Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अक्टूबर 6, 2015

घर कहाँ है ?


 1डॉ भगवतशरण अग्रवाल

सन् 1989

सन् 1989

1

तुम्हारे बिना

दीवारें हैं, छत है

घर कहाँ है ?

 2

मेरे घर में

छ: जने, चार दिशा

नभ और मैं  

-0-

2-शान्ति पुरोहित 

1

न कह देना

बेघर अपने को

आओ दिल में

2

दृग की कोर

खारे पानी की झील

है लबालब

3

मिले जो तुम

जीवन बगिया में

खिले प्रसून

4

सिंदूरी साँझ

गगन से उतरी

भू से लिपटी

5

वृद्ध माँ बाप

सूने दृग आस

उड़े परिंदे

-0-

3-अनिता मण्डा

अनिता मण्डा

-0-

 

4-सौरभ चतुर्वेदी

1

भरी भीड़ में

चुभता है सन्नाटा

अन्तस्तल में ।

2

तुम जो आए

साथ अपने लाए

न्यारी सौगात ।

3

शान्त निर्झर

झरता झर-झर

खड़ा अकेला ।

3

बूँदें ओस की

लिपटतीं पैरों से

बच्चों के जैसे ।

4

बीज हूँ मैं तो

फूल बनके खिला

मिट्टी में दबा ।

-0-

स्मृतियाँ

डॉ भगवतशरण अग्रवाल(हिन्दी के  प्रथम हाइकु संग्रह के कवि और  प्रथम ‘हाइकु-काव्य विश्वकोश’ के लेखक)विश्वकवि सम्मेलन , भोपाल के अवसर पर पधारे  थॉमस ट्रांसट्रोमर के साथ, जिन्हें बाद में नोबल प्राइज़ दिया गया।

1989-BHAGAVATSARAN AGRAWAL

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Responses

  1. आदरणीय भगवत शरण जी , मेरे घर में/ छह: जने ,चार दिशा /नभ और मैं सुन्दर है |शान्ति जी कह ना देना ….,अनिता जी का हाइगा और सौरभ जी के हाइकु पसंद आये |विशेषकर बीज हूँ मैं तो ….| सभी को बधाई और शुभकामनाएं |

  2. Sabhi haiku bahut sundar!
    मेरे घर में
    छ: जने, चार दिशा
    नभ और मैं ……………….laajawaab!!
    shubhkaamnaayen..

  3. आदरणीय भगवत शरण जी को देखकर बड़ी प्रसन्नता हुई उन्होंने अपनी ‘हाइकु भारती’ के माध्यम से न जाने कितनों को हाइकु लेखन में दीक्षित किया. उनमें से एक मैं भी हूँ.. मेरा विनम्र प्रणाम.अकेले पुरुष के एकाकीपन को रेखांकित करने वाली उनकी प्रस्तुत रचनाएं कितनी सार्थक हैं ! देखते ही बनाता है. -सुरेन्द्र वर्मा

  4. आ०भगवती शरण अग्रवाल जी ,आपकी हाईकू साहित्य की देन अमूल्य है ।
    आपके हाईकू गहन भावों की अभिव्यक्ति तो कर रही रहें है वहाँ जीवन दर्शन की गहराइयों में मानव मन को डुबो देने की सामर्थ्य से युक्त है ।बधाई एवं आभार !! नवसृजनकारों को आशीष देने हेतु!!

  5. पुरोहित जी उड परिन्दे में जीवन का सार कह दिया ।बहुत खूब!!

  6. सौरभ जी !! चुभता सन्नाटा ! क्या बात कही ! लाजवाब!!

  7. ‘तुम्हारे बिना’ ..और ..’मेरे घर में ‘ जैसे हाइकुओं के साथ आपकी उपस्थिति हिन्दी हाइकु परिवार के लिए आपका स्नेहसिक्त मार्गदर्शन और आशीर्वाद है ..सदैव रखियेगा

    आदरणीय डॉ. भगवत शरण अग्रवाल जी के प्रति सादर नमन वंदन के साथ …
    ज्योत्स्ना शर्मा

  8. बहुत सुन्दर भाव युक्त हाइगा अनिता जी …ढेरों बधाई !

    शुभ कामनाओं के साथ
    ज्योत्स्ना शर्मा

  9. सिंदूरी साँझ और वृद्ध माँ-बाप …बेहद मोहक शान्ति पुरोहित जी बहुत-बहुत बधाई !

    बूँद ओस की , बीज हूँ मैं तो ..बहुत सुन्दर हाइकु …हार्दिक बधाई सौरभ चतुर्वेदी जी !

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  10. तुम्हारे बिन….मेरे घर में…आ० भगवत शरण जी!
    बूढ़े माँ-बाप…शांती पुरिहित जी!
    भरी भीड़ में…..सौरभ चतुर्वेदी जी!
    अनीता जी बहुत सुन्दर हाइगा!
    बहुत सुन्दर लाजवाब हाइकु….आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।

  11. सभी सुन्दर हाइकू …बधाई

  12. आदरणीय भगवत शरण जी गागर में सागर भर दिया आपके हाइकू ने।

    शांति जी दृग की कोर लाजवाब वृद्ध माँ बाप दिल को छु गया। बधाई

    अनीता जी वाह जीने की प्रेरणा से भरपूर। बधाई

    सौरभ जीसभी हाइकू सुन्दर हैं वाह। बधाई

  13. aadarniya dr. bhagwat sharan aggrwalji ko saadar naman!..तुम्हारे बिना
    दीवारें हैं, छत है
    घर कहाँ है ?
    2
    मेरे घर में
    छ: जने, चार दिशा
    नभ और मैं । …jeevan darshan ki gahanta mein doobe haiku ….aapka sneh ,aashirvaad isi tarh bana rahe ….. hindi haiku parivaar ko aapka margdarshan milta rahe…aapki lekhni ko sadar naman !

  14. वृद्ध माँ– बाप
    सूने दृग न आस
    उड़े परिंदे ।

    बूँदें ओस की
    लिपटतीं पैरों से
    बच्चों के जैसे ।bahut sundar bhaav liye haiku saath hi haiga bhi….. behad bhavuk karne wala …shanti ji ,anita ji evam saurabh ji ko haardik badhai !

  15. सभी लाजवाब सभी हाइकु

    बधाई

  16. तुम्हारे बिना
    दीवारें हैं, छत है
    घर कहाँ है ?

    eakdam sach! bahut bahut badhai..
    वृद्ध माँ– बाप
    सूने दृग न आस
    उड़े परिंदे ।
    dard se otprot haiku..
    haiga bhi bahut achha hai
    बूँदें ओस की
    लिपटतीं पैरों से
    बच्चों के जैसे ।
    bahut pyara..
    sabhi ko hardik badhai…

  17. मेरे घर में
    छ: जने, चार दिशा
    नभ और मैं ।
    किसी इंसान के अकेलेपन को कितनी खूबसूरती से बयान कर दिया गया है चाँद शब्दों में…| हार्दिक बधाई…|

    अनीता जी, सौरभ जी और शान्ति जी को भी बहुत बधाई…|


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