Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 8, 2015

शब्दों की फाट


1-डॉ कुँवर दिनेश सिंह

1

शब्दों की फाट

संबंधों के खेत में

मन उचाट ।

2

शब्द हैं सही

अर्थ बदल रहे

शब्दों की कही

3

शब्द है वही

अर्थ बना रहे हैं

दूध का दही

4

शब्द भी थके

मन को मनाने में

जीत ना सके

5

शब्द गलत!

अर्थ भी सारे हुए

क्षत– विक्षत।

-0-

 2-विजय आनंद

1

अकेलापन

आँगन में चाँदनी

मन उत्तप्त

2

अँधेरी राहें

ज़िन्दगी का सफ़र

यादों के दीप

-0-

3-भरत तिवारी भुवाल

भरत तिवारी1

चौराहे वही

राहें बँट गईं है

जाना है दूर

2

मदिरापान-

गागर में सागर

प्यासी लहर

3

नई दुल्हन

खिड़की से झाँकती

अपना गाँव।

4

नैंना तरसे

बेमौसम बरसे

कब आओगे

5

अँधेरा सच्चा

उजाले से लगता

मुझको डर ।

6

तूफ़ानी हवा

उड़ा ले गयी दूर

पंछी का नी्ड़।

 -0-2369/15    गोकुलनगर , GHB कनकपुर , सचिन, सूरत ( गुजरात)-394230

4-अमन चाँदपुरी

1

तोड़े बहुत

पुराने से बन्धन

वक़्त शिला ने।

2

धूप है गिरी

कोमल धरती पे

डरी-सहमी।

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Responses

  1. सुन्दर रचनाएँ!
    सभी लेखकों को शुभकामनाएँ !

  2. सुन्दर हाइकु के लिए सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई…|

  3. सुंदर सृजन के लिए सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई…|
    कुंवर दिनेश सिंह जी का…संबंधों के खेत में/ मन उचाट…….. बहुत सुंदर ।
    और भरत तिवारी जी का अंधेरा सच्चा….. बहुत अच्छे लगे।

  4. दिनेश जी, विजय जी,भरत जी वअम्न जी अमन जी आप सबके
    हाइकु अच्छे लगे।बधाई।

  5. फाट , उत्तप्त का अर्थ बताएं
    सभी हाइकु उत्कृष्ट
    बधाई

  6. सभी का अच्छा प्रयास !! बधाई !!!

  7. सभी का आभार!
    फाट ~ हलरेखा ~ खेत में हल से बनाई गई लीक अथवा दरार।

  8. Sabhi haiku bahut achhe hain bahut bahut badhai..

  9. सुन्दर ,सारगर्भित हाइकु …
    ‘शब्द’ पर गहन प्रस्तुति ..हार्दिक बधाई डॉ.कुँवर दिनेश सिंह जी !
    विजय जी , भरत जी एवम् अमन जी को भी सार्थक सृजन हेतु बहुत बधाई !

  10. sundar, saras haiku ke liye aadarniy kanwar dinesh ji,vijay ji ,bharat ji evam aman ji ko haardik badhai !

  11. डॉ कुंवर दिनेश जी ‘शब्द’ पर सुन्दर भावों से परिपूर्ण प्रस्तुति है |शब्द भी थके/ मन को मनाने में/ जीत न सके | बहुत खूब रचा है |चंचल मन को मनाना बहुत कठिन होता है |
    विजत आनंद जी ,यादों के दीपों के सहारे ही ज़िंदगी कटती है |सुन्दर है |
    भरत जी और अमन जी आपसभी को बधाई और शुभकामनाएं |

  12. सभी का हार्दिक आभार. उत्तप्त … अत्याधिक गर्म, तपना

  13. कुंवर दिनेश , विजय आनंद ,भारत तिवारी और अमनपुरी। आप सब की रचनाये सुंदर लगीं ।
    शब्दों को बिम्ब रूप में लेकर भावपूर्ण हाइकु हैं।
    शब्द हैं वही /अर्थ बना रहे हैं /दूध का दही।
    अकेलापन /आँगन में चाँदनी /मन उत्तप्त। तोड़े बहुत …. तूफानी हवा … अच्छे लगे
    हार्दिक बधाई सब को।

  14. डाॅ दिनेश जी,विजय जी ,अमन जी,भरत जी सुंदर भावों व बिम्बों का संयोजन , हाइकु बहुत सुन्दर हैं ।बधाई आप सब को ।


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