Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 2, 2015

वादों की किरचे


रचना श्रीवास्तव

1

दोस्त दे धोखा

तो वादों की किरचें

चुभें हमेशा ।

2

चाँद अकेला

तारों ने दिया धोखा

घन में छुपे ।

3

बेवफ़ा दोस्त

दर्द की नागफनी

उगे आँखों में।

4

टूटा विश्वास

क्यों बनाया तुमको

अपना खास ।

5

मैने बिछाई

पलकों की चादर

फाड़ी तुमने

6

बातों की गंध

हो गई दुर्गन्धित

हमारे बीच

7

स्नेह- दरिया

जलकुम्भी से पटा

दूषित जल ।

8

हवा में लगी

नफरत की गाँठ

फैली घुटन ।

9

दुर्भावना क्यों

मन में यूँ तुम्हारे

वर्षों से पली ।

10

क्या तुमको भी

हुआ दर्द उतना

मुझे जितना

-0-

Los Angeles, CA

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Responses

  1. चाँद अकेला
    तारों ने दिया धोखा
    घन में छुपे ।

    मनोहारी बिंब !

    बेवफ़ा दोस्त…..दर्द की नागफनी
    बहुत सटीक !

    बहुत-बहुत बधाई रचना जी !

  2. रचना जी स्वार्थी रिश्तों को टीस भरे बेहतरीन हाइकु।बधाई

    हवा में लगी
    नफरत की गाँठ
    फैली घुटन ।

  3. दोस्त दे धोखा
    तो वादों की किरचें
    चुभें हमेशा ।

    टूटा विश्वास
    क्यों बनाया तुमको
    अपना खास ।

    BAHUT KAMAL KE HAIKU HAIN YE DONO BAHUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUUT BADHAI..

  4. बहुत सुन्दर हाइकु…बहुत बहुत बधाई रचना जी…|

  5. क्या तुमको भी
    हुआ दर्द उतना
    मुझे जितना

    बेहतरीन!! गहन अर्थ ध्वनित करता ये हाईकू सुन्दर है

  6. sabhi haiku bahut sunder hain . rachana ji apako badhai.
    pushpa mehra.

  7. दोस्ती में विश्वासघात के दर्द को उकेरते भावपूर्ण हाइकु !
    बहुत बधाई रचना जी !!

  8. रचनाजी,
    बहुत दिनों बाद आपके हाइकुओं को पढ़ने का मौका मिला … वादों की किरचों का चुभना और आँखों में नागफनी का उगना … क्या बात है .. अनुपम

  9. manmohak utkrisht prastuti .

    रचना श्रीवास्तव ji badhaai .

  10. हवा में लगी
    नफरत की गाँठ
    फैली घुटन ।

    टूटा विश्वास
    क्यों बनाया तुमको
    अपना खास ।

    बहुत सुन्दर हाइकु। रचना जी हार्दिक बधाई।

  11. बेबफा दोस्त/ दर्द की नागफनी /चुभे आँखों में
    बातों की गंध /हो गयी दुर्गंधित /हमारे बीच |
    रचना जी ह्रदय चीरते हाइकु हैं हार्दिक बधाई |

  12. haiku pasand karne ke liye aap sabhi ka dil se abhar
    dhnyavad
    rachana

  13. रचना जी गज़ब के गहरे भाव लिए आपके हाइकू दिल को भीतर तक छू गए।

    बहुत बहुत बधाई

    मंजूषा “मन”

  14. sabhi bahut sundar!
    दोस्त दे धोखा
    तो वादों की किरचें
    चुभें हमेशा ………….shabdaateet!
    Rachna ji shubhkaamnaayen!

  15. चाँद अकेला
    तारों ने दिया धोखा
    घन में छुपे ।
    rachna ji sabhi haiku manmohak hain par ye abhivyaki bahut hi pyaari ….aapko dheron shubhkaamnayen!


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