाइकु सुन्दर हैं।
    हार्दिक बधाई स्वीकार करें!
    – डॉ कुंवर दिनेश, शिमला

  14. sundar haiku meri badhai..

  15. aadarniy surendra ji evam savita ji …bahut pyare haiku hain…meri badhai sveekaar kijiye…

  16. बेतकल्लुफ
    खुली खिड़की देख
    आई चाँदनी ।
    बहुत सुन्दर…| बधाई…|

    सविता जी के भी सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे, बधाई…|


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